एकादशी 2026: पूरी सूची, तारीख़ और समय
सीधा जवाब
2026 में कुल 24 एकादशी हैं (दिल्ली समय)। अगली एकादशी रमा एकादशी है, जो गुरुवार, 5 नवंबर 2026 को है (2 दिन बाद)।
मुख्य बातें
- 2026 में 24 एकादशी, 12 महीनों में फैली हुई।
- शुभकाल स्मार्त परंपरा के नियम से एकादशी की तारीख़ तय करता है: (1) जिस दिन सूर्योदय के समय एकादशी हो, वही दिन; (2) अगर एकादशी किसी भी सूर्योदय को न छुए (क्षय एकादशी), तो जिस दिन वह शुरू होती है; (3) अगर एकादशी दो सूर्योदयों तक चले (वृद्धि), तो दूसरा दिन; (4) अगर अगले दिन सूर्योदय पर द्वादशी न बचे, तो एक दिन पहले, ताकि पारण द्वादशी में हो सके। हर पंक्ति में लिखा है कि उस तारीख़ पर कौन-सा नियम लगा। वैष्णव और इस्कॉन कैलेंडर कई बार अगले दिन व्रत रखते हैं; हमारी वैष्णव तारीख़ केवल अरुणोदय नियम से निकली अनुमानित तारीख़ है।
- हर पंक्ति में तिथि के शुरू और ख़त्म होने का समय दिल्ली के हिसाब से है; विदेश में तारीख़ बदल सकती है।
- हर तारीख़ को एक टैप में Google कैलेंडर में जोड़ सकते हैं।
एकादशी हर चंद्र महीने में दो बार आती है, एक बार शुक्ल पक्ष में और एक बार कृष्ण पक्ष में। भगवान विष्णु को समर्पित यह व्रत हिंदू घरों में सबसे ज़्यादा रखे जाने वाले व्रतों में से एक है। हर एकादशी का अपना नाम और अपनी कथा है, जैसे मोक्षदा, निर्जला, देवशयनी या देवउठनी। लोग यह सूची इसलिए देखते हैं ताकि पहले से जान सकें कि व्रत किस दिन रखना है, रसोई में अनाज न बनाने की तैयारी कब करनी है और अगली सुबह व्रत कब खोलना है। नीचे की तालिका में हर एकादशी का नाम, व्रत का दिन और दिल्ली के हिसाब से तिथि का समय दिया गया है। अगर आप किसी दूसरे शहर या देश में रहते हैं तो समय थोड़ा बदल सकता है, इसलिए अपने शहर का पंचांग भी एक बार ज़रूर देख लें।
गिनती के बारे में: यह सूची जनवरी से दिसंबर (ग्रेगोरियन साल) की है। चंद्र वर्ष में अधिक मास होने पर 26 एकादशी होती हैं, पर ग्रेगोरियन साल में उनकी गिनती 24 या 25 रहती है, इसलिए हम ज़बरदस्ती 26 नहीं दिखाते। पारण का समय नियम से निकाला गया है, पर किसी बाहरी पंचांग से अभी मिलाया नहीं गया है।
एकादशी 2026 की तारीख़ें
| तारीख़ | व्रत / तिथि | तिथि शुरू | तिथि ख़त्म | पारण (अगले दिन) | कैलेंडर |
|---|---|---|---|---|---|
| 14 जनवरीबुधवार | षटतिला एकादशीकृष्ण पक्ष एकादशी | 13 जनवरी, दोपहर 3:18 | 14 जनवरी, शाम 5:53 | 15 जनवरी, सुबह 7:15 – 15 जनवरी, सुबह 9:21हरि वासर समाप्त: 15 जनवरी, रात 12:29 | कैलेंडर |
| 29 जनवरीगुरुवार | जया एकादशीशुक्ल पक्ष एकादशी | 28 जनवरी, शाम 4:36 | 29 जनवरी, दोपहर 1:55 | 30 जनवरी, सुबह 7:10 – 30 जनवरी, सुबह 9:20हरि वासर समाप्त: शाम 7:14 | कैलेंडर |
