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शारदीय नवरात्रि 2026 और 2027: तारीख़, मुहूर्त और महत्व

शारदीय नवरात्रि 2026

11 अक्टूबर 2026

रविवार

बीत गया

शारदीय नवरात्रि 2027

30 सितंबर 2027

गुरुवार

331 दिन बाकी

सीधा जवाब

शारदीय नवरात्रि 2027 में गुरुवार, 30 सितंबर 2027 को है (दिल्ली)। शारदीय नवरात्रि आश्विन महीने के शुक्ल पक्ष में मनाया जाने वाला नौ रातों का त्योहार है, जिसमें घटस्थापना के साथ माँ दुर्गा के नौ रूपों की पूजा और व्रत किए जाते हैं।

मुख्य बातें

  • 2026: 11 अक्टूबर 2026, रविवार
  • 2027: 30 सितंबर 2027, गुरुवार
  • हर साल के हिस्से में लिखा है कि वह तारीख़ किस नियम से निकली और मुहूर्त तिथि के भीतर कैसे काटा गया।
  • सभी समय दिल्ली के हैं; विदेश में तिथि स्थानीय समय से बदलती है, इसलिए तारीख़ एक दिन अलग हो सकती है।

शारदीय नवरात्रि क्या है

नवरात्रि का अर्थ है नौ रातें। साल में दो बड़ी नवरात्रि आती हैं, चैत्र और शारदीय, पर शरद ऋतु की यह नवरात्रि सबसे धूमधाम से मनाई जाती है। कथा है कि महिषासुर नाम के राक्षस को वरदान था कि कोई देवता या पुरुष उसे नहीं मार सकेगा। तब सभी देवताओं की शक्ति से माँ दुर्गा प्रकट हुईं और नौ दिन के युद्ध के बाद दसवें दिन उन्होंने महिषासुर का वध किया।

इन नौ दिनों में माँ के नौ रूपों की पूजा होती है: शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री। एक मान्यता यह भी है कि भगवान राम ने रावण से युद्ध से पहले देवी की आराधना की थी। यह त्योहार बुराई पर अच्छाई की जीत और नारी शक्ति के सम्मान का प्रतीक है।

शारदीय नवरात्रि कैसे मनाते हैं

पहले दिन सुबह घटस्थापना होती है। मिट्टी के बर्तन में जौ बोए जाते हैं, उस पर जल से भरा कलश रखा जाता है और कलश पर आम के पत्ते और नारियल सजाया जाता है। कई घरों में नौ दिन अखंड ज्योत जलती है। लोग अपनी परंपरा के अनुसार व्रत रखते हैं; कुछ पूरे नौ दिन, कुछ पहला और आखिरी दिन। अष्टमी या नवमी पर कन्या पूजन में छोटी बच्चियों को हलवा, पूड़ी और चने खिलाकर उपहार दिए जाते हैं।

गुजरात में रात भर गरबा और डांडिया होते हैं, जिनकी रौनक अब अमेरिका, ब्रिटेन और कनाडा तक पहुँच गई है। बंगाल, असम और ओडिशा में षष्ठी से दशमी तक दुर्गा पूजा के भव्य पंडाल सजते हैं। तमिलनाडु, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में घरों में गुड़ियों की सीढ़ीनुमा सजावट होती है, जिसे गोलू या बोम्मई कोलू कहते हैं, और पड़ोसियों को बुलाया जाता है। मैसूर का शाही दशहरा उत्सव भी पूरी नवरात्रि चलता है।

शारदीय नवरात्रि 2026: तारीख़ और मुहूर्त (दिल्ली)

रविवार, 11 अक्टूबर 2026

शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा इस दिन सूर्योदय के समय मौजूद है (उदया तिथि)।

तिथि
10 अक्टूबर, रात 9:19 – 11 अक्टूबर, रात 9:31
घटस्थापना (दिन का पहला तिहाई भाग, प्रतिपदा में)
नहीं बनता

चित्रा नक्षत्र या वैधृति योग वाला समय हटाया गया है।

पूरा काल (तिथि से काटने से पहले): सुबह 6:19 – सुबह 10:12

घटस्थापना अभिजीत मुहूर्त में (प्रतिपदा के भीतर)
सुबह 11:45 – दोपहर 12:30

पूरा काल (तिथि से काटने से पहले): सुबह 11:45 – दोपहर 12:31

सूर्योदय / सूर्यास्त
सुबह 6:19 / शाम 5:56
राहु काल (इस दिन)
शाम 4:29 – शाम 5:56

नवरात्रि उस दिन शुरू होती है जब सूर्योदय के समय आश्विन शुक्ल प्रतिपदा हो। घटस्थापना सुबह के समय, प्रतिपदा तिथि के रहते करना सबसे अच्छा माना जाता है। शास्त्रों में कहा गया है कि इस समय चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग से बचना चाहिए। अगर सुबह इनसे बचना संभव न हो, तो दोपहर के अभिजीत मुहूर्त में घटस्थापना की जाती है, जिसे दिन का सबसे शुभ समय माना जाता है।

