शुभकालभारतEN

पंचांग कैसे बनता है

शुभकाल पर दिखने वाला हर समय और हर तिथि हमारे अपने सर्वर पर सूर्य और चंद्रमा की स्थिति से गिनी जाती है। इस पन्ने पर हम सीधी भाषा में बता रहे हैं कि पंचांग बनता कैसे है और आपके शहर का समय किसी दूसरे शहर से अलग क्यों होता है।

आज का लाहिड़ी अयनांश (हमारी गणना): 24° 13′ 55″

इस पेज पर

  1. पंचांग के लिए सूर्य और चंद्रमा की स्थिति कैसे निकाली जाती है?
  2. अयनांश क्या है और पंचांग में इसकी ज़रूरत क्यों पड़ती है?
  3. तिथि, नक्षत्र, योग और करण की गणना कैसे होती है?
  4. सूर्योदय, सूर्यास्त, चंद्रोदय और चंद्रास्त का समय कैसे तय होता है?
  5. राहु काल, चौघड़िया और अभिजित मुहूर्त कैसे निकाले जाते हैं?
  6. पंचांग में कौन-सी मास गणना और कौन-सा संवत माना जाता है?
  7. हिंदू त्योहार की सही तारीख़ कैसे तय होती है?
  8. पंचांग का समय हर शहर में अलग क्यों होता है?
  9. पंचांग कितना सटीक है, और क्या-क्या जाँचा गया है?

पंचांग के लिए सूर्य और चंद्रमा की स्थिति कैसे निकाली जाती है?

किसी भी पंचांग की नींव यह जानना है कि किसी पल सूर्य और चंद्रमा आकाश में ठीक कहाँ हैं। यह गणना हम astronomy-engine नाम की एक खुली (ओपन-सोर्स) खगोल लाइब्रेरी से करते हैं। सूर्य और ग्रहों के लिए यह VSOP87 सिद्धांत का उपयोग करती है और चंद्रमा के लिए मॉन्टेनब्रुक और प्फ्लेगर के चंद्र-सिद्धांत का। इसकी सटीकता सूर्य के लिए एक कला (एक अंश का साठवाँ हिस्सा) से काफ़ी बेहतर और चंद्रमा के लिए लगभग एक कला है।

सारी गणना हमारे अपने सर्वर पर होती है। हम किसी दूसरे पंचांग या वेबसाइट से आँकड़े नहीं उठाते।

अयनांश क्या है और पंचांग में इसकी ज़रूरत क्यों पड़ती है?

खगोल लाइब्रेरी ग्रहों की स्थिति वसंत विषुव बिंदु से नापती है, जिसे सायन स्थिति कहते हैं। भारतीय पंचांग तारों को आधार मानकर स्थिति नापता है, जिसे निरयण स्थिति कहा जाता है। पृथ्वी की धुरी धीरे-धीरे लट्टू की तरह डोलती है, इसलिए विषुव बिंदु तारों के मुक़ाबले हर साल थोड़ा पीछे खिसक जाता है। सायन और निरयण के बीच के इसी अंतर को अयनांश कहते हैं।

हम लाहिड़ी अयनांश का उपयोग करते हैं, जिसे चित्रपक्ष अयनांश भी कहते हैं। भारत सरकार की कैलेंडर सुधार समिति ने इसी को मानक माना था, और भारतीय खगोलीय पंचांग भी इसी पर चलता है। इस समय यह लगभग 24 अंश 13 कला है और हर साल करीब 50 विकला बढ़ता है। सूर्य या चंद्रमा की सायन स्थिति में से अयनांश घटा देने पर उसकी निरयण यानी भारतीय स्थिति मिल जाती है।

तिथि, नक्षत्र, योग और करण की गणना कैसे होती है?

