शुभकालदिल्लीEN

एकादशी 2027: पूरी सूची, तारीख़ और समय

सीधा जवाब

2027 में कुल 25 एकादशी हैं (दिल्ली समय)। अगली एकादशी सफला एकादशी है, जो रविवार, 3 जनवरी 2027 को है (61 दिन बाद)।

मुख्य बातें

  • 2027 में 25 एकादशी, 12 महीनों में फैली हुई।
  • शुभकाल स्मार्त परंपरा के नियम से एकादशी की तारीख़ तय करता है: (1) जिस दिन सूर्योदय के समय एकादशी हो, वही दिन; (2) अगर एकादशी किसी भी सूर्योदय को न छुए (क्षय एकादशी), तो जिस दिन वह शुरू होती है; (3) अगर एकादशी दो सूर्योदयों तक चले (वृद्धि), तो दूसरा दिन; (4) अगर अगले दिन सूर्योदय पर द्वादशी न बचे, तो एक दिन पहले, ताकि पारण द्वादशी में हो सके। हर पंक्ति में लिखा है कि उस तारीख़ पर कौन-सा नियम लगा। वैष्णव और इस्कॉन कैलेंडर कई बार अगले दिन व्रत रखते हैं; हमारी वैष्णव तारीख़ केवल अरुणोदय नियम से निकली अनुमानित तारीख़ है।
  • हर पंक्ति में तिथि के शुरू और ख़त्म होने का समय दिल्ली के हिसाब से है; विदेश में तारीख़ बदल सकती है।
  • हर तारीख़ को एक टैप में Google कैलेंडर में जोड़ सकते हैं।

एकादशी हर चंद्र महीने में दो बार आती है, एक बार शुक्ल पक्ष में और एक बार कृष्ण पक्ष में। भगवान विष्णु को समर्पित यह व्रत हिंदू घरों में सबसे ज़्यादा रखे जाने वाले व्रतों में से एक है। हर एकादशी का अपना नाम और अपनी कथा है, जैसे मोक्षदा, निर्जला, देवशयनी या देवउठनी। लोग यह सूची इसलिए देखते हैं ताकि पहले से जान सकें कि व्रत किस दिन रखना है, रसोई में अनाज न बनाने की तैयारी कब करनी है और अगली सुबह व्रत कब खोलना है। नीचे की तालिका में हर एकादशी का नाम, व्रत का दिन और दिल्ली के हिसाब से तिथि का समय दिया गया है। अगर आप किसी दूसरे शहर या देश में रहते हैं तो समय थोड़ा बदल सकता है, इसलिए अपने शहर का पंचांग भी एक बार ज़रूर देख लें।

गिनती के बारे में: यह सूची जनवरी से दिसंबर (ग्रेगोरियन साल) की है। चंद्र वर्ष में अधिक मास होने पर 26 एकादशी होती हैं, पर ग्रेगोरियन साल में उनकी गिनती 24 या 25 रहती है, इसलिए हम ज़बरदस्ती 26 नहीं दिखाते। पारण का समय नियम से निकाला गया है, पर किसी बाहरी पंचांग से अभी मिलाया नहीं गया है।

