भाई दूज 2026 और 2027: तारीख़, मुहूर्त और महत्व
सीधा जवाब
भाई दूज 2026 में बुधवार, 11 नवंबर 2026 को है (दिल्ली)। भाई दूज कार्तिक शुक्ल द्वितीया को मनाया जाने वाला भाई-बहन का त्योहार है, जब बहन भाई को तिलक लगाकर उसकी लंबी उम्र की कामना करती है और भाई उपहार देता है।
मुख्य बातें
- 2026: 11 नवंबर 2026, बुधवार
- 2027: 31 अक्टूबर 2027, रविवार
- हर साल के हिस्से में लिखा है कि वह तारीख़ किस नियम से निकली और मुहूर्त तिथि के भीतर कैसे काटा गया।
- सभी समय दिल्ली के हैं; विदेश में तिथि स्थानीय समय से बदलती है, इसलिए तारीख़ एक दिन अलग हो सकती है।
भाई दूज क्या है
भाई दूज दीपोत्सव का आखिरी दिन है और इसे यम द्वितीया भी कहते हैं। कथा है कि यमुना जी अपने भाई यमराज को बार-बार घर बुलाती थीं, पर वे अपने काम में उलझे रहते थे। आखिर कार्तिक शुक्ल द्वितीया को यमराज बहन के घर पहुँचे। यमुना ने तिलक लगाया, आरती उतारी और बड़े प्रेम से भोजन कराया।
खुश होकर यमराज ने वर दिया कि जो भाई इस दिन बहन के घर जाकर उसके हाथ का भोजन करेगा और तिलक लगवाएगा, उसे अकाल मृत्यु का डर नहीं रहेगा। एक दूसरी कथा में नरकासुर को मारकर लौटे कृष्ण का उनकी बहन सुभद्रा ने तिलक और मिठाई से स्वागत किया था। रक्षाबंधन की तरह यह त्योहार भी भाई-बहन के रिश्ते की मिठास का उत्सव है।
भाई दूज कैसे मनाते हैं
इस दिन भाई बहन के घर जाता है। बहन थाली में रोली, अक्षत, दीया, मिठाई और नारियल सजाती है। भाई को आसन पर बिठाकर माथे पर तिलक लगाया जाता है, आरती उतारी जाती है और मिठाई खिलाई जाती है। फिर बहन के हाथ का बना भोजन होता है और भाई उपहार या पैसे देता है। कई बहनें तिलक होने तक व्रत भी रखती हैं।
महाराष्ट्र, गोवा और कर्नाटक में यह भाऊबीज कहलाता है, जहाँ बहन भाई की आरती उतारकर खास पकवान बनाती है। बंगाल में भाई फोंटा पर बहन चंदन का टीका लगाकर भाई की रक्षा की कामना करती है। नेपाल में इसे भाई टीका कहते हैं। मथुरा के विश्राम घाट पर भाई-बहन साथ में यमुना स्नान करते हैं। अलग-अलग देशों में रहने वाले भाई-बहन अक्सर वीडियो कॉल पर तिलक की रस्म निभाते हैं।
भाई दूज 2026: तारीख़ और मुहूर्त (दिल्ली)
बुधवार, 11 नवंबर 2026
इस दिन अपराह्न (दिन का चौथा पाँचवाँ भाग) का अधिक हिस्सा शुक्ल पक्ष की द्वितीया में पड़ता है।
- तिथि
- 10 नवंबर, दोपहर 2:00 – 11 नवंबर, दोपहर 3:53
- भाई दूज तिलक: अपराह्न (द्वितीया तिथि के भीतर)
- दोपहर 1:10 – दोपहर 3:19
- सूर्योदय / सूर्यास्त
- सुबह 6:40 / शाम 5:30
- राहु काल (इस दिन)
- दोपहर 12:05 – दोपहर 1:26
पूरा काल (तिथि से काटने से पहले): दोपहर 1:10 – दोपहर 3:20
भाई दूज में दोपहर बाद का समय, जिसे अपराह्न काल कहते हैं, सबसे अहम माना जाता है। जिस दिन द्वितीया तिथि अपराह्न में ज्यादा देर तक रहती है, उसी दिन यह त्योहार मनाया जाता है। माना जाता है कि यमराज दोपहर के बाद ही यमुना के घर पहुँचे थे, इसलिए तिलक और भोजन इसी समय करने की परंपरा बनी। अगर किसी कारण अपराह्न में तिलक संभव न हो, तो परिवार द्वितीया तिथि रहते किसी भी शुभ समय में यह रस्म कर लेते हैं।
भाई दूज 2027: तारीख़ और मुहूर्त (दिल्ली)
रविवार, 31 अक्टूबर 2027
इस दिन अपराह्न (दिन का चौथा पाँचवाँ भाग) का अधिक हिस्सा शुक्ल पक्ष की द्वितीया में पड़ता है।
- तिथि
- 30 अक्टूबर, शाम 5:52 – 31 अक्टूबर, शाम 5:13
- भाई दूज तिलक: अपराह्न (द्वितीया तिथि के भीतर)
- दोपहर 1:11 – दोपहर 3:24
- सूर्योदय / सूर्यास्त
- सुबह 6:32 / शाम 5:37
- राहु काल (इस दिन)
- शाम 4:14 – शाम 5:37
पूरा काल (तिथि से काटने से पहले): दोपहर 1:11 – दोपहर 3:24
भाई दूज की शुभकामनाएँ
तिलक की लाली, मिठाई की मिठास और बहन का प्यार, भाई दूज लाए आपके रिश्ते में खुशियों की बहार। भाई दूज की ढेरों शुभकामनाएँ!यह संदेश WhatsApp पर भेजें
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
भाई दूज पर तिलक किस समय करना चाहिए?
