हनुमान जयंती 2026 और 2027: तारीख़, मुहूर्त और महत्व
सीधा जवाब
हनुमान जयंती 2027 में मंगलवार, 20 अप्रैल 2027 को है (दिल्ली)। हनुमान जयंती चैत्र पूर्णिमा को भगवान हनुमान के जन्मोत्सव के रूप में मनाई जाती है, जब भक्त हनुमान चालीसा पढ़ते हैं, सिंदूर का चोला चढ़ाते हैं और लड्डू का भोग लगाते हैं।
मुख्य बातें
- 2026: 2 अप्रैल 2026, गुरुवार
- 2027: 20 अप्रैल 2027, मंगलवार
- हर साल के हिस्से में लिखा है कि वह तारीख़ किस नियम से निकली और मुहूर्त तिथि के भीतर कैसे काटा गया।
- सभी समय दिल्ली के हैं; विदेश में तिथि स्थानीय समय से बदलती है, इसलिए तारीख़ एक दिन अलग हो सकती है।
हनुमान जयंती क्या है
उत्तर भारत में हनुमान जयंती चैत्र महीने की पूर्णिमा को मनाई जाती है, और वह दिन चुना जाता है जब सूर्योदय के समय पूर्णिमा तिथि हो। हनुमान जी को पवनपुत्र, अंजनीपुत्र और केसरीनंदन कहा जाता है। वे शिव के अंश माने जाते हैं और श्रीराम के सबसे बड़े भक्त हैं। बहुत से लोग इसे हनुमान जन्मोत्सव कहना पसंद करते हैं, क्योंकि उन्हें चिरंजीवी, यानी सदा जीवित रहने वाला माना जाता है।
हनुमान जी की कहानियां बचपन से हर घर में सुनाई जाती हैं: सूरज को फल समझकर पकड़ने दौड़ना, समुद्र लांघकर लंका जाना, सीता माता को श्रीराम की अंगूठी देना और लक्ष्मण के लिए पूरा पर्वत उठा लाना। वे बल, बुद्धि, विनम्रता और निस्वार्थ सेवा का प्रतीक हैं। माना जाता है कि वे हर संकट दूर करते हैं, इसलिए उन्हें संकटमोचन कहा जाता है।
हनुमान जयंती कैसे मनाते हैं
भक्त सुबह स्नान करके हनुमान मंदिर जाते हैं। हनुमान जी को सिंदूर और चमेली के तेल का चोला चढ़ाया जाता है, लाल फूल, जनेऊ और तुलसी अर्पित की जाती है, और बूंदी या बेसन के लड्डू, गुड़-चना और केले का भोग लगाया जाता है। हनुमान चालीसा, बजरंग बाण और सुंदरकांड का पाठ होता है, और कई जगह सौ बार चालीसा पढ़ी जाती है। कुछ लोग इस दिन व्रत भी रखते हैं।
मंदिरों में दिन भर भंडारा चलता है और शोभायात्राएं निकलती हैं। दक्षिण भारत में तिथियां अलग हैं: तमिलनाडु में हनुमत जयंती मार्गशीर्ष अमावस्या को, कर्नाटक में मार्गशीर्ष शुक्ल त्रयोदशी को और आंध्र प्रदेश व तेलंगाना में वैशाख में मनाई जाती है। कुछ समुदाय दीपावली से एक दिन पहले, कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी को भी जयंती मनाते हैं। विदेश के मंदिरों में सामूहिक चालीसा पाठ होता है।
हनुमान जयंती 2026: तारीख़ और मुहूर्त (दिल्ली)
गुरुवार, 2 अप्रैल 2026
शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा इस दिन सूर्योदय के समय मौजूद है (उदया तिथि)।
- तिथि
- 1 अप्रैल, सुबह 7:06 – 2 अप्रैल, सुबह 7:41
- सूर्योदय / सूर्यास्त
- सुबह 6:10 / शाम 6:40
- राहु काल (इस दिन)
- दोपहर 1:59 – दोपहर 3:32
इस त्योहार के लिए हमने कोई अलग पूजा मुहूर्त नहीं निकाला है; ऊपर तिथि का समय और सूर्योदय दिए गए हैं।
उत्तर भारत में हनुमान जयंती के लिए वह दिन लिया जाता है जब सूर्योदय के समय चैत्र पूर्णिमा तिथि हो, क्योंकि सूर्योदय वाली तिथि को ही पूरे दिन की तिथि माना जाता है। कई परंपराओं में माना जाता है कि हनुमान जी का जन्म सूर्योदय के आसपास हुआ था, इसलिए सुबह की पूजा और आरती को खास महत्व दिया जाता है। मंदिरों में भोर से ही अभिषेक और चोला चढ़ाने की तैयारी शुरू हो जाती है। दिल्ली के लिए पूर्णिमा तिथि के शुरू और ख़त्म होने का समय मुहूर्त वाले हिस्से में दिया गया है।
हनुमान जयंती 2027: तारीख़ और मुहूर्त (दिल्ली)
मंगलवार, 20 अप्रैल 2027
शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा इस दिन सूर्योदय के समय मौजूद है (उदया तिथि)।
- तिथि
- 20 अप्रैल, सुबह 4:51 – 21 अप्रैल, रात 3:57
- सूर्योदय / सूर्यास्त
- सुबह 5:51 / शाम 6:50
- राहु काल (इस दिन)
- दोपहर 3:35 – शाम 5:12
इस त्योहार के लिए हमने कोई अलग पूजा मुहूर्त नहीं निकाला है; ऊपर तिथि का समय और सूर्योदय दिए गए हैं।
हनुमान जयंती की शुभकामनाएँ
संकटमोचन हनुमान जी आपके हर कष्ट को दूर करें और घर में बल, बुद्धि और भक्ति का वास हो। हनुमान जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं!यह संदेश WhatsApp पर भेजें
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
हनुमान जयंती साल में दो बार क्यों मनाई जाती है?