एकादशी 2027 की तारीख़ें

तारीख़व्रत / तिथितिथि शुरूतिथि ख़त्मपारण (अगले दिन)कैलेंडर
3 जनवरीरविवारसफला एकादशीकृष्ण पक्ष एकादशी2 जनवरी, दोपहर 2:243 जनवरी, शाम 4:084 जनवरी, सुबह 7:14 – 4 जनवरी, सुबह 9:19हरि वासर समाप्त: रात 10:41कैलेंडर
18 जनवरीसोमवारपौष पुत्रदा एकादशीशुक्ल पक्ष एकादशीअगले दिन सूर्योदय तक द्वादशी नहीं बचती, इसलिए व्रत एक दिन पहले रखा गया ताकि पारण द्वादशी में हो सके।वैष्णव (अनुमान): 19 जनवरी18 जनवरी, सुबह 10:2719 जनवरी, सुबह 7:4919 जनवरी, दोपहर 1:35 – 19 जनवरी, शाम 5:49हरि वासर समाप्त: 19 जनवरी, दोपहर 1:03कैलेंडर
2 फ़रवरीमंगलवारषटतिला एकादशीकृष्ण पक्ष एकादशी1 फ़रवरी, सुबह 8:412 फ़रवरी, सुबह 11:103 फ़रवरी, सुबह 7:08 – 3 फ़रवरी, सुबह 9:19हरि वासर समाप्त: शाम 5:51कैलेंडर
17 फ़रवरीबुधवारजया एकादशीशुक्ल पक्ष एकादशी16 फ़रवरी, रात 8:1917 फ़रवरी, शाम 5:3218 फ़रवरी, सुबह 6:57 – 18 फ़रवरी, सुबह 9:12हरि वासर समाप्त: रात 10:46कैलेंडर
4 मार्चगुरुवारविजया एकादशीकृष्ण पक्ष एकादशीएकादशी दो सूर्योदयों तक चलती है (वृद्धि); स्मार्त नियम में दूसरा दिन लिया जाता है।3 मार्च, सुबह 4:444 मार्च, सुबह 7:245 मार्च, सुबह 6:43 – 5 मार्च, सुबह 9:02हरि वासर समाप्त: दोपहर 2:02कैलेंडर
18 मार्चगुरुवारआमलकी एकादशीशुक्ल पक्ष एकादशी18 मार्च, सुबह 4:2119 मार्च, रात 1:5119 मार्च, सुबह 7:13 – 19 मार्च, सुबह 8:51हरि वासर समाप्त: 19 मार्च, सुबह 7:13कैलेंडर
2 अप्रैलशुक्रवारपापमोचनी एकादशीकृष्ण पक्ष एकादशी2 अप्रैल, रात 12:453 अप्रैल, रात 2:523 अप्रैल, दोपहर 1:40 – 3 अप्रैल, शाम 6:40हरि वासर समाप्त: 3 अप्रैल, सुबह 9:16कैलेंडर
17 अप्रैलशनिवारकामदा एकादशीशुक्ल पक्ष एकादशी16 अप्रैल, सुबह 11:2217 अप्रैल, सुबह 9:2818 अप्रैल, सुबह 5:53 – 18 अप्रैल, सुबह 7:42हरि वासर समाप्त: दोपहर 3:02कैलेंडर
2 मईरविवारवरूथिनी एकादशीकृष्ण पक्ष एकादशी1 मई, शाम 6:542 मई, शाम 7:523 मई, सुबह 5:39 – 3 मई, सुबह 8:18हरि वासर समाप्त: 3 मई, रात 1:55कैलेंडर
16 मईरविवारमोहिनी एकादशीशुक्ल पक्ष एकादशी15 मई, शाम 6:1716 मई, शाम 5:1317 मई, सुबह 5:30 – 17 मई, सुबह 8:12हरि वासर समाप्त: रात 11:03कैलेंडर
1 जूनमंगलवारअपरा एकादशीकृष्ण पक्ष एकादशी31 मई, सुबह 10:021 जून, सुबह 9:402 जून, सुबह 5:24 – 2 जून, सुबह 8:09हरि वासर समाप्त: दोपहर 3:22कैलेंडर
14 जूनसोमवारनिर्जला एकादशीशुक्ल पक्ष एकादशी14 जून, रात 2:1215 जून, रात 2:0815 जून, दोपहर 1:45 – 15 जून, शाम 7:20हरि वासर समाप्त: 15 जून, सुबह 8:14कैलेंडर
30 जूनबुधवारयोगिनी एकादशीकृष्ण पक्ष एकादशी29 जून, रात 10:0430 जून, रात 8:311 जुलाई, सुबह 5:27 – 1 जुलाई, सुबह 8:14हरि वासर समाप्त: 1 जुलाई, रात 1:57कैलेंडर
