छठ पूजा 2026 और 2027: तारीख़, मुहूर्त और महत्व
सीधा जवाब
छठ पूजा 2026 में रविवार, 15 नवंबर 2026 को है (दिल्ली)। छठ पूजा सूर्य देव और छठी मैया का चार दिन का कठोर व्रत है, जिसमें व्रती निर्जला उपवास रखकर डूबते और उगते सूर्य को नदी या तालाब के घाट पर अर्घ्य देते हैं।
मुख्य बातें
- 2026: 15 नवंबर 2026, रविवार
- 2027: 4 नवंबर 2027, गुरुवार
- हर साल के हिस्से में लिखा है कि वह तारीख़ किस नियम से निकली और मुहूर्त तिथि के भीतर कैसे काटा गया।
- सभी समय दिल्ली के हैं; विदेश में तिथि स्थानीय समय से बदलती है, इसलिए तारीख़ एक दिन अलग हो सकती है।
छठ पूजा क्या है
छठ पूजा मुख्य रूप से बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल के तराई इलाके का महापर्व है, जो अब दिल्ली, मुंबई और विदेशों तक फैल गया है। इसका मुख्य दिन कार्तिक शुक्ल षष्ठी है। इसमें सूर्य देव और छठी मैया की पूजा होती है, जिन्हें संतान की रक्षा करने वाली देवी माना जाता है।
छठ उन गिने-चुने बड़े त्योहारों में है जिनमें डूबते सूर्य को भी अर्घ्य दिया जाता है। इसमें न कोई मूर्ति होती है, न पुरोहित जरूरी है। व्रती खुद नदी के पानी में खड़े होकर जीवन देने वाले सूर्य का धन्यवाद करते हैं। रामायण में सीता और महाभारत में कुंती और द्रौपदी के सूर्य उपासना करने की कथाएँ भी इससे जोड़ी जाती हैं।
छठ पूजा कैसे मनाते हैं
पहला दिन नहाय-खाय है, जब व्रती स्नान करके कद्दू-भात और चने की दाल का सादा भोजन करते हैं। दूसरे दिन खरना होता है, जब दिन भर उपवास के बाद शाम को गुड़ की खीर और रोटी का प्रसाद लिया जाता है और उसके बाद लगभग डेढ़ दिन का निर्जला व्रत शुरू होता है। तीसरे दिन शाम को घाट पर डूबते सूर्य को और चौथे दिन भोर में उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है।
बाँस के सूप और दउरा में ठेकुआ, केला, गन्ना, नारियल, नींबू और मौसमी फल सजाए जाते हैं। घाटों की सफाई पूरा मोहल्ला मिलकर करता है और हर तरफ छठ के लोकगीत गूँजते हैं। जहाँ नदी नहीं है, वहाँ लोग छत पर या आँगन में पानी का कुंड बनाकर अर्घ्य देते हैं। अमेरिका, इंग्लैंड और मॉरीशस में भी झीलों और समुद्र तटों पर छठ घाट सजते हैं। बुजुर्ग, गर्भवती या बीमार लोग अक्सर हल्का व्रत रखते हैं।
छठ पूजा 2026: तारीख़ और मुहूर्त (दिल्ली)
रविवार, 15 नवंबर 2026
शुक्ल पक्ष की षष्ठी इस दिन सूर्योदय के समय मौजूद है (उदया तिथि)।
- तिथि
- 14 नवंबर, रात 11:24 – 16 नवंबर, रात 2:01
- पहला दिन: नहाय-खाय
- शुक्रवार, 13 नवंबर 2026
- दूसरा दिन: खरना (सूर्यास्त)
- 14 नवंबर, शाम 5:28
- तीसरा दिन: संध्या अर्घ्य (सूर्यास्त)
- शाम 5:28
- चौथा दिन: उषा अर्घ्य (सूर्योदय)
- 16 नवंबर, सुबह 6:44
- सूर्योदय / सूर्यास्त
- सुबह 6:44 / शाम 5:28
- राहु काल (इस दिन)
- शाम 4:07 – शाम 5:28
छठ में सबसे अहम पल सूर्यास्त और सूर्योदय के हैं। षष्ठी की शाम को डूबते सूर्य को संध्या अर्घ्य दिया जाता है और अगली सुबह सप्तमी को उगते सूर्य को उषा अर्घ्य देकर व्रत पूरा होता है। इसलिए छठ में किसी लंबे मुहूर्त की जगह उस जगह के सूर्यास्त और सूर्योदय का सही समय जानना जरूरी है जहाँ व्रती अर्घ्य देंगे।
छठ पूजा 2027: तारीख़ और मुहूर्त (दिल्ली)
गुरुवार, 4 नवंबर 2027
शुक्ल पक्ष की षष्ठी इस दिन सूर्योदय के समय मौजूद है (उदया तिथि)।
- तिथि
- 3 नवंबर, शाम 7:32 – 4 नवंबर, रात 9:38
- पहला दिन: नहाय-खाय
- मंगलवार, 2 नवंबर 2027
- दूसरा दिन: खरना (सूर्यास्त)
- 3 नवंबर, शाम 5:35
- तीसरा दिन: संध्या अर्घ्य (सूर्यास्त)
- शाम 5:34
- चौथा दिन: उषा अर्घ्य (सूर्योदय)
- 5 नवंबर, सुबह 6:36
- सूर्योदय / सूर्यास्त
- सुबह 6:35 / शाम 5:34
- राहु काल (इस दिन)
- दोपहर 1:27 – दोपहर 2:49
छठ पूजा की शुभकामनाएँ
छठी मैया आपके घर-आँगन को सुख और संतोष से भर दें, उगते सूरज की पहली किरण आपके जीवन में नई रोशनी लाए। छठ महापर्व की हार्दिक शुभकामनाएँ!यह संदेश WhatsApp पर भेजें
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
छठ पूजा में अर्घ्य किस समय दिया जाता है?