पंचांग का दिन आधी रात से नहीं, सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है। किसी दिन के लिए जो तिथि, नक्षत्र आदि दिखाए जाते हैं, वे सूर्योदय के समय चल रहे होते हैं, और साथ में लिखा होता है कि हर एक कब समाप्त होगा। पंचांग के पाँच अंग इस तरह निकलते हैं:

कोई तिथि या नक्षत्र कब ख़त्म होगा, यह जानने के लिए हमारा प्रोग्राम समय में आगे बढ़ते हुए वह पल खोजता है जब कोण अगली सीमा पार करता है, और उस पल को सेकंड तक पकड़ता है।

  • तिथि: चंद्रमा सूर्य से जितना आगे है, उस दूरी को 12-12 अंश के हिस्सों में बाँटा जाता है। एक चंद्र मास में 30 तिथियाँ होती हैं, 15 शुक्ल पक्ष में और 15 कृष्ण पक्ष में।
  • नक्षत्र: चंद्रमा की निरयण स्थिति को 13 अंश 20 कला के 27 बराबर हिस्सों में बाँटा जाता है।
  • योग: सूर्य और चंद्रमा की निरयण स्थितियों का जोड़, जिसे 13 अंश 20 कला के 27 हिस्सों में बाँटा जाता है।
  • करण: आधी तिथि यानी 6 अंश का एक करण। एक चंद्र मास के 60 करणों में कुल 11 नाम बारी-बारी से आते हैं।
  • वार: सप्ताह का दिन, जो पंचांग में सूर्योदय से बदलता है।

सूर्योदय, सूर्यास्त, चंद्रोदय और चंद्रास्त का समय कैसे तय होता है?

सूर्योदय वह पल माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज को छूता है। इसमें हवा से रोशनी के हल्का मुड़ने यानी अपवर्तन का भी ध्यान रखा जाता है, जिससे सूर्य थोड़ा पहले दिख जाता है। सूर्यास्त में यही बात उलटी तरह लागू होती है।

चंद्रोदय और चंद्रास्त के लिए चंद्रमा के बिंब का बीच वाला हिस्सा क्षितिज पर माना जाता है। ज़्यादातर भारतीय पंचांग यही तरीका अपनाते हैं। समय मिनट तक दिखाए जाते हैं: सूर्योदय-सूर्यास्त से बने समय पास वाले मिनट तक राउंड होते हैं, और तिथि या नक्षत्र के ख़त्म होने का समय सेकंड हटाकर दिखाया जाता है।

राहु काल, चौघड़िया और अभिजित मुहूर्त कैसे निकाले जाते हैं?

राहु काल, यमगंड और गुलिक काल, तीनों दिन की लंबाई पर टिके हैं। सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर हिस्सों में बाँटा जाता है, और वार तय करता है कि कौन-सा हिस्सा किसका होगा। राहु काल का हिस्सा इस प्रकार है:

चौघड़िया में दिन और रात, दोनों को आठ-आठ हिस्सों में बाँटा जाता है। इनके सात नाम हैं: अमृत, शुभ और लाभ अच्छे माने जाते हैं, चर सामान्य है, और रोग, काल व उद्वेग से बचने की सलाह दी जाती है। गिनती किस नाम से शुरू होगी, यह वार से तय होता है।

अभिजित मुहूर्त दिन के 15 बराबर हिस्सों में से आठवाँ हिस्सा है, जो स्थानीय दोपहर के आसपास पड़ता है। परंपरा के अनुसार बुधवार को अभिजित मुहूर्त का उपयोग नहीं किया जाता।

  • सोमवार: दूसरा भाग
  • मंगलवार: सातवाँ भाग
  • बुधवार: पाँचवाँ भाग
  • गुरुवार: छठा भाग
  • शुक्रवार: चौथा भाग
  • शनिवार: तीसरा भाग
  • रविवार: आठवाँ भाग

पंचांग में कौन-सी मास गणना और कौन-सा संवत माना जाता है?

महीनों के नाम पूर्णिमांत पद्धति से रखे गए हैं, जो उत्तर भारत में चलती है। इसमें महीना पूर्णिमा पर पूरा होता है। जिस चंद्र मास में सूर्य किसी नई राशि में प्रवेश नहीं करता, यानी कोई संक्रांति नहीं पड़ती, उसे अधिक मास कहा जाता है। विक्रम संवत का नया वर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से शुरू होता है।

हिंदू त्योहार की सही तारीख़ कैसे तय होती है?

