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प्रदोष व्रत 2027: पूरी सूची, तारीख़ और समय

सीधा जवाब

2027 में कुल 25 प्रदोष व्रत हैं (दिल्ली समय)। अगली प्रदोष व्रत भौम प्रदोष है, जो मंगलवार, 5 जनवरी 2027 को है (63 दिन बाद)।

मुख्य बातें

  • 2027 में 25 प्रदोष व्रत, 12 महीनों में फैली हुई।
  • शुभकाल पर प्रदोष व्रत उस दिन दिखाया जाता है जिस दिन त्रयोदशी तिथि, यानी तेरहवीं तिथि, प्रदोष काल में मौजूद हो। प्रदोष काल सूर्यास्त के ठीक बाद का शाम का समय है। यह नियम शुक्ल और कृष्ण दोनों पक्षों पर लागू होता है। हर प्रदोष का नाम वार से पड़ता है, जैसे सोम प्रदोष, भौम प्रदोष और शनि प्रदोष।
  • हर पंक्ति में तिथि के शुरू और ख़त्म होने का समय दिल्ली के हिसाब से है; विदेश में तारीख़ बदल सकती है।
  • हर तारीख़ को एक टैप में Google कैलेंडर में जोड़ सकते हैं।

प्रदोष व्रत भगवान शिव का व्रत है, जो हर महीने दो बार, दोनों पक्षों की त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है। माना जाता है कि सूर्यास्त के ठीक बाद का समय, जिसे प्रदोष काल कहते हैं, शिव पूजा के लिए सबसे अच्छा होता है। इसी समय लोग शिवलिंग पर जल, दूध और बेलपत्र चढ़ाते हैं, दीया जलाते हैं और प्रदोष की कथा सुनते हैं। हर प्रदोष का नाम उस दिन के वार से पड़ता है और हर वार के प्रदोष का अपना अलग महत्व बताया गया है। लोग यह सूची इसलिए देखते हैं ताकि व्रत का दिन पहले से जान सकें और शाम की पूजा की तैयारी कर सकें। तालिका में हर प्रदोष का दिन, उसका नाम और दिल्ली के समय के अनुसार जानकारी दी गई है।

प्रदोष व्रत 2027 की तारीख़ें

तारीख़व्रत / तिथितिथि शुरूतिथि ख़त्मकैलेंडर
5 जनवरीमंगलवारभौम प्रदोषकृष्ण पक्ष त्रयोदशी4 जनवरी, शाम 6:165 जनवरी, रात 8:39कैलेंडर
20 जनवरीबुधवारबुध प्रदोषशुक्ल पक्ष त्रयोदशी20 जनवरी, सुबह 4:4121 जनवरी, रात 1:11कैलेंडर
3 फ़रवरीबुधवारबुध प्रदोषकृष्ण पक्ष त्रयोदशी3 फ़रवरी, दोपहर 1:504 फ़रवरी, शाम 4:31कैलेंडर
18 फ़रवरीगुरुवारगुरु प्रदोषशुक्ल पक्ष त्रयोदशी18 फ़रवरी, दोपहर 2:2819 फ़रवरी, सुबह 11:14कैलेंडर
5 मार्चशुक्रवारशुक्र प्रदोषकृष्ण पक्ष त्रयोदशी5 मार्च, सुबह 9:546 मार्च, दोपहर 12:03कैलेंडर
20 मार्चशनिवारशनि प्रदोषशुक्ल पक्ष त्रयोदशी19 मार्च, रात 11:1720 मार्च, रात 8:45कैलेंडर
4 अप्रैलरविवाररवि प्रदोषकृष्ण पक्ष त्रयोदशी4 अप्रैल, सुबह 4:265 अप्रैल, सुबह 5:23कैलेंडर
18 अप्रैलरविवाररवि प्रदोषशुक्ल पक्ष त्रयोदशी18 अप्रैल, सुबह 7:4219 अप्रैल, सुबह 6:08कैलेंडर
3 मईसोमवारसोम प्रदोषकृष्ण पक्ष त्रयोदशी3 मई, रात 8:044 मई, शाम 7:31कैलेंडर
17 मईसोमवारसोम प्रदोषशुक्ल पक्ष त्रयोदशी17 मई, शाम 4:2818 मई, शाम 4:04कैलेंडर
2 जूनबुधवारबुध प्रदोषकृष्ण पक्ष त्रयोदशी2 जून, सुबह 8:293 जून, सुबह 6:34कैलेंडर
16 जूनबुधवारबुध प्रदोषशुक्ल पक्ष त्रयोदशी16 जून, रात 2:3117 जून, रात 3:20कैलेंडर
1 जुलाईगुरुवारगुरु प्रदोषकृष्ण पक्ष त्रयोदशी1 जुलाई, शाम 6:152 जुलाई, दोपहर 3:23कैलेंडर
15 जुलाईगुरुवारगुरु प्रदोषशुक्ल पक्ष त्रयोदशी15 जुलाई, दोपहर 2:4016 जुलाई, शाम 4:35कैलेंडर
31 जुलाईशनिवारशनि प्रदोषकृष्ण पक्ष त्रयोदशी31 जुलाई, रात 2:1831 जुलाई, रात 10:58कैलेंडर
14 अगस्तशनिवारशनि प्रदोषशुक्ल पक्ष त्रयोदशी14 अगस्त, सुबह 5:2115 अगस्त, सुबह 7:54कैलेंडर
29 अगस्तरविवाररवि प्रदोषकृष्ण पक्ष त्रयोदशी29 अगस्त, सुबह 9:3530 अगस्त, सुबह 6:12कैलेंडर
13 सितंबरसोमवारसोम प्रदोषशुक्ल पक्ष त्रयोदशी12 सितंबर, रात 10:1314 सितंबर, रात 12:40कैलेंडर
27 सितंबरसोमवारसोम प्रदोषकृष्ण पक्ष त्रयोदशी27 सितंबर, शाम 4:5528 सितंबर, दोपहर 1:55कैलेंडर
12 अक्टूबरमंगलवारभौम प्रदोषशुक्ल पक्ष त्रयोदशी12 अक्टूबर, शाम 4:1413 अक्टूबर, शाम 5:48कैलेंडर
27 अक्टूबरबुधवारबुध प्रदोषकृष्ण पक्ष त्रयोदशी27 अक्टूबर, रात 1:0327 अक्टूबर, रात 10:50कैलेंडर
11 नवंबरगुरुवारगुरु प्रदोषशुक्ल पक्ष त्रयोदशी11 नवंबर, सुबह 10:0712 नवंबर, सुबह 10:21कैलेंडर
25 नवंबरगुरुवारगुरु प्रदोषकृष्ण पक्ष त्रयोदशी25 नवंबर, सुबह 10:5126 नवंबर, सुबह 9:48कैलेंडर
11 दिसंबरशनिवारशनि प्रदोषशुक्ल पक्ष त्रयोदशी11 दिसंबर, रात 2:5312 दिसंबर, रात 1:43कैलेंडर
25 दिसंबरशनिवारशनि प्रदोषकृष्ण पक्ष त्रयोदशी24 दिसंबर, रात 11:0825 दिसंबर, रात 11:32कैलेंडर

