कार्तिक पूर्णिमा 2026 और 2027: तारीख़, मुहूर्त और महत्व
कार्तिक पूर्णिमा 2026
24 नवंबर 2026
मंगलवार
21 दिन बाकी
कार्तिक पूर्णिमा 2027
14 नवंबर 2027
रविवार
376 दिन बाकी
सीधा जवाब
कार्तिक पूर्णिमा 2026 में मंगलवार, 24 नवंबर 2026 को है (दिल्ली)। कार्तिक पूर्णिमा कार्तिक मास की पूर्णिमा है, जब गंगा स्नान, दीपदान और दान-पुण्य किया जाता है; इसी दिन वाराणसी में देव दीपावली और सिख समाज में गुरु नानक जयंती मनाई जाती है।
मुख्य बातें
- 2026: 24 नवंबर 2026, मंगलवार
- 2027: 14 नवंबर 2027, रविवार
- हर साल के हिस्से में लिखा है कि वह तारीख़ किस नियम से निकली और मुहूर्त तिथि के भीतर कैसे काटा गया।
- सभी समय दिल्ली के हैं; विदेश में तिथि स्थानीय समय से बदलती है, इसलिए तारीख़ एक दिन अलग हो सकती है।
कार्तिक पूर्णिमा क्या है
कार्तिक को सबसे पवित्र महीना माना जाता है और इसकी पूर्णिमा पूरे महीने के स्नान, व्रत और दीपदान का समापन है। कथा है कि इसी दिन भगवान शिव ने त्रिपुरासुर नाम के राक्षस के तीनों नगरों का नाश किया था, इसलिए इसे त्रिपुरारी पूर्णिमा भी कहते हैं। देवताओं ने इस जीत की खुशी में दीये जलाए थे, और यहीं से देव दीपावली की परंपरा मानी जाती है।
मान्यता है कि भगवान विष्णु ने इसी दिन मत्स्य अवतार लिया था। सिख समाज के लिए यह गुरु नानक देव जी का प्रकाश पर्व यानी गुरपुरब है। राजस्थान के पुष्कर में ब्रह्मा जी से जुड़े सरोवर के किनारे लगने वाला प्रसिद्ध पुष्कर मेला इसी पूर्णिमा पर अपने चरम पर होता है। ओडिशा में बोइत बंदाण के दिन लोग पुराने समुद्री व्यापार की याद में केले के तने की छोटी नावें पानी में बहाते हैं।
कार्तिक पूर्णिमा कैसे मनाते हैं
भोर में गंगा, यमुना, गोदावरी, नर्मदा या किसी पवित्र नदी-सरोवर में स्नान किया जाता है। जो नदी तक नहीं जा सकते, वे नहाने के पानी में थोड़ा गंगाजल मिला लेते हैं। इसके बाद अन्न, कपड़े, कंबल और दीये का दान होता है। कई परिवार सत्यनारायण कथा करवाते हैं और कुछ लोग दिन भर व्रत रखकर शाम को चंद्रमा को अर्घ्य देते हैं।
शाम को नदी किनारे, मंदिरों और तुलसी के पास दीये जलाए जाते हैं। वाराणसी के घाटों पर अनगिनत दीयों से सजी देव दीपावली का नजारा देखने देश-विदेश से लोग आते हैं। गुरुद्वारों में अखंड पाठ, कीर्तन, नगर कीर्तन और लंगर होता है, जिसमें हर धर्म के लोग शामिल होते हैं। विदेश में भी गुरुद्वारे और मंदिर इस दिन रोशनी, कीर्तन और सामूहिक भोज से सज जाते हैं।
कार्तिक पूर्णिमा 2026: तारीख़ और मुहूर्त (दिल्ली)
मंगलवार, 24 नवंबर 2026
शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा इस दिन सूर्योदय के समय मौजूद है (उदया तिथि)।
- तिथि
- 23 नवंबर, रात 11:42 – 24 नवंबर, रात 8:23
- सूर्योदय / सूर्यास्त
- सुबह 6:51 / शाम 5:25
- राहु काल (इस दिन)
- दोपहर 2:46 – शाम 4:05
इस त्योहार के लिए हमने कोई अलग पूजा मुहूर्त नहीं निकाला है; ऊपर तिथि का समय और सूर्योदय दिए गए हैं।
कार्तिक पूर्णिमा उस दिन मानी जाती है जब सूर्योदय के समय पूर्णिमा तिथि हो, क्योंकि स्नान और दान सुबह के काम हैं। सूर्योदय से पहले का ब्रह्म मुहूर्त स्नान के लिए सबसे पुण्यकारी माना जाता है। दीपदान और देव दीपावली शाम के प्रदोष काल में होते हैं, इसलिए कभी-कभी वाराणसी में देव दीपावली उस शाम मनाई जाती है जब प्रदोष में पूर्णिमा हो, और यह स्नान वाले दिन से अलग भी हो सकती है।
कार्तिक पूर्णिमा 2027: तारीख़ और मुहूर्त (दिल्ली)
रविवार, 14 नवंबर 2027
शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा इस दिन सूर्योदय के समय मौजूद है (उदया तिथि)।
केंद्र सरकार की छुट्टी (दिल्ली/नई दिल्ली, DoPT): गुरु नानक जयंती, रविवार 14 नवंबर 2027।
- तिथि
- 13 नवंबर, सुबह 9:55 – 14 नवंबर, सुबह 8:55
- सूर्योदय / सूर्यास्त
- सुबह 6:43 / शाम 5:28
- राहु काल (इस दिन)
- शाम 4:07 – शाम 5:28
इस त्योहार के लिए हमने कोई अलग पूजा मुहूर्त नहीं निकाला है; ऊपर तिथि का समय और सूर्योदय दिए गए हैं।
कार्तिक पूर्णिमा की शुभकामनाएँ
कार्तिक पूर्णिमा का चाँद आपके जीवन को शीतलता और शांति से भर दे, गंगा की पवित्रता और दीयों की रोशनी सदा आपके साथ रहे। कार्तिक पूर्णिमा और देव दीपावली की शुभकामनाएँ!यह संदेश WhatsApp पर भेजें
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
कार्तिक पूर्णिमा पर स्नान किस समय करना चाहिए?
