त्योहार 2027: तारीख़, वार और तिथि
सीधा जवाब
2027 में होली 23 मार्च 2027 को, रक्षा बंधन 17 अगस्त 2027 को और दिवाली 29 अक्टूबर 2027 को है। अगला त्योहार मकर संक्रांति (15 जनवरी 2027) है।
यह पेज साल भर के इक्कीस बड़े हिंदू त्योहारों की एक जगह पर पूरी सूची है, जिसमें मकर संक्रांति, होली, रक्षाबंधन, जन्माष्टमी, नवरात्रि, दशहरा, करवा चौथ, दिवाली, भाई दूज और छठ पूजा जैसे त्योहार शामिल हैं। लोग यह सूची इसलिए देखते हैं ताकि घर लौटने के टिकट, दफ़्तर से छुट्टी, खरीदारी और पूजा की तैयारी पहले से कर सकें। हर त्योहार की तारीख दिल्ली के सूर्योदय और पंचांग के हिसाब से निकाली गई है। ज़्यादातर त्योहार उस दिन मनाए जाते हैं जिस दिन सूर्योदय पर उनकी तिथि हो, लेकिन कुछ के अपने नियम हैं, जैसे दिवाली में प्रदोष काल और जन्माष्टमी में आधी रात देखी जाती है। विदेश में रहने वाले परिवारों के लिए तारीख एक दिन आगे या पीछे हो सकती है।
2027 के त्योहारों की सूची
| तारीख़ | त्योहार | तिथि का समय (दिल्ली) | कैलेंडर |
|---|---|---|---|
| 15 जनवरीशुक्रवार | मकर संक्रांति | संक्रांति: 14 जनवरी, रात 9:10 | कैलेंडर |
| 11 फ़रवरीगुरुवार | वसंत पंचमी | 11 फ़रवरी, रात 3:04 – 12 फ़रवरी, रात 3:18 | कैलेंडर |
| 6 मार्चशनिवार | महाशिवरात्रि | 6 मार्च, दोपहर 12:03 – 7 मार्च, दोपहर 1:46 | कैलेंडर |
| 23 मार्चमंगलवार | होलीहोलिका दहन के अगले दिन वाली परंपरा: 22 मार्च | 22 मार्च, शाम 4:13 – 23 मार्च, दोपहर 2:28 | कैलेंडर |
| 15 अप्रैलगुरुवार | राम नवमी | 14 अप्रैल, दोपहर 3:24 – 15 अप्रैल, दोपहर 1:21 | कैलेंडर |
| 20 अप्रैलमंगलवार | हनुमान जयंती | 20 अप्रैल, सुबह 4:51 – 21 अप्रैल, रात 3:57 | कैलेंडर |
| 9 मईरविवार | अक्षय तृतीया | 8 मई, सुबह 11:43 – 9 मई, सुबह 9:03 | कैलेंडर |
| 18 जुलाईरविवार | गुरु पूर्णिमा | 17 जुलाई, शाम 6:48 – 18 जुलाई, रात 9:14 | कैलेंडर |
| 17 अगस्तमंगलवार | रक्षा बंधन | 16 अगस्त, सुबह 10:29 – 17 अगस्त, दोपहर 12:58 | कैलेंडर |
| 25 अगस्तबुधवार | जन्माष्टमीनिशीथ-अष्टमी नियम से: 24 अगस्त | 24 अगस्त, रात 8:25 – 25 अगस्त, शाम 7:20 | कैलेंडर |
| 4 सितंबरशनिवार | गणेश चतुर्थी | 3 सितंबर, दोपहर 2:19 – 4 सितंबर, दोपहर 12:26 | कैलेंडर |
| 30 सितंबरगुरुवार | शारदीय नवरात्रिक्षय तिथि: जिस दिन शुरू हुई | 30 सितंबर, सुबह 8:05 – 1 अक्टूबर, सुबह 5:35 | कैलेंडर |
| 9 अक्टूबरशनिवार | दशहरा | 9 अक्टूबर, सुबह 9:02 – 10 अक्टूबर, सुबह 11:41 | कैलेंडर |
| 18 अक्टूबरसोमवार | करवा चौथ | 18 अक्टूबर, शाम 5:51 – 19 अक्टूबर, शाम 4:42 | कैलेंडर |
| 27 अक्टूबरबुधवार | धनतेरस | 27 अक्टूबर, रात 1:03 – 27 अक्टूबर, रात 10:50 | कैलेंडर |
| 29 अक्टूबरशुक्रवार | दिवाली | 28 अक्टूबर, रात 8:48 – 29 अक्टूबर, शाम 7:06 | कैलेंडर |
| 30 अक्टूबरशनिवार | गोवर्धन पूजा | 29 अक्टूबर, शाम 7:06 – 30 अक्टूबर, शाम 5:52 | कैलेंडर |
| 31 अक्टूबररविवार | भाई दूज | 30 अक्टूबर, शाम 5:52 – 31 अक्टूबर, शाम 5:13 | कैलेंडर |
| 4 नवंबरगुरुवार | छठ पूजा | 3 नवंबर, शाम 7:32 – 4 नवंबर, रात 9:38 | कैलेंडर |
| 10 नवंबरबुधवार | देवउठनी एकादशी | 9 नवंबर, सुबह 7:34 – 10 नवंबर, सुबह 9:11 | कैलेंडर |
| 14 नवंबररविवार | कार्तिक पूर्णिमा | 13 नवंबर, सुबह 9:55 – 14 नवंबर, सुबह 8:55 | कैलेंडर |
और सूचियाँ
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
दिवाली की तारीख कैसे तय होती है?
