दशहरा 2026 और 2027: तारीख़, मुहूर्त और महत्व
सीधा जवाब
दशहरा 2027 में शनिवार, 9 अक्टूबर 2027 को है (दिल्ली)। दशहरा या विजयादशमी आश्विन शुक्ल दशमी को मनाया जाने वाला बुराई पर अच्छाई की जीत का त्योहार है, जिसमें रावण दहन, शमी पूजा, शस्त्र पूजा और दुर्गा विसर्जन होता है।
मुख्य बातें
- 2026: 20 अक्टूबर 2026, मंगलवार
- 2027: 9 अक्टूबर 2027, शनिवार
- हर साल के हिस्से में लिखा है कि वह तारीख़ किस नियम से निकली और मुहूर्त तिथि के भीतर कैसे काटा गया।
- सभी समय दिल्ली के हैं; विदेश में तिथि स्थानीय समय से बदलती है, इसलिए तारीख़ एक दिन अलग हो सकती है।
दशहरा क्या है
दशहरे से दो बड़ी कथाएँ जुड़ी हैं। रामायण के अनुसार इसी दिन भगवान राम ने लंका में रावण का वध करके माता सीता को मुक्त कराया था। दूसरी कथा माँ दुर्गा की है, जिन्होंने नौ दिन के युद्ध के बाद दसवें दिन महिषासुर का अंत किया। इसलिए उत्तर भारत में यह राम की जीत का त्योहार है, तो बंगाल और पूर्वी भारत में माँ दुर्गा की विदाई का भावुक दिन।
महाभारत की कथा भी इससे जुड़ी है। अज्ञातवास के समय पांडवों ने अपने शस्त्र शमी के पेड़ में छिपाए थे और विजयादशमी पर उन्हें वापस निकाला था। इसी कारण इस दिन शमी की पूजा और शस्त्र पूजा होती है। यह दिन नई शुरुआत के लिए बहुत शुभ माना जाता है; बच्चों की पढ़ाई शुरू करना, नया काम या बड़ी खरीदारी इस दिन अच्छी मानी जाती है।
दशहरा कैसे मनाते हैं
उत्तर भारत में नवरात्रि के दिनों में रामलीला का मंचन होता है और दशहरे की शाम मैदानों में रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण के बड़े-बड़े पुतले जलाए जाते हैं। लोग मेला घूमते हैं और जलेबी का मज़ा लेते हैं। दोपहर में कई घरों में शमी या अपराजिता की पूजा होती है। महाराष्ट्र में लोग शमी या आपटा के पत्ते 'सोना' कहकर एक-दूसरे को देते हैं और बड़ों का आशीर्वाद लेते हैं।
बंगाल में विवाहित महिलाएँ सिंदूर खेला के बाद माँ दुर्गा की मूर्ति का विसर्जन करती हैं। कर्नाटक और तमिलनाडु में आयुध पूजा पर औज़ार, वाहन, किताबें और मशीनें पूजी जाती हैं। मैसूर में हाथियों का शाही जुलूस निकलता है और हिमाचल के कुल्लू में इसी दिन से हफ़्ते भर का मेला शुरू होता है, जिसमें घाटी भर के ग्राम देवता आते हैं। विदेश में भी भारतीय समुदाय रामलीला और छोटे पुतला दहन का आयोजन करते हैं।
दशहरा 2026: तारीख़ और मुहूर्त (दिल्ली)
मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026
इस दिन अपराह्न (दिन का चौथा पाँचवाँ भाग) का अधिक हिस्सा शुक्ल पक्ष की दशमी में पड़ता है।
- तिथि
- 20 अक्टूबर, दोपहर 12:50 – 21 अक्टूबर, दोपहर 2:12
- विजय मुहूर्त (दिन का ग्यारहवाँ मुहूर्त, दशमी में)
- दोपहर 1:59 – दोपहर 2:44
- अपराह्न पूजा (दशमी तिथि के भीतर)
- दोपहर 1:14 – दोपहर 3:30
- सूर्योदय / सूर्यास्त
- सुबह 6:25 / शाम 5:47
- राहु काल (इस दिन)
- दोपहर 2:56 – शाम 4:22
पूरा काल (तिथि से काटने से पहले): दोपहर 1:59 – दोपहर 2:45
पूरा काल (तिथि से काटने से पहले): दोपहर 1:14 – दोपहर 3:30
दशहरा उस दिन मनाया जाता है जब दशमी तिथि अपराह्न काल में हो, यानी दोपहर के बाद का वह हिस्सा जो दिन को पाँच बराबर भागों में बाँटने पर चौथा होता है। इसी के आसपास एक छोटा समय विजय मुहूर्त कहलाता है, जिसे किसी भी काम में जीत दिलाने वाला माना जाता है। शमी पूजा, अपराजिता पूजा और सीमा लाँघने की रस्म, जिसे सीमोल्लंघन कहते हैं, इसी समय करना अच्छा माना जाता है। रावण दहन आम तौर पर सूर्यास्त के बाद होता है।
दशहरा 2027: तारीख़ और मुहूर्त (दिल्ली)
शनिवार, 9 अक्टूबर 2027