भाई दूज पर तिलक के लिए दोपहर बाद का अपराह्न काल सबसे शुभ माना जाता है, बशर्ते उस समय द्वितीया तिथि हो। पंचांग इसी आधार पर त्योहार का दिन तय करता है। अपराह्न का समय सूर्योदय और सूर्यास्त से निकाला जाता है, इसलिए यह हर शहर में अलग होता है। अपने शहर का मुहूर्त देखकर ही तिलक करें।
भाई दूज की कथा क्या है?
कथा है कि सूर्य देव की संतान यमुना और यमराज भाई-बहन थे। यमुना बार-बार भाई को बुलाती थीं, पर यमराज नहीं आ पाते थे। कार्तिक शुक्ल द्वितीया को वे बहन के घर पहुँचे। यमुना ने तिलक लगाकर प्रेम से भोजन कराया। खुश होकर यमराज ने वर दिया कि इस दिन बहन से तिलक लगवाने वाले भाई की उम्र लंबी होगी।
भाई दूज की थाली में क्या रखें?
भाई दूज की थाली में रोली या कुमकुम, अक्षत, घी का दीया, मिठाई, सूखा नारियल, पान-सुपारी, कलावा और थोड़े फूल रखे जाते हैं। कई घरों में बताशे और सूखे मेवे भी होते हैं। उत्तर प्रदेश और बिहार के कुछ हिस्सों में गोबर से यम-यमुना की आकृति बनाकर उनकी पूजा भी होती है। सामग्री परिवार की परंपरा के हिसाब से बदलती है।
भाऊबीज और भाई फोंटा क्या हैं?
ये भाई दूज के ही क्षेत्रीय नाम हैं। महाराष्ट्र, गोवा और कर्नाटक में इसे भाऊबीज कहते हैं, जहाँ बहन भाई की आरती उतारती है और खास पकवान बनाती है। बंगाल में भाई फोंटा पर बहन भाई के माथे पर चंदन का टीका लगाकर उसकी रक्षा की कामना करती है। नेपाल में इसे भाई टीका कहते हैं, जहाँ सात रंगों का टीका लगता है।
अगर बहन न हो या दूर हो तो भाई दूज कैसे मनाएँ?
जिनकी सगी बहन नहीं है, वे चचेरी, ममेरी या मुँहबोली बहन से तिलक लगवा सकते हैं। कई लोग यमुना नदी या किसी मंदिर में जाकर पूजा करते हैं। दूर रहने वाले भाई-बहन फोन पर बात करके और पहले से उपहार भेजकर रस्म निभाते हैं। मूल भाव प्रेम और एक-दूसरे की कुशलता की कामना है, जो दूरी से कम नहीं होता।
भाई दूज और रक्षाबंधन में क्या अंतर है?
दोनों भाई-बहन के त्योहार हैं, पर रस्में अलग हैं। रक्षाबंधन सावन की पूर्णिमा को आता है, जब बहन भाई की कलाई पर राखी बाँधती है। भाई दूज दीपोत्सव के आखिरी दिन आता है, जब बहन तिलक लगाती है और भाई बहन के घर भोजन करने जाता है। भाई दूज की कथा यमराज और यमुना से जुड़ी है।