| 13 फ़रवरीशुक्रवार | विजया एकादशीकृष्ण पक्ष एकादशी | 12 फ़रवरी, दोपहर 12:22 | 13 फ़रवरी, दोपहर 2:26 | 14 फ़रवरी, सुबह 7:00 – 14 फ़रवरी, सुबह 9:14हरि वासर समाप्त: रात 8:50 | कैलेंडर |
| 27 फ़रवरीशुक्रवार | आमलकी एकादशीशुक्ल पक्ष एकादशी | 27 फ़रवरी, रात 12:33 | 27 फ़रवरी, रात 10:33 | 28 फ़रवरी, सुबह 6:48 – 28 फ़रवरी, सुबह 9:06हरि वासर समाप्त: 28 फ़रवरी, सुबह 4:06 | कैलेंडर |
| 15 मार्चरविवार | पापमोचनी एकादशीकृष्ण पक्ष एकादशी | 14 मार्च, सुबह 8:11 | 15 मार्च, सुबह 9:16 | 16 मार्च, सुबह 6:30 – 16 मार्च, सुबह 8:54हरि वासर समाप्त: दोपहर 3:23 | कैलेंडर |
| 29 मार्चरविवार | कामदा एकादशीशुक्ल पक्ष एकादशी | 28 मार्च, सुबह 8:46 | 29 मार्च, सुबह 7:46 | 30 मार्च, सुबह 6:14 – 30 मार्च, सुबह 7:10हरि वासर समाप्त: दोपहर 1:38 | कैलेंडर |
| 13 अप्रैलसोमवार | वरूथिनी एकादशीकृष्ण पक्ष एकादशी | 13 अप्रैल, रात 1:17 | 14 अप्रैल, रात 1:09 | 14 अप्रैल, सुबह 6:55 – 14 अप्रैल, सुबह 8:30हरि वासर समाप्त: 14 अप्रैल, सुबह 6:55 | कैलेंडर |
| 27 अप्रैलसोमवार | मोहिनी एकादशीशुक्ल पक्ष एकादशी | 26 अप्रैल, शाम 6:07 | 27 अप्रैल, शाम 6:16 | 28 अप्रैल, सुबह 5:43 – 28 अप्रैल, सुबह 8:21हरि वासर समाप्त: 28 अप्रैल, रात 12:25 | कैलेंडर |
| 13 मईबुधवार | अपरा एकादशीकृष्ण पक्ष एकादशी | 12 मई, दोपहर 2:52 | 13 मई, दोपहर 1:30 | 14 मई, सुबह 5:31 – 14 मई, सुबह 8:13हरि वासर समाप्त: शाम 6:58 | कैलेंडर |
| 27 मईबुधवार | पद्मिनी एकादशीशुक्ल पक्ष एकादशीएकादशी दो सूर्योदयों तक चलती है (वृद्धि); स्मार्त नियम में दूसरा दिन लिया जाता है। | 26 मई, सुबह 5:11 | 27 मई, सुबह 6:22 | 28 मई, सुबह 5:25 – 28 मई, सुबह 7:57हरि वासर समाप्त: दोपहर 12:46 | कैलेंडर |
| 11 जूनगुरुवार | परमा एकादशीकृष्ण पक्ष एकादशी | 11 जून, रात 12:58 | 11 जून, रात 10:36 | 12 जून, सुबह 5:23 – 12 जून, सुबह 8:10हरि वासर समाप्त: 12 जून, रात 3:52 | कैलेंडर |
| 25 जूनगुरुवार | निर्जला एकादशीशुक्ल पक्ष एकादशी | 24 जून, शाम 6:12 | 25 जून, रात 8:09 | 26 जून, सुबह 5:25 – 26 जून, सुबह 8:12हरि वासर समाप्त: 26 जून, रात 2:43 | कैलेंडर |
| 10 जुलाईशुक्रवार | योगिनी एकादशीकृष्ण पक्ष एकादशीएकादशी किसी भी सूर्योदय को नहीं छूती (क्षय तिथि), इसलिए जिस दिन शुरू होती है, उसी दिन रखी गई है। इस दिन सूर्योदय पर पिछली तिथि थी।वैष्णव (अनुमान): 11 जुलाई | 10 जुलाई, सुबह 8:16 | 11 जुलाई, सुबह 5:23 | 11 जुलाई, दोपहर 1:50 – 11 जुलाई, शाम 7:21हरि वासर समाप्त: 11 जुलाई, सुबह 10:33 | कैलेंडर |