छठ में दो अर्घ्य दिए जाते हैं। षष्ठी की शाम सूर्यास्त के समय डूबते सूर्य को संध्या अर्घ्य और सप्तमी की सुबह सूर्योदय के समय उगते सूर्य को उषा अर्घ्य। व्रती सूर्यास्त से कुछ पहले घाट पहुँच जाते हैं। सूर्योदय और सूर्यास्त का समय हर शहर में अलग होता है, इसलिए अपने शहर का समय जरूर देखें।
छठ पूजा के चार दिन कौन-कौन से हैं?
पहला दिन नहाय-खाय है, जब स्नान के बाद कद्दू-भात खाया जाता है। दूसरा दिन खरना है, जब शाम को गुड़ की खीर का प्रसाद लेकर निर्जला व्रत शुरू होता है। तीसरे दिन षष्ठी की शाम को संध्या अर्घ्य दिया जाता है और चौथे दिन सुबह उषा अर्घ्य के बाद पारण करके व्रत खोला जाता है।
छठ का व्रत कैसे खोला जाता है?
चौथे दिन उगते सूर्य को अर्घ्य देने के बाद व्रती घाट पर ही छठी मैया से आशीर्वाद माँगते हैं और प्रसाद बाँटते हैं। फिर पानी, अदरक और गुड़ या ठेकुआ लेकर व्रत खोला जाता है, जिसे पारण कहते हैं। घर लौटकर सादा भोजन किया जाता है। परिवार के लोग व्रती के पैर छूकर आशीर्वाद लेते हैं।
छठ पूजा का ठेकुआ कैसे बनता है?
ठेकुआ छठ का सबसे खास प्रसाद है। गेहूँ के आटे में गुड़ का घोल, घी, नारियल का बुरादा और सौंफ मिलाकर सख्त आटा गूँथा जाता है। फिर लकड़ी के साँचे पर दबाकर उस पर सुंदर छाप उभारी जाती है और घी में धीमी आँच पर सुनहरा होने तक तला जाता है। प्रसाद बनाते समय पूरी शुद्धता का ध्यान रखा जाता है।
क्या पुरुष भी छठ का व्रत रख सकते हैं?
हाँ, बिल्कुल। छठ का व्रत ज्यादातर महिलाएँ रखती हैं, पर बहुत से पुरुष भी पूरे नियम से यह व्रत करते हैं। व्रत रखने वाले को व्रती कहा जाता है। जो व्रत नहीं रखते, वे भी घाट सजाने, भारी सूप और दउरा उठाने और प्रसाद बनाने में पूरे मन से हाथ बँटाते हैं, जिसे बड़ा पुण्य माना जाता है।
विदेश में छठ पूजा कैसे मनाई जाती है?
अमेरिका, इंग्लैंड, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, मॉरीशस और खाड़ी देशों में बसे बिहारी और पूर्वांचली परिवार झीलों, नदियों, समुद्र तटों या सामुदायिक तालाबों पर छठ मनाते हैं। कई जगह स्थानीय प्रशासन से अनुमति लेकर घाट बनाए जाते हैं। जहाँ खुले पानी में जाना संभव नहीं, वहाँ लोग घर के पिछवाड़े में छोटा कुंड बनाकर अर्घ्य देते हैं।