14 जुलाईबुधवारदेवशयनी एकादशीशुक्ल पक्ष एकादशी13 जुलाई, दोपहर 12:0914 जुलाई, दोपहर 1:1015 जुलाई, सुबह 5:33 – 15 जुलाई, सुबह 8:18हरि वासर समाप्त: शाम 7:33कैलेंडर
29 जुलाईगुरुवारकामिका एकादशीकृष्ण पक्ष एकादशीएकादशी किसी भी सूर्योदय को नहीं छूती (क्षय तिथि), इसलिए जिस दिन शुरू होती है, उसी दिन रखी गई है। इस दिन सूर्योदय पर पिछली तिथि थी।वैष्णव (अनुमान): 30 जुलाई29 जुलाई, सुबह 7:3430 जुलाई, सुबह 5:1330 जुलाई, दोपहर 1:49 – 30 जुलाई, शाम 7:13हरि वासर समाप्त: 30 जुलाई, सुबह 10:30कैलेंडर
12 अगस्तगुरुवारश्रावण पुत्रदा एकादशीशुक्ल पक्ष एकादशी12 अगस्त, रात 12:5913 अगस्त, रात 3:0013 अगस्त, दोपहर 1:45 – 13 अगस्त, शाम 7:02हरि वासर समाप्त: 13 अगस्त, सुबह 9:35कैलेंडर
28 अगस्तशनिवारअजा एकादशीकृष्ण पक्ष एकादशी27 अगस्त, दोपहर 3:2528 अगस्त, दोपहर 12:4229 अगस्त, सुबह 5:58 – 29 अगस्त, सुबह 8:31हरि वासर समाप्त: शाम 5:56कैलेंडर
11 सितंबरशनिवारपरिवर्तिनी एकादशीशुक्ल पक्ष एकादशी10 सितंबर, शाम 5:0011 सितंबर, शाम 7:3612 सितंबर, सुबह 6:04 – 12 सितंबर, सुबह 8:33हरि वासर समाप्त: 12 सितंबर, रात 2:16कैलेंडर
26 सितंबररविवारइंदिरा एकादशीकृष्ण पक्ष एकादशी25 सितंबर, रात 10:3126 सितंबर, शाम 7:4927 सितंबर, सुबह 6:12 – 27 सितंबर, सुबह 8:35हरि वासर समाप्त: 27 सितंबर, रात 1:06कैलेंडर
11 अक्टूबरसोमवारपापांकुशा एकादशीशुक्ल पक्ष एकादशी10 अक्टूबर, सुबह 11:4111 अक्टूबर, दोपहर 2:0812 अक्टूबर, सुबह 6:20 – 12 अक्टूबर, सुबह 8:38हरि वासर समाप्त: रात 8:40कैलेंडर
25 अक्टूबरसोमवाररमा एकादशीकृष्ण पक्ष एकादशीवैष्णव (अनुमान): 26 अक्टूबर25 अक्टूबर, सुबह 5:4026 अक्टूबर, रात 3:2226 अक्टूबर, दोपहर 1:12 – 26 अक्टूबर, शाम 5:41हरि वासर समाप्त: 26 अक्टूबर, सुबह 8:48कैलेंडर
10 नवंबरबुधवारदेवउठनी एकादशीशुक्ल पक्ष एकादशी9 नवंबर, सुबह 7:3410 नवंबर, सुबह 9:1111 नवंबर, सुबह 6:40 – 11 नवंबर, सुबह 8:50हरि वासर समाप्त: दोपहर 3:26कैलेंडर
24 नवंबरबुधवारउत्पन्ना एकादशीकृष्ण पक्ष एकादशी23 नवंबर, दोपहर 1:4524 नवंबर, दोपहर 12:1125 नवंबर, सुबह 6:51 – 25 नवंबर, सुबह 8:57हरि वासर समाप्त: शाम 5:52कैलेंडर
9 दिसंबरगुरुवारमोक्षदा एकादशीशुक्ल पक्ष एकादशी9 दिसंबर, रात 2:5910 दिसंबर, रात 3:2010 दिसंबर, दोपहर 1:16 – 10 दिसंबर, शाम 5:24हरि वासर समाप्त: 10 दिसंबर, सुबह 9:14कैलेंडर
23 दिसंबरगुरुवारसफला एकादशीकृष्ण पक्ष एकादशी22 दिसंबर, रात 11:4123 दिसंबर, रात 11:1224 दिसंबर, सुबह 7:11 – 24 दिसंबर, सुबह 9:14हरि वासर समाप्त: 24 दिसंबर, सुबह 5:11कैलेंडर