दिवाली कार्तिक महीने की अमावस्या को मनाई जाती है, लेकिन इसकी मुख्य पूजा यानी लक्ष्मी पूजा शाम को प्रदोष काल में होती है। इसलिए दिवाली उस दिन मानी जाती है जिस दिन सूर्यास्त के बाद के प्रदोष काल में अमावस्या तिथि मौजूद हो, न कि केवल सूर्योदय वाले दिन। जब अमावस्या दो दिनों में बंटी होती है, तब इसी नियम से फ़ैसला होता है कि दिवाली किस दिन मनाई जाए।
जन्माष्टमी दो दिन क्यों मनाई जाती है?
भगवान कृष्ण का जन्म आधी रात को माना जाता है, इसलिए जन्माष्टमी उस रात मनाई जाती है जब आधी रात के समय अष्टमी तिथि हो। कई बार यह स्थिति दो रातों में बंट जाती है। स्मार्त परंपरा के लोग पहले दिन व्रत रखते हैं, जबकि वैष्णव और इस्कॉन मंदिर अक्सर उदया तिथि और रोहिणी नक्षत्र देखकर अगले दिन मनाते हैं। इसी वजह से दो तारीखें सुनाई देती हैं।
मकर संक्रांति की तारीख लगभग हर साल एक जैसी क्यों रहती है?
ज़्यादातर हिंदू त्योहार चांद की तिथि पर चलते हैं, इसलिए उनकी अंग्रेज़ी तारीख हर साल बदलती रहती है। मकर संक्रांति अलग है, क्योंकि यह उस दिन मनाई जाती है जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है। सूर्य की चाल अंग्रेज़ी कैलेंडर से मेल खाती है, इसलिए इसकी तारीख लगभग एक जैसी रहती है। फिर भी कभी-कभी यह एक दिन आगे खिसक जाती है।
होलिका दहन और रंगों वाली होली अलग-अलग दिन क्यों होती है?
होलिका दहन फाल्गुन पूर्णिमा की शाम को किया जाता है, और इसके लिए वह समय चुना जाता है जब भद्रा न हो। रंगों वाली होली, जिसे धुलेंडी भी कहते हैं, अगले दिन यानी चैत्र कृष्ण प्रतिपदा को खेली जाती है। इसलिए होली हमेशा दो दिन का त्योहार है। कुछ इलाकों में, जैसे ब्रज में, होली कई दिनों तक अलग-अलग रूपों में मनाई जाती है।
विदेश में त्योहार की तारीख अलग क्यों हो सकती है?
हिंदू त्योहार तिथि पर चलते हैं, और तिथि का बदलना पूरी दुनिया में एक ही पल में होता है। लेकिन सूर्योदय, सूर्यास्त और आधी रात हर देश में अलग समय पर आते हैं। इसलिए अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन या ऑस्ट्रेलिया में किसी त्योहार का दिन भारत से एक दिन अलग हो सकता है। विदेश में रहने वाले परिवार अपने शहर के पंचांग या स्थानीय मंदिर की तारीख देखें।
क्या त्योहार की तारीख और सरकारी छुट्टी हमेशा एक ही दिन होती है?
ज़रूरी नहीं। सरकारी छुट्टियों की सूची पिछले साल के आखिर में ही जारी हो जाती है, और कभी-कभी उसमें दी गई तारीख पंचांग की तारीख से एक दिन अलग होती है, खासकर जब तिथि दो दिनों में बंटी हो। ऐसे में पूजा पंचांग के अनुसार की जाती है और छुट्टी सरकारी सूची के अनुसार मिलती है। सरकारी छुट्टियों के लिए हमारी छुट्टियों वाली सूची देखें।