कार्तिक पूर्णिमा का स्नान सूर्योदय से पहले ब्रह्म मुहूर्त में सबसे शुभ माना जाता है। अगर इतनी जल्दी संभव न हो तो सूर्योदय के बाद भी पूर्णिमा तिथि रहते हुए स्नान किया जा सकता है। ब्रह्म मुहूर्त का समय सूर्योदय पर निर्भर करता है, इसलिए यह हर शहर में अलग होता है। अपने शहर का पंचांग देखकर ही समय तय करें।
देव दीपावली क्या है और कहाँ मनाई जाती है?
देव दीपावली का अर्थ है देवताओं की दिवाली। यह कार्तिक पूर्णिमा की शाम मुख्य रूप से वाराणसी में मनाई जाती है, जब गंगा के सारे घाट अनगिनत दीयों से जगमगा उठते हैं। माना जाता है कि त्रिपुरासुर पर शिव की जीत की खुशी में देवता इस दिन काशी में उतरकर दीपोत्सव मनाते हैं। लोग नावों से गंगा आरती और घाटों का नजारा देखते हैं।
कार्तिक पूर्णिमा पर क्या दान करना चाहिए?
इस दिन अन्न, गुड़, तिल, कपड़े, कंबल, दीये और घी का दान शुभ माना जाता है। कई लोग गरीबों को भोजन कराते हैं या गौशाला में चारा भेजते हैं। दीपदान यानी नदी में या मंदिर में दीया जलाकर रखना इस दिन का सबसे खास दान है। अपनी सामर्थ्य के अनुसार और किसी जरूरतमंद को दिया गया दान ही सबसे अच्छा माना जाता है।
गुरु नानक जयंती कार्तिक पूर्णिमा को क्यों मनाई जाती है?
सिख परंपरा में गुरु नानक देव जी का प्रकाश पर्व कार्तिक पूर्णिमा को मनाया जाता है, इसलिए इसे गुरपुरब कहते हैं। इससे दो दिन पहले गुरुद्वारों में अखंड पाठ शुरू होता है और एक दिन पहले नगर कीर्तन निकलता है। गुरपुरब के दिन भोर में प्रभात फेरी, कीर्तन, अरदास और लंगर होता है, जिसमें हर किसी का स्वागत होता है।
क्या घर पर कार्तिक पूर्णिमा का स्नान करने से पुण्य मिलता है?
हाँ, परंपरा में माना जाता है कि सच्चे मन से किया गया स्नान ही असली पुण्य देता है। जो लोग नदी तक नहीं जा सकते, खासकर बुजुर्ग या विदेश में रहने वाले, वे नहाने के पानी में थोड़ा गंगाजल मिलाकर स्नान कर सकते हैं। इसके बाद सूर्य को जल चढ़ाकर, दीया जलाकर और थोड़ा दान करके दिन की पूजा पूरी की जा सकती है।
पुष्कर मेला कार्तिक पूर्णिमा से कैसे जुड़ा है?
राजस्थान का पुष्कर मेला कार्तिक शुक्ल एकादशी से पूर्णिमा तक चलता है और पूर्णिमा पर इसका सबसे बड़ा स्नान होता है। मान्यता है कि ब्रह्मा जी से जुड़े पुष्कर सरोवर में इस दिन स्नान का खास पुण्य है। मेले में ऊँटों और पशुओं की खरीद-बिक्री, लोक संगीत और रंगारंग कार्यक्रम होते हैं, जिन्हें देखने देश-विदेश से लोग आते हैं।