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राम नवमी 2026 और 2027: तारीख़, मुहूर्त और महत्व

राम नवमी 2026

26 मार्च 2026

गुरुवार

बीत गया

राम नवमी 2027

15 अप्रैल 2027

गुरुवार

163 दिन बाकी

सीधा जवाब

राम नवमी 2027 में गुरुवार, 15 अप्रैल 2027 को है (दिल्ली)। राम नवमी चैत्र शुक्ल नवमी को भगवान श्रीराम के जन्म का उत्सव है, जिसमें भक्त व्रत रखते हैं, दोपहर में जन्म की पूजा करते हैं और रामायण का पाठ करते हैं।

मुख्य बातें

  • 2026: 26 मार्च 2026, गुरुवार
  • 2027: 15 अप्रैल 2027, गुरुवार
  • हर साल के हिस्से में लिखा है कि वह तारीख़ किस नियम से निकली और मुहूर्त तिथि के भीतर कैसे काटा गया।
  • सभी समय दिल्ली के हैं; विदेश में तिथि स्थानीय समय से बदलती है, इसलिए तारीख़ एक दिन अलग हो सकती है।

राम नवमी क्या है

राम नवमी चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष की नवमी को आती है। मान्यता है कि इसी दिन अयोध्या में राजा दशरथ और रानी कौशल्या के घर भगवान विष्णु ने श्रीराम के रूप में जन्म लिया था। यह दिन चैत्र नवरात्र का आखिरी दिन भी होता है, इसलिए कई घरों में इसी दिन कन्या पूजन और नवरात्र का समापन होता है।

श्रीराम को मर्यादा पुरुषोत्तम कहा जाता है, यानी ऐसा व्यक्ति जिसने हर रिश्ते और हर ज़िम्मेदारी को पूरी ईमानदारी से निभाया। बेटे, भाई, पति और राजा के रूप में उनका जीवन आज भी घर-परिवार के लिए आदर्श माना जाता है। रामचरितमानस में तुलसीदास जी ने उनके जन्म का बहुत सुंदर वर्णन किया है, और राम नवमी पर उसी प्रसंग को गाकर खुशी मनाई जाती है।

राम नवमी कैसे मनाते हैं

बहुत से लोग इस दिन व्रत रखते हैं और फलाहार करते हैं, जबकि बुज़ुर्ग, गर्भवती महिलाएं या बीमार लोग अक्सर हल्का व्रत रखते हैं। घर के मंदिर को फूलों से सजाया जाता है और बाल राम की मूर्ति या तस्वीर को छोटे पालने में रखा जाता है। दोपहर में जन्म के समय शंख और घंटी बजाकर और भए प्रगट कृपाला गाकर स्वागत किया जाता है। फिर पालना झुलाया जाता है और पंजीरी, पंचामृत, फल और खीर का भोग लगाया जाता है।

अयोध्या में सरयू स्नान के लिए भारी भीड़ होती है और मंदिरों में विशेष उत्सव होते हैं। कई शहरों में राम दरबार की झांकियों के साथ शोभायात्रा निकलती है। दक्षिण भारत में गुड़ और काली मिर्च वाला पानकम और मसालेदार छाछ बांटी जाती है, और कई मंदिरों में सीता-राम विवाह का उत्सव मनाया जाता है। विदेश के मंदिरों में अखंड रामायण पाठ, भजन संध्या और बच्चों की रामलीला होती है।

राम नवमी 2026: तारीख़ और मुहूर्त (दिल्ली)

गुरुवार, 26 मार्च 2026

इस दिन मध्याह्न (दिन का बीच का पाँचवाँ भाग) का अधिक हिस्सा शुक्ल पक्ष की नवमी में पड़ता है।

तिथि
26 मार्च, सुबह 11:49 – 27 मार्च, सुबह 10:07
मध्याह्न पूजा (नवमी तिथि के भीतर)
सुबह 11:49 – दोपहर 1:40

पूरा काल (तिथि से काटने से पहले): सुबह 11:13 – दोपहर 1:41

मध्याह्न का क्षण
दोपहर 12:27
सूर्योदय / सूर्यास्त
सुबह 6:18 / शाम 6:36
राहु काल (इस दिन)
दोपहर 1:59 – दोपहर 3:31

राम नवमी में दोपहर का समय सबसे अहम है, क्योंकि मान्यता है कि श्रीराम का जन्म मध्याह्न में, यानी दिन के बीच वाले हिस्से में हुआ था। इसलिए वह दिन चुना जाता है जिस दिन नवमी तिथि मध्याह्न के समय मौजूद हो। जन्म की पूजा, आरती और पालना झुलाने की रस्म इसी समय की जाती है। सुबह की तैयारी और शाम का भजन-कीर्तन भी होता है, पर केंद्र दोपहर की पूजा ही रहती है। दिल्ली का मध्याह्न मुहूर्त (नवमी तिथि के भीतर) मुहूर्त वाले हिस्से में दिया गया है।