इस दिन अपराह्न (दिन का चौथा पाँचवाँ भाग) का अधिक हिस्सा शुक्ल पक्ष की दशमी में पड़ता है।
केंद्र सरकार की छुट्टी (दिल्ली/नई दिल्ली, DoPT): दशहरा (विजयादशमी), शनिवार 9 अक्टूबर 2027।
- तिथि
- 9 अक्टूबर, सुबह 9:02 – 10 अक्टूबर, सुबह 11:41
- विजय मुहूर्त (दिन का ग्यारहवाँ मुहूर्त, दशमी में)
- दोपहर 2:05 – दोपहर 2:51
- अपराह्न पूजा (दशमी तिथि के भीतर)
- दोपहर 1:18 – दोपहर 3:38
- सूर्योदय / सूर्यास्त
- सुबह 6:18 / शाम 5:59
- राहु काल (इस दिन)
- सुबह 9:13 – सुबह 10:41
पूरा काल (तिथि से काटने से पहले): दोपहर 2:05 – दोपहर 2:52
पूरा काल (तिथि से काटने से पहले): दोपहर 1:18 – दोपहर 3:38
दशहरा की शुभकामनाएँ
जैसे हर साल रावण जलता है, वैसे ही आपके जीवन की हर परेशानी जलकर राख हो जाए। विजयादशमी की हार्दिक शुभकामनाएँ।यह संदेश WhatsApp पर भेजें
और शुभकामना संदेश जल्द इसी जगह जोड़े जाएँगे।
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
दशहरे पर विजय मुहूर्त क्या होता है?
विजय मुहूर्त दोपहर के बाद का एक छोटा समय है, जिसे दिन के पंद्रह मुहूर्तों में से ग्यारहवाँ माना जाता है। मान्यता है कि इस समय शुरू किया गया काम सफल होता है। दशहरे पर शमी पूजा, शस्त्र पूजा, नया काम शुरू करना या यात्रा पर निकलना इसी समय शुभ माना जाता है। इसका सही समय सूर्योदय और सूर्यास्त पर निर्भर है, इसलिए अपने शहर का पंचांग देखें।
रावण दहन किस समय किया जाता है?
रावण दहन आम तौर पर सूर्यास्त के बाद, प्रदोष काल में किया जाता है, जब रामलीला में राम-रावण युद्ध का अंतिम दृश्य पूरा होता है। हर शहर में आयोजक इसका समय पहले से बता देते हैं। पंचांग के हिसाब से ध्यान यह रखा जाता है कि उस समय दशमी तिथि चल रही हो। पुतला जलते समय भीड़ और पटाखों से दूरी बनाए रखना सुरक्षित रहता है, खासकर बच्चों के साथ।
दशहरे पर शमी के पेड़ की पूजा क्यों होती है?
महाभारत के अनुसार पांडवों ने अज्ञातवास में अपने शस्त्र शमी के पेड़ में छिपाए थे, और विजयादशमी पर उन्हें निकालकर आगे विजय पाई थी। यह भी कहा जाता है कि भगवान राम ने लंका जाने से पहले शमी की पूजा की थी। इसलिए शमी को जीत और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। महाराष्ट्र और कर्नाटक में इसके पत्ते 'सोना' कहकर बाँटे जाते हैं।
आयुध पूजा क्या है और कैसे की जाती है?
आयुध पूजा में अपनी रोज़ी-रोटी के साधनों के प्रति आभार जताया जाता है। दक्षिण भारत में यह ज़्यादातर नवमी को, और कई जगह दशमी को होती है। लोग औज़ार, वाहन, किताबें, कंप्यूटर और मशीनें साफ़ करके उन पर हल्दी-कुमकुम लगाते हैं, फूल चढ़ाते हैं और पूजा करते हैं। उस दिन उन चीज़ों से काम नहीं किया जाता और अगले दिन नई शुरुआत की जाती है।
क्या दशहरे के दिन नया काम या खरीदारी शुभ है?
हाँ, महाराष्ट्र की परंपरा में विजयादशमी को साल के साढ़े तीन सबसे शुभ मुहूर्तों में गिना जाता है, जिनके लिए अलग से मुहूर्त निकलवाने की ज़रूरत नहीं समझी जाती। इस दिन लोग नया व्यापार शुरू करते हैं और गाड़ी, सोना या घर खरीदते हैं। केरल और दक्षिण भारत के कई हिस्सों में बच्चों को पहली बार अक्षर लिखवाने की रस्म, विद्यारंभ, भी इसी दिन होती है।
बंगाल में दशमी पर सिंदूर खेला क्या होता है?
दुर्गा पूजा के आखिरी दिन, विजयादशमी पर, विवाहित महिलाएँ माँ दुर्गा को सिंदूर और मिठाई चढ़ाकर विदा करती हैं और फिर एक-दूसरे के माथे और गालों पर सिंदूर लगाती हैं। इसे सिंदूर खेला कहते हैं। माना जाता है कि माँ अपने मायके से कैलाश लौट रही हैं। इसके बाद मूर्ति विसर्जन होता है और लोग अगले बरस माँ के फिर आने की कामना करते हैं।