हर त्योहार का नियम हमारी डेटा फ़ाइल में लिखा है, और साइट पर हर तारीख़ के साथ बताया जाता है कि वह किस नियम से निकली। सामान्य नियम है कि सूर्योदय के समय जो तिथि हो (उदया तिथि), उसी से दिन तय होता है। अगर कोई तिथि किसी सूर्योदय को न छुए (क्षय तिथि), तो जिस दिन वह शुरू हो, उस दिन। जिन त्योहारों का अपना नियम है, वहाँ दिन का वही हिस्सा देखा जाता है: मध्याह्न (राम नवमी, गणेश चतुर्थी), अपराह्न (दशहरा, भाई दूज), प्रदोष काल (धनतेरस, दिवाली, प्रदोष व्रत), निशीथ (महाशिवरात्रि), चंद्रोदय (करवा चौथ, संकष्टी), और अक्षय तृतीया के लिए तीन मुहूर्त वाला नियम।

एकादशी स्मार्त नियम से: क्षय एकादशी उस दिन जब वह शुरू हो, दो सूर्योदयों तक चलने वाली एकादशी दूसरे दिन, और अगर अगले सूर्योदय तक द्वादशी न बचे तो व्रत एक दिन पहले, ताकि पारण द्वादशी में हो सके। ये नियम drikpanchang.com की नई दिल्ली की 2026 और 2027 की सभी 49 स्मार्त तारीख़ों से मेल खाते हैं; ग्रंथों के हर महाद्वादशी वाले मामले को ये नहीं समेटते। वैष्णव तारीख़ केवल अरुणोदय नियम से निकला अनुमान है।

होलिका दहन drikpanchang.com के बताए सात नियमों से तय होता है (पहले प्रदोष में, पूर्णिमा रहते और भद्रा के बिना; फिर भद्रा मध्यरात्रि से पहले ख़त्म हो तो उसके बाद; फिर भद्रा पूँछ; भद्रा मुख में कभी नहीं; नहीं तो प्रदोष में)। जहाँ परंपराएँ सच में अलग हैं, वहाँ हम दोनों तारीख़ें दिखाते हैं: जन्माष्टमी (सूर्योदय की अष्टमी, हमारी मुख्य तारीख़, और निशीथ की अष्टमी) और रंगवाली होली (सूर्योदय पर चैत्र कृष्ण प्रतिपदा, हमारी मुख्य तारीख़, और होलिका दहन का अगला दिन)।

पूजा का समय कभी सिर्फ़ दिन का कोई हिस्सा नहीं होता। हर मुहूर्त ज़रूरी तिथि और दिन के तय हिस्से का साझा समय है, जिसमें से भद्रा, चित्रा नक्षत्र या वैधृति योग जैसी चीज़ें हटाई जाती हैं, और जहाँ ज़रूरी हो वहाँ लग्न भी देखा जाता है (लक्ष्मी पूजा के लिए वृषभ)। कभी यह समय नहीं बनता या दो टुकड़ों में बनता है, और पेज पर यह साफ़ लिखा जाता है।

पंचांग का समय हर शहर में अलग क्यों होता है?

हमारा राष्ट्रीय संदर्भ शहर दिल्ली है (28.6139 अंश उत्तर, 77.2090 अंश पूर्व)। लेकिन देशांतर के हर एक अंश पर सूर्योदय लगभग 4 मिनट खिसक जाता है। कोलकाता में सूर्योदय अहमदाबाद से करीब 50 मिनट पहले हो जाता है, जबकि दोनों शहरों की घड़ियाँ भारतीय मानक समय पर चलती हैं। अक्षांश भी असर डालता है, क्योंकि इससे साल भर दिन की लंबाई बदलती रहती है।

इसलिए राहु काल, चौघड़िया और दूसरे मुहूर्त हमेशा अपने शहर के लिए ही देखें। तिथि और नक्षत्र की बात अलग है। वे पूरी दुनिया में एक ही पल पर समाप्त होते हैं, पर घड़ी में वह पल कितने बजे होगा, यह आपके समय क्षेत्र पर निर्भर करता है। यही कारण है कि अमेरिका या ब्रिटेन में कोई त्योहार भारत से अलग तारीख़ पर पड़ सकता है। विदेश के शहरों के समय में डेलाइट सेविंग अपने-आप जुड़ जाती है।

पंचांग कितना सटीक है, और क्या-क्या जाँचा गया है?