राम नवमी 2027: तारीख़ और मुहूर्त (दिल्ली)

गुरुवार, 15 अप्रैल 2027

इस दिन मध्याह्न (दिन का बीच का पाँचवाँ भाग) का अधिक हिस्सा शुक्ल पक्ष की नवमी में पड़ता है।

केंद्र सरकार की छुट्टी (दिल्ली/नई दिल्ली, DoPT): राम नवमी, गुरुवार 15 अप्रैल 2027।

तिथि
14 अप्रैल, दोपहर 3:24 – 15 अप्रैल, दोपहर 1:21
मध्याह्न पूजा (नवमी तिथि के भीतर)
सुबह 11:04 – दोपहर 1:21

पूरा काल (तिथि से काटने से पहले): सुबह 11:04 – दोपहर 1:39

मध्याह्न का क्षण
दोपहर 12:22
सूर्योदय / सूर्यास्त
सुबह 5:56 / शाम 6:47
राहु काल (इस दिन)
दोपहर 1:58 – दोपहर 3:34

राम नवमी की शुभकामनाएँ

श्रीराम का आशीर्वाद आपके घर में सुख, सच्चाई और शांति बनाए रखे। जय श्रीराम! राम नवमी की हार्दिक शुभकामनाएं।
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संबंधित त्योहार और सूचियाँ

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

राम नवमी की पूजा दोपहर में क्यों होती है?

रामायण और रामचरितमानस के अनुसार श्रीराम का जन्म चैत्र शुक्ल नवमी को दोपहर के समय हुआ था। इसलिए जन्म का उत्सव भी उसी समय मनाया जाता है। मंदिरों में दोपहर होते ही पर्दा हटाया जाता है, शंख बजते हैं और बाल राम की पहली आरती होती है। घरों में भी लोग इसी समय पूजा करके भोग लगाते हैं और कई लोग इसके बाद ही कुछ खाते हैं।

राम नवमी का व्रत कैसे रखें?

सुबह स्नान करके व्रत का संकल्प लें। दिन भर फल, दूध, मेवे या व्रत वाले पकवान लें, और अनाज, प्याज़ व लहसुन से परहेज़ करें। दोपहर में श्रीराम के जन्म की पूजा करें और रामचरितमानस का बालकांड या राम रक्षा स्तोत्र पढ़ें। कुछ लोग पूजा के बाद ही व्रत खोल लेते हैं, तो कुछ अगले दिन। बुज़ुर्ग या बीमार लोग अपनी सुविधा से हल्का व्रत रखें।

राम नवमी पर कौन सा भोग लगाया जाता है?

उत्तर भारत में धनिया पंजीरी, पंचामृत, खीर, फल और हलवा-पूरी का भोग आम है। दक्षिण भारत में गुड़ और काली मिर्च से बना पानकम, मसालेदार छाछ और भीगी मूंग दाल का सलाद, जिसे कोसंबरी कहते हैं, बांटा जाता है। गर्मी का मौसम शुरू होने के कारण ठंडक देने वाली चीज़ें प्रसाद में ज़्यादा रहती हैं। जो भी भोग हो, उसे श्रद्धा से चढ़ाना ही असली बात है।

राम नवमी और चैत्र नवरात्र का क्या संबंध है?

चैत्र नवरात्र चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से शुरू होकर नवमी तक चलते हैं, और उनका आखिरी दिन ही राम नवमी है। इसलिए कई परिवार इस दिन देवी की पूजा, कन्या पूजन और हवन के साथ नवरात्र पूरे करते हैं और फिर दोपहर में श्रीराम का जन्मोत्सव मनाते हैं। कुछ घरों में कन्या पूजन अष्टमी को होता है। दोनों परंपराएं अपनी-अपनी जगह मान्य हैं।

राम नवमी पर अयोध्या में क्या खास होता है?

अयोध्या में राम नवमी सबसे बड़ा त्योहार है। सुबह से सरयू नदी में स्नान करने वालों की भीड़ रहती है। राम जन्मभूमि मंदिर और कनक भवन समेत शहर के मंदिरों में दोपहर को जन्मोत्सव मनाया जाता है, बधाई गीत गाए जाते हैं और प्रसाद बांटा जाता है। पूरे शहर में शोभायात्राएं निकलती हैं और देर रात तक भजन-कीर्तन चलता है।

क्या विदेश में रहकर भी राम नवमी मना सकते हैं?

बिल्कुल। विदेश में बसे बहुत से परिवार घर पर ही बाल राम की छोटी पूजा करते हैं, पालना सजाते हैं और बच्चों के साथ रामायण की कहानियां पढ़ते हैं। बड़े शहरों के हिंदू मंदिरों में अखंड पाठ, भजन और रामलीला होती है। बस ध्यान रखें कि पूजा अपने शहर के स्थानीय मध्याह्न के हिसाब से करें; इस पेज पर दिया गया समय दिल्ली का है।

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