संबंधित त्योहार और सूचियाँ

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

प्रदोष व्रत की पूजा किस समय करें?

प्रदोष व्रत की मुख्य पूजा प्रदोष काल में होती है, जो सूर्यास्त के ठीक बाद शुरू होने वाला शाम का समय है। इसी वजह से प्रदोष का दिन उस शाम से तय होता है जब त्रयोदशी तिथि मौजूद हो, न कि सुबह से। अपने शहर का सूर्यास्त समय देखकर उसके बाद पूजा शुरू करें। दिन में लोग व्रत रखते हैं और शाम की पूजा के बाद व्रत खोलते हैं।

प्रदोष व्रत में क्या खाएं?

प्रदोष व्रत में ज़्यादातर लोग दिन भर फलाहार करते हैं, यानी फल, दूध, दही, मेवे, साबूदाना या कुट्टू और सिंघाड़े के आटे से बनी चीज़ें खाते हैं। नमक लेना हो तो सेंधा नमक इस्तेमाल करते हैं। कुछ लोग निर्जल व्रत भी रखते हैं। शाम की पूजा के बाद सादा सात्विक भोजन किया जाता है। बुज़ुर्ग, गर्भवती महिलाएं या बीमार लोग अक्सर हल्का व्रत रखते हैं।

सोम प्रदोष और भौम प्रदोष क्या हैं?

जब त्रयोदशी सोमवार को प्रदोष काल में पड़ती है, तो उसे सोम प्रदोष कहते हैं। सोमवार भगवान शिव का दिन है, इसलिए यह प्रदोष बहुत शुभ माना जाता है और मनोकामना पूरी होने से जोड़ा जाता है। मंगलवार को पड़ने वाले प्रदोष को भौम प्रदोष कहते हैं, जिसे परंपरा में कर्ज़ से छुटकारे और अच्छी सेहत की प्रार्थना से जोड़ा जाता है। इसी तरह बाकी वारों के प्रदोष के भी अपने नाम हैं।

शनि प्रदोष व्रत का क्या महत्व है?

शनिवार को पड़ने वाले प्रदोष को शनि प्रदोष कहते हैं। परंपरा में इसे संतान सुख की कामना से जुड़ा माना जाता है, इसलिए बहुत से दंपती यह व्रत रखते हैं। इस दिन भगवान शिव के साथ शनि देव की पूजा भी की जाती है और पीपल के नीचे दीया जलाने का चलन है। शाम को प्रदोष काल में शिवलिंग पर जल और बेलपत्र चढ़ाकर कथा सुनी जाती है।

प्रदोष व्रत की पूजा विधि क्या है?

सुबह स्नान करके व्रत का संकल्प लें। दिन भर फलाहार या अपनी परंपरा के अनुसार व्रत रखें। शाम को सूर्यास्त के बाद फिर से हाथ-पैर धोकर साफ़ कपड़े पहनें। शिवलिंग पर जल, दूध, दही, शहद और बेलपत्र चढ़ाएं, धूप-दीप जलाएं और ओम नमः शिवाय का जाप करें। फिर प्रदोष व्रत की कथा पढ़ें या सुनें, आरती करें और प्रसाद बांटें। इसके बाद व्रत खोला जाता है।

महीने में कितने प्रदोष व्रत होते हैं?

हर चंद्र महीने में दो त्रयोदशी आती हैं, एक शुक्ल पक्ष में और एक कृष्ण पक्ष में, इसलिए महीने में दो प्रदोष व्रत होते हैं और साल में लगभग चौबीस। कई लोग किसी खास इच्छा के लिए तय संख्या में प्रदोष व्रत रखने का संकल्प लेते हैं, जैसे ग्यारह या छब्बीस, और फिर उद्यापन करते हैं। कुछ लोग केवल किसी एक वार वाले प्रदोष ही रखते हैं।

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