अलग-अलग इलाकों में हनुमान जी के जन्म की अलग परंपराएं हैं। उत्तर भारत में मुख्य जयंती चैत्र पूर्णिमा को होती है, जबकि कुछ समुदाय कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी, यानी दीपावली से एक दिन पहले, भी जयंती मनाते हैं। दक्षिण भारत में तमिलनाडु, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश की अपनी अलग तिथियां हैं। इनमें से कोई भी गलत नहीं है, सभी परंपराएं अपनी जगह सम्मान के लायक हैं।
हनुमान जी को सिंदूर का चोला क्यों चढ़ाया जाता है?
एक प्रसिद्ध कथा के अनुसार हनुमान जी ने सीता माता को मांग में सिंदूर लगाते देखा और पूछा कि वे ऐसा क्यों करती हैं। माता ने बताया कि यह श्रीराम की लंबी आयु के लिए है। यह सुनकर हनुमान जी ने अपने पूरे शरीर पर सिंदूर लगा लिया। तभी से उन्हें चमेली के तेल में मिला सिंदूर, यानी चोला, चढ़ाने की परंपरा चली आ रही है।
हनुमान जयंती पर कौन सा पाठ करना चाहिए?
सबसे लोकप्रिय पाठ हनुमान चालीसा है, जिसे कई भक्त इस दिन सात, ग्यारह या सौ बार पढ़ते हैं। इसके अलावा सुंदरकांड, बजरंग बाण और संकटमोचन हनुमानाष्टक भी पढ़े जाते हैं। जो लोग लंबा पाठ नहीं कर सकते, वे श्रीराम का नाम जपकर भी हनुमान जी को प्रसन्न कर सकते हैं, क्योंकि माना जाता है कि जहां राम का नाम लिया जाता है, वहां हनुमान जी ज़रूर होते हैं।
हनुमान जयंती पर क्या भोग लगाएं?
हनुमान जी को बूंदी और बेसन के लड्डू सबसे प्रिय माने जाते हैं। इसके अलावा गुड़ और भुने चने, केले, इमरती, पान का बीड़ा और तुलसी दल भी चढ़ाया जाता है। कई मंदिरों में इस दिन बड़े भंडारे होते हैं, जिनमें पूड़ी, सब्ज़ी और हलवा सबको बांटा जाता है। भोग को सबमें बांटना हनुमान जी की सेवा भावना के अनुरूप माना जाता है।
क्या महिलाएं हनुमान जी की पूजा कर सकती हैं?
हां, महिलाएं हनुमान जी की पूजा, चालीसा पाठ और व्रत कर सकती हैं, और बहुत सी महिलाएं नियमित रूप से करती भी हैं। कुछ परिवारों और मंदिरों में यह परंपरा है कि महिलाएं मूर्ति को सीधे छूकर चोला न चढ़ाएं, बल्कि पुजारी के हाथ से चढ़वाएं। यह स्थानीय रिवाज़ है। भक्ति, पाठ और प्रार्थना पर किसी तरह की रोक नहीं है।
हनुमान जयंती का व्रत कैसे रखें?
सुबह स्नान करके लाल या केसरिया कपड़े पहनें और व्रत का संकल्प लें। दिन भर फलाहार करें और शाम की पूजा के बाद सादा भोजन लें, या अपने परिवार की परंपरा के अनुसार चलें। इस दिन संयम, सच्चाई और सेवा पर ज़ोर दिया जाता है। बुज़ुर्ग, गर्भवती महिलाएं या बीमार लोग अक्सर हल्का व्रत रखते हैं, या केवल पूजा और पाठ करते हैं।