गोवर्धन पूजा 2026 और 2027: तारीख़, मुहूर्त और महत्व
सीधा जवाब
गोवर्धन पूजा 2026 में मंगलवार, 10 नवंबर 2026 को है (दिल्ली)। गोवर्धन पूजा आम तौर पर दिवाली के अगले दिन कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा को होती है, जब गोबर से गोवर्धन पर्वत बनाकर पूजा की जाती है और कृष्ण को अन्नकूट का भोग लगता है।
मुख्य बातें
- 2026: 10 नवंबर 2026, मंगलवार
- 2027: 30 अक्टूबर 2027, शनिवार
- हर साल के हिस्से में लिखा है कि वह तारीख़ किस नियम से निकली और मुहूर्त तिथि के भीतर कैसे काटा गया।
- सभी समय दिल्ली के हैं; विदेश में तिथि स्थानीय समय से बदलती है, इसलिए तारीख़ एक दिन अलग हो सकती है।
गोवर्धन पूजा क्या है
गोवर्धन पूजा की कथा ब्रज से जुड़ी है। गोकुल के लोग हर साल अच्छी बारिश के लिए इंद्र देव की पूजा करते थे। बालक कृष्ण ने उन्हें समझाया कि हमारी गायें, खेत और जीवन तो गोवर्धन पर्वत की घास, झरनों और छाँव से चलते हैं, इसलिए पूजा उसी की होनी चाहिए। इस पर नाराज होकर इंद्र ने मूसलाधार बारिश शुरू कर दी।
तब कृष्ण ने अपनी छोटी उंगली पर पूरा गोवर्धन पर्वत उठा लिया और सात दिन तक सारे ब्रजवासी और उनके पशु उसके नीचे सुरक्षित रहे। आखिर इंद्र ने हार मान ली। यह त्योहार प्रकृति, पशुधन और अन्न के प्रति आभार का दिन है। गुजरात में इसी के आसपास नया साल यानी बेसतु वरस मनाया जाता है और लोग एक-दूसरे को साल मुबारक कहते हैं।
गोवर्धन पूजा कैसे मनाते हैं
सुबह आँगन में गाय के गोबर से गोवर्धन पर्वत की आकृति बनाई जाती है, कई जगह लेटे हुए मनुष्य के रूप में, और उसे फूलों, रुई और दीयों से सजाया जाता है। गाय-बैलों को नहलाकर उन्हें रंग और माला पहनाई जाती है। फिर परिवार गोवर्धन की परिक्रमा करता है और कृष्ण के गीत गाता है।
इस दिन का खास आकर्षण अन्नकूट है, यानी अनाज का पहाड़। घरों और मंदिरों में कढ़ी-चावल, बाजरा, कई सब्जियों की मिली-जुली तरकारी, पूरी और मिठाइयाँ बनती हैं, बड़े मंदिरों में छप्पन भोग तक, और इन्हें कृष्ण को चढ़ाकर प्रसाद बाँटा जाता है। मथुरा-वृंदावन और नाथद्वारा में बहुत बड़ा उत्सव होता है। महाराष्ट्र में इसी दिन बलि प्रतिपदा मनाई जाती है। विदेशों के इस्कॉन और स्वामीनारायण मंदिरों में भी भव्य अन्नकूट सजता है।
गोवर्धन पूजा 2026: तारीख़ और मुहूर्त (दिल्ली)
मंगलवार, 10 नवंबर 2026
शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा इस दिन सूर्योदय के समय मौजूद है (उदया तिथि)।
- तिथि
- 9 नवंबर, दोपहर 12:31 – 10 नवंबर, दोपहर 2:00
- प्रातःकाल पूजा (प्रतिपदा के भीतर)
- सुबह 6:40 – सुबह 8:49
- सायंकाल पूजा (प्रतिपदा के भीतर)
- नहीं बनता
- सूर्योदय / सूर्यास्त
- सुबह 6:40 / शाम 5:30
- राहु काल (इस दिन)
- दोपहर 2:48 – शाम 4:09
पूरा काल (तिथि से काटने से पहले): सुबह 6:40 – सुबह 8:50
इस दिन यह समय तिथि के भीतर नहीं पड़ता, इसलिए कोई मुहूर्त नहीं बनता।
पूरा काल (तिथि से काटने से पहले): दोपहर 3:20 – शाम 5:30
गोवर्धन पूजा सुबह का त्योहार है। जिस दिन सूर्योदय के समय कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा तिथि रहती है, उसी दिन यह पूजा होती है। सुबह का प्रातःकाल मुहूर्त पूजा के लिए सबसे अच्छा माना जाता है, क्योंकि अन्नकूट का भोग दिन की शुरुआत में ही भगवान को अर्पित करने की परंपरा है। कई पंचांग शाम का एक मुहूर्त भी देते हैं, जो सुबह पूजा न कर पाने वालों के काम आता है।