| 25 जुलाईशनिवार | देवशयनी एकादशीशुक्ल पक्ष एकादशी | 24 जुलाई, सुबह 9:13 | 25 जुलाई, सुबह 11:34 | 26 जुलाई, सुबह 5:39 – 26 जुलाई, सुबह 8:22हरि वासर समाप्त: शाम 6:11 | कैलेंडर |
| 9 अगस्तरविवार | कामिका एकादशीकृष्ण पक्ष एकादशी | 8 अगस्त, दोपहर 1:59 | 9 अगस्त, सुबह 11:05 | 10 अगस्त, सुबह 5:48 – 10 अगस्त, सुबह 8:01हरि वासर समाप्त: शाम 4:19 | कैलेंडर |
| 23 अगस्तरविवार | श्रावण पुत्रदा एकादशीशुक्ल पक्ष एकादशी | 23 अगस्त, रात 2:00 | 24 अगस्त, सुबह 4:19 | 24 अगस्त, दोपहर 1:41 – 24 अगस्त, शाम 6:51हरि वासर समाप्त: 24 अगस्त, सुबह 10:50 | कैलेंडर |
| 7 सितंबरसोमवार | अजा एकादशीकृष्ण पक्ष एकादशी | 6 सितंबर, शाम 7:29 | 7 सितंबर, शाम 5:04 | 8 सितंबर, सुबह 6:03 – 8 सितंबर, सुबह 8:33हरि वासर समाप्त: रात 10:29 | कैलेंडर |
| 22 सितंबरमंगलवार | परिवर्तिनी एकादशीशुक्ल पक्ष एकादशी | 21 सितंबर, रात 8:01 | 22 सितंबर, रात 9:43 | 23 सितंबर, सुबह 6:10 – 23 सितंबर, सुबह 8:35हरि वासर समाप्त: 23 सितंबर, सुबह 4:00 | कैलेंडर |
| 6 अक्टूबरमंगलवार | इंदिरा एकादशीकृष्ण पक्ष एकादशी | 6 अक्टूबर, रात 2:07 | 7 अक्टूबर, रात 12:34 | 7 अक्टूबर, सुबह 6:17 – 7 अक्टूबर, सुबह 8:37हरि वासर समाप्त: 7 अक्टूबर, सुबह 6:15 | कैलेंडर |
| 22 अक्टूबरगुरुवार | पापांकुशा एकादशीशुक्ल पक्ष एकादशी | 21 अक्टूबर, दोपहर 2:12 | 22 अक्टूबर, दोपहर 2:48 | 23 अक्टूबर, सुबह 6:27 – 23 अक्टूबर, सुबह 8:42हरि वासर समाप्त: रात 8:45 | कैलेंडर |
| 5 नवंबरगुरुवार | रमा एकादशीकृष्ण पक्ष एकादशी | 4 नवंबर, सुबह 11:03 | 5 नवंबर, सुबह 10:35 | 6 नवंबर, सुबह 6:37 – 6 नवंबर, सुबह 8:47हरि वासर समाप्त: शाम 4:35 | कैलेंडर |
| 20 नवंबरशुक्रवार | देवउठनी एकादशीशुक्ल पक्ष एकादशीएकादशी किसी भी सूर्योदय को नहीं छूती (क्षय तिथि), इसलिए जिस दिन शुरू होती है, उसी दिन रखी गई है। इस दिन सूर्योदय पर पिछली तिथि थी।वैष्णव (अनुमान): 21 नवंबर | 20 नवंबर, सुबह 7:16 | 21 नवंबर, सुबह 6:31 | 21 नवंबर, दोपहर 1:11 – 21 नवंबर, शाम 5:25हरि वासर समाप्त: 21 नवंबर, दोपहर 12:08 | कैलेंडर |
| 4 दिसंबरशुक्रवार | उत्पन्ना एकादशीकृष्ण पक्ष एकादशी | 3 दिसंबर, रात 11:03 | 4 दिसंबर, रात 11:45 | 5 दिसंबर, सुबह 6:59 – 5 दिसंबर, सुबह 9:04हरि वासर समाप्त: 5 दिसंबर, सुबह 6:02 | कैलेंडर |
| 20 दिसंबररविवार | मोक्षदा एकादशीशुक्ल पक्ष एकादशी | 19 दिसंबर, रात 10:09 | 20 दिसंबर, रात 8:14 | 21 दिसंबर, सुबह 7:09 – 21 दिसंबर, सुबह 9:13हरि वासर समाप्त: 21 दिसंबर, रात 1:35 | कैलेंडर |
संबंधित त्योहार और सूचियाँ
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
एकादशी व्रत का पारण कब करें?