संबंधित त्योहार और सूचियाँ

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

एकादशी व्रत का पारण कब करें?

पारण अगले दिन यानी द्वादशी को सूर्योदय के बाद किया जाता है। ध्यान रखें कि द्वादशी तिथि खत्म होने से पहले ही व्रत खोल लें, क्योंकि द्वादशी बीत जाने के बाद पारण करना ठीक नहीं माना जाता। बहुत से लोग द्वादशी के शुरुआती हिस्से, जिसे हरि वासर कहते हैं, के बीतने का इंतज़ार भी करते हैं। पारण आमतौर पर तुलसी दल, पानी या फल से शुरू करके फिर सादा भोजन लेकर किया जाता है।

एकादशी व्रत में क्या खा सकते हैं?

एकादशी पर चावल और हर तरह का अनाज नहीं खाया जाता। जो लोग फलाहार रखते हैं वे फल, दूध, दही, मेवे, साबूदाना, कुट्टू या सिंघाड़े का आटा, आलू और शकरकंद ले सकते हैं। साधारण नमक की जगह सेंधा नमक इस्तेमाल होता है। कुछ परिवार प्याज़, लहसुन और दालें भी छोड़ देते हैं। बुज़ुर्ग, गर्भवती महिलाएं या जिनकी तबीयत ठीक न हो, वे अक्सर हल्का फलाहार व्रत रखते हैं।

एकादशी पर चावल क्यों नहीं खाते?

परंपरा में एकादशी के दिन चावल खाना वर्जित माना गया है और यह नियम लगभग हर क्षेत्र में माना जाता है। पुराणों की कथाओं में इसे अनाज से दूरी और मन को सात्विक रखने से जोड़ा गया है। इसी वजह से कई घरों में एकादशी के दिन चावल पकाए ही नहीं जाते, भले ही घर के सभी लोग व्रत न रख रहे हों। अगले दिन पारण के बाद चावल फिर से खाए जा सकते हैं।

स्मार्त और वैष्णव एकादशी में क्या अंतर है?

जब एकादशी तिथि दो दिनों में बंटी हो, तभी यह अंतर दिखता है। स्मार्त परंपरा में व्रत उस दिन होता है जिस दिन सूर्योदय पर एकादशी हो। वैष्णव और इस्कॉन परंपरा में यह भी देखा जाता है कि सूर्योदय से पहले के समय पर दशमी का असर न हो; अगर हो, तो व्रत अगले दिन रखा जाता है। हमारी सूची स्मार्त नियम पर बनी है, इसलिए वैष्णव परिवार अपने संप्रदाय का कैलेंडर भी देख लें।

साल में कितनी एकादशी होती हैं?

आम तौर पर एक साल में चौबीस एकादशी आती हैं, यानी हर महीने दो। जिस साल अधिक मास पड़ता है, जिसे पुरुषोत्तम मास भी कहते हैं, उस साल दो एकादशी और जुड़ जाती हैं और कुल गिनती छब्बीस हो जाती है। अधिक मास की एकादशियों के नाम पद्मिनी और परमा हैं। सबसे कठिन व्रत निर्जला एकादशी का माना जाता है, जिसमें दिन भर पानी भी नहीं पिया जाता।

विदेश में एकादशी व्रत किस दिन रखें?

एकादशी का दिन सूर्योदय पर निर्भर करता है, और सूर्योदय हर जगह अलग समय पर होता है। इसलिए अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा या ऑस्ट्रेलिया में व्रत का दिन भारत से एक दिन आगे या पीछे हो सकता है। हमारी तालिका दिल्ली के समय पर बनी है। विदेश में रहने वाले परिवार अपने शहर के सूर्योदय के हिसाब से बना पंचांग देखें या अपने पास के मंदिर से पूछ लें।

संबंधित टूल्स