शारदीय नवरात्रि 2027: तारीख़ और मुहूर्त (दिल्ली)

गुरुवार, 30 सितंबर 2027

शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा किसी भी सूर्योदय को नहीं छूती (क्षय तिथि), इसलिए जिस दिन शुरू होती है, उसी दिन रखी गई है। इस दिन सूर्योदय पर पिछली तिथि थी।

तिथि
30 सितंबर, सुबह 8:05 – 1 अक्टूबर, सुबह 5:35
घटस्थापना (दिन का पहला तिहाई भाग, प्रतिपदा में)
सुबह 8:06 – सुबह 10:11

पूरा काल (तिथि से काटने से पहले): सुबह 6:13 – सुबह 10:12

घटस्थापना अभिजीत मुहूर्त में (प्रतिपदा के भीतर)
सुबह 11:47 – दोपहर 12:34

पूरा काल (तिथि से काटने से पहले): सुबह 11:47 – दोपहर 12:35

सूर्योदय / सूर्यास्त
सुबह 6:13 / शाम 6:09
राहु काल (इस दिन)
दोपहर 1:41 – दोपहर 3:10

शारदीय नवरात्रि की शुभकामनाएँ

माँ दुर्गा के नौ रूप आपके घर में नौ तरह की खुशियाँ लाएँ। शक्ति, सुख और अच्छी सेहत का आशीर्वाद मिले। शुभ नवरात्रि।
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

नवरात्रि में घटस्थापना का सही समय कैसे पता करें?

घटस्थापना प्रतिपदा तिथि में, सुबह के समय की जाती है। पंचांग में देखा जाता है कि उस समय चित्रा नक्षत्र या वैधृति योग तो नहीं चल रहा। अगर ये सुबह के समय हों, तो दोपहर के अभिजीत मुहूर्त में कलश स्थापना की जाती है। यह समय हर शहर के सूर्योदय के हिसाब से बदलता है; इस पेज पर दिल्ली का समय है, इसलिए दूसरे शहर में स्थानीय पंचांग से मिलान करें।

नवरात्रि के नौ दिन किस देवी की पूजा होती है?

पहले दिन शैलपुत्री, दूसरे दिन ब्रह्मचारिणी, तीसरे दिन चंद्रघंटा, चौथे दिन कूष्मांडा, पाँचवें दिन स्कंदमाता, छठे दिन कात्यायनी, सातवें दिन कालरात्रि, आठवें दिन महागौरी और नौवें दिन सिद्धिदात्री की पूजा होती है। हर रूप की अपनी कथा और अलग भोग माना जाता है, और कई महिलाएँ हर दिन के लिए तय रंग के कपड़े भी पहनती हैं।

नवरात्रि के व्रत में क्या खा सकते हैं?

व्रत में आम तौर पर गेहूँ, चावल, दालें, प्याज़-लहसुन और साधारण नमक नहीं खाया जाता। इनकी जगह कुट्टू या सिंघाड़े के आटे की पूड़ी, साबूदाना खिचड़ी, समा के चावल, आलू, शकरकंद, फल, दूध, दही और मखाने खाए जाते हैं। खाने में सेंधा नमक डाला जाता है। नियम परिवार के हिसाब से बदलते हैं। बुज़ुर्ग, गर्भवती महिलाएँ और बीमार लोग अक्सर हल्का व्रत रखते हैं।

कन्या पूजन अष्टमी को करें या नवमी को?

यह परिवार की परंपरा पर निर्भर करता है। कई घरों में महाअष्टमी पर कन्या पूजन होता है, तो कई परिवार महानवमी पर करते हैं। आम तौर पर नौ छोटी कन्याओं और एक छोटे बालक को, जिसे लांगुर या भैरव का रूप माना जाता है, घर बुलाया जाता है। उनके पैर धोकर तिलक लगाया जाता है और हलवा-पूड़ी-चने खिलाकर उपहार दिए जाते हैं।

गरबा और डांडिया में क्या अंतर है?

दोनों गुजरात के लोक नृत्य हैं जो नवरात्रि की रातों में होते हैं। गरबा माँ अंबा की आराधना में बीच में रखे दीये या देवी की तस्वीर के चारों ओर गोल घेरे में ताली बजाते हुए किया जाता है। डांडिया रास में हाथों में रंगीन डंडियाँ लेकर जोड़ों में नाचा जाता है, जो कृष्ण और गोपियों की रास लीला से जुड़ा है। आम तौर पर पहले आरती और गरबा होता है, फिर डांडिया।

नवरात्रि कभी आठ या दस दिन की क्यों हो जाती है?

चंद्रमा की तिथि और सूरज का दिन बिल्कुल बराबर नहीं होते। कई बार कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर खत्म हो जाती है और गिनती से छूट जाती है, तो कभी एक तिथि दो सूर्योदयों तक चलती है। ऐसे में नवरात्रि आठ या दस दिन की हो सकती है। पूजा तिथि के अनुसार चलती है, इसलिए अष्टमी, नवमी और दशहरे का दिन अपने शहर का पंचांग देखकर तय करें।

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