पारण अगले दिन यानी द्वादशी को सूर्योदय के बाद किया जाता है। ध्यान रखें कि द्वादशी तिथि खत्म होने से पहले ही व्रत खोल लें, क्योंकि द्वादशी बीत जाने के बाद पारण करना ठीक नहीं माना जाता। बहुत से लोग द्वादशी के शुरुआती हिस्से, जिसे हरि वासर कहते हैं, के बीतने का इंतज़ार भी करते हैं। पारण आमतौर पर तुलसी दल, पानी या फल से शुरू करके फिर सादा भोजन लेकर किया जाता है।
एकादशी व्रत में क्या खा सकते हैं?
एकादशी पर चावल और हर तरह का अनाज नहीं खाया जाता। जो लोग फलाहार रखते हैं वे फल, दूध, दही, मेवे, साबूदाना, कुट्टू या सिंघाड़े का आटा, आलू और शकरकंद ले सकते हैं। साधारण नमक की जगह सेंधा नमक इस्तेमाल होता है। कुछ परिवार प्याज़, लहसुन और दालें भी छोड़ देते हैं। बुज़ुर्ग, गर्भवती महिलाएं या जिनकी तबीयत ठीक न हो, वे अक्सर हल्का फलाहार व्रत रखते हैं।
एकादशी पर चावल क्यों नहीं खाते?
परंपरा में एकादशी के दिन चावल खाना वर्जित माना गया है और यह नियम लगभग हर क्षेत्र में माना जाता है। पुराणों की कथाओं में इसे अनाज से दूरी और मन को सात्विक रखने से जोड़ा गया है। इसी वजह से कई घरों में एकादशी के दिन चावल पकाए ही नहीं जाते, भले ही घर के सभी लोग व्रत न रख रहे हों। अगले दिन पारण के बाद चावल फिर से खाए जा सकते हैं।
स्मार्त और वैष्णव एकादशी में क्या अंतर है?
जब एकादशी तिथि दो दिनों में बंटी हो, तभी यह अंतर दिखता है। स्मार्त परंपरा में व्रत उस दिन होता है जिस दिन सूर्योदय पर एकादशी हो। वैष्णव और इस्कॉन परंपरा में यह भी देखा जाता है कि सूर्योदय से पहले के समय पर दशमी का असर न हो; अगर हो, तो व्रत अगले दिन रखा जाता है। हमारी सूची स्मार्त नियम पर बनी है, इसलिए वैष्णव परिवार अपने संप्रदाय का कैलेंडर भी देख लें।
साल में कितनी एकादशी होती हैं?
आम तौर पर एक साल में चौबीस एकादशी आती हैं, यानी हर महीने दो। जिस साल अधिक मास पड़ता है, जिसे पुरुषोत्तम मास भी कहते हैं, उस साल दो एकादशी और जुड़ जाती हैं और कुल गिनती छब्बीस हो जाती है। अधिक मास की एकादशियों के नाम पद्मिनी और परमा हैं। सबसे कठिन व्रत निर्जला एकादशी का माना जाता है, जिसमें दिन भर पानी भी नहीं पिया जाता।
विदेश में एकादशी व्रत किस दिन रखें?
एकादशी का दिन सूर्योदय पर निर्भर करता है, और सूर्योदय हर जगह अलग समय पर होता है। इसलिए अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा या ऑस्ट्रेलिया में व्रत का दिन भारत से एक दिन आगे या पीछे हो सकता है। हमारी तालिका दिल्ली के समय पर बनी है। विदेश में रहने वाले परिवार अपने शहर के सूर्योदय के हिसाब से बना पंचांग देखें या अपने पास के मंदिर से पूछ लें।