यहाँ दो अलग बातें हैं। गणना की बारीकी: हमारी खोज हर बदलाव (तिथि का ख़त्म होना, लग्न का बदलना) को मॉडल के हिसाब से एक सेकंड के भीतर तक ढूँढती है। सटीकता: मॉडल असली आकाश और दूसरे पंचांगों से कितना मेल खाता है। एक सेकंड की बारीकी का मतलब एक सेकंड की सटीकता नहीं है।

मापी गई सटीकता: drikpanchang.com से पाँच तारीख़ों (दिल्ली, न्यूयॉर्क, संक्रांति के दिन सिडनी, डेलाइट सेविंग बदलने के दिन न्यूयॉर्क, और 2027 के आख़िर में दिल्ली) की तुलना में हर सूर्योदय, सूर्यास्त, तिथि, नक्षत्र, राहु काल और अभिजीत का समय 2 मिनट के भीतर रहा; सबसे बड़ा अंतर 1.6 मिनट का था, एक तिथि के ख़त्म होने के समय में। जिन त्योहारों के मुहूर्त हमने मिलाए (अक्षय तृतीया, गणेश चतुर्थी, लक्ष्मी पूजा, रक्षा बंधन, महाशिवरात्रि, जन्माष्टमी, होलिका दहन, गोवर्धन, भाई दूज), वे लगभग एक मिनट के भीतर मेल खाते हैं। मकर संक्रांति का क्षण drikpanchang से 4 से 6 मिनट पहले आता है, शायद अयनांश की परिभाषा में छोटे अंतर के कारण; यह अभी अनसुलझा है।

जो अभी किसी बाहरी पंचांग से नहीं मिलाया गया: एकादशी के पारण का समय, धनतेरस और घटस्थापना के मुहूर्त, वैष्णव एकादशी का अनुमान, और चारों मुहूर्त सूचियाँ (जिन्हें सिर्फ़ हमारी अपनी अलग, मिनट-दर-मिनट जाँच वाली स्क्रिप्ट जाँचती है)।

राउंडिंग: सूर्योदय-सूर्यास्त से बने समय पास वाले मिनट तक राउंड किए जाते हैं; तिथि, नक्षत्र, योग या करण के ख़त्म होने का समय सेकंड हटाकर दिखाया जाता है। अंदर की हर गणना पूरी बारीकी से होती है। पेज हर 30 मिनट में अपने आप ताज़ा होते हैं।

  • इंजन संस्करण 1.1 (3 नवंबर 2026); astronomy-engine 2.1.19।
  • निर्देशांक: हर शहर का अक्षांश-देशांतर हमारी शहर-सूची से (दिल्ली 28.6139° उ., 77.2090° पू.); ऊँचाई हर जगह 0 मीटर (समुद्र तल) मानी गई है।
  • समय क्षेत्र: IANA नाम (Asia/Kolkata, America/New_York आदि), इसलिए डेलाइट सेविंग अपने आप लगती है।
  • सूर्योदय/सूर्यास्त: सूर्य का ऊपरी किनारा, सामान्य अपवर्तन सहित। चंद्रोदय/चंद्रास्त: चंद्रमा का केंद्र 0° ऊँचाई पर, बिना अपवर्तन।

स्रोत और संदर्भ

drikpanchang.com को हम तुलना के संदर्भ के रूप में देखते हैं, अंतिम प्रमाण के रूप में नहीं। जहाँ हमारी तारीख़ उससे अलग है, वहाँ पेज पर कारण लिखा है।

संस्करण

इंजन संस्करण: 1.1 (2026-11-03)

  • 1.1 (2026-11-03): festival-qualified ritual windows (day part ∩ tithi ∩ exclusions); Smarta ekadashi rules (kshaya, vriddhi, dwadashi for parana); Holika Dahan with Bhadra rules; Janmashtami and Holi shown under two conventions; choghadiya recommendations exclude rahu kaal; muhurat minimum duration applied to continuous runs.
  • 1.0 (2026-11-02): first release.

संबंधित टूल्स