गोवर्धन पूजा 2027: तारीख़ और मुहूर्त (दिल्ली)
शनिवार, 30 अक्टूबर 2027
शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा इस दिन सूर्योदय के समय मौजूद है (उदया तिथि)।
- तिथि
- 29 अक्टूबर, शाम 7:06 – 30 अक्टूबर, शाम 5:52
- प्रातःकाल पूजा (प्रतिपदा के भीतर)
- सुबह 6:31 – सुबह 8:44
- सायंकाल पूजा (प्रतिपदा के भीतर)
- दोपहर 3:25 – शाम 5:37
- सूर्योदय / सूर्यास्त
- सुबह 6:31 / शाम 5:38
- राहु काल (इस दिन)
- सुबह 9:18 – सुबह 10:41
पूरा काल (तिथि से काटने से पहले): सुबह 6:31 – सुबह 8:45
पूरा काल (तिथि से काटने से पहले): दोपहर 3:25 – शाम 5:38
गोवर्धन पूजा की शुभकामनाएँ
गिरिधारी कृष्ण आपके घर-परिवार की हर मुश्किल से रक्षा करें, और आपका भंडार अन्नकूट की तरह सदा भरा रहे। गोवर्धन पूजा की हार्दिक शुभकामनाएँ!यह संदेश WhatsApp पर भेजें
और शुभकामना संदेश जल्द इसी जगह जोड़े जाएँगे।
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
गोवर्धन पूजा किस समय करनी चाहिए?
गोवर्धन पूजा सुबह के प्रातःकाल मुहूर्त में करना सबसे शुभ माना जाता है, उस दिन जब सूर्योदय के समय प्रतिपदा तिथि हो। कई पंचांग शाम का एक मुहूर्त भी बताते हैं। दोनों समय आपके शहर के सूर्योदय और सूर्यास्त पर निर्भर करते हैं, इसलिए अपने शहर का पंचांग देखकर ही पूजा का समय तय करें।
अन्नकूट क्या होता है?
अन्नकूट का अर्थ है अनाज का ढेर या पहाड़। इस दिन घरों और मंदिरों में तरह-तरह के पकवान, सब्जियाँ, दालें, चावल और मिठाइयाँ बनाकर भगवान कृष्ण के सामने पहाड़ की तरह सजाई जाती हैं। बड़े मंदिरों में छप्पन भोग तक लगता है। पूजा के बाद यह भोजन प्रसाद के रूप में आने वाले सभी लोगों में बाँटा जाता है।
गोवर्धन पर्वत गोबर से कैसे बनाते हैं?
आँगन या घर के बाहर साफ जगह पर गाय के गोबर से पर्वत या लेटे हुए पुरुष की आकृति बनाई जाती है। उसकी नाभि की जगह एक कटोरी या दीया रखा जाता है, जिसमें दूध, दही, शहद और बताशे डाले जाते हैं। आसपास ग्वाल-बाल और गायों की छोटी आकृतियाँ बनती हैं। फिर फूल, रुई और दीयों से सजाकर पूजा होती है।
गोवर्धन पूजा और अन्नकूट में क्या अंतर है?
दोनों एक ही दिन के दो पहलू हैं। गोवर्धन पूजा में गोबर से बने पर्वत और गायों की पूजा होती है, जो कृष्ण के गोवर्धन उठाने की याद है। अन्नकूट उस दिन तैयार किए गए ढेर सारे भोजन का भोग है। उत्तर भारत के घरों में गोवर्धन पूजा पर जोर रहता है, जबकि मंदिरों में अन्नकूट की धूम ज्यादा होती है।
क्या गोवर्धन पूजा हमेशा दिवाली के अगले दिन होती है?
ज्यादातर हाँ, पर हर बार नहीं। गोवर्धन पूजा उस दिन होती है जब सूर्योदय के समय कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा हो। अगर अमावस्या अगले दिन सुबह तक बनी रहे, तो दिवाली और गोवर्धन पूजा के बीच एक दिन का अंतर आ सकता है। चंद्र तिथियाँ सूरज के दिनों से पूरी तरह मेल नहीं खातीं, इसीलिए पंचांग हर साल तिथि देखकर दिन तय करता है।
गुजरात में गोवर्धन पूजा के दिन नया साल क्यों मनाया जाता है?
गुजरात में विक्रम संवत का नया साल कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा से शुरू होता है, इसलिए यही दिन बेसतु वरस कहलाता है। लोग सुबह मंदिर जाते हैं, बड़ों का आशीर्वाद लेते हैं और एक-दूसरे को साल मुबारक कहते हैं। व्यापारी दिवाली पर पूजे गए नए बही-खातों में इसी दिन से हिसाब लिखना शुरू करते हैं।