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संकष्टी चतुर्थी 2027: पूरी सूची, तारीख़ और समय

सीधा जवाब

2027 में कुल 12 संकष्टी चतुर्थी हैं (दिल्ली समय)। अगली संकष्टी चतुर्थी माघ संकष्टी है, जो सोमवार, 25 जनवरी 2027 को है (83 दिन बाद)।

मुख्य बातें

  • 2027 में 12 संकष्टी चतुर्थी, 12 महीनों में फैली हुई।
  • शुभकाल पर संकष्टी चतुर्थी कृष्ण पक्ष की उस चतुर्थी को दिखाई जाती है जिस दिन चंद्रोदय के समय चतुर्थी तिथि मौजूद हो, क्योंकि यह व्रत चांद देखकर ही खोला जाता है। इसलिए कभी-कभी व्रत का दिन सूर्योदय वाली तिथि से अलग हो सकता है। जब संकष्टी मंगलवार को पड़ती है, तो उसे अंगारकी चतुर्थी कहते हैं।
  • हर पंक्ति में तिथि के शुरू और ख़त्म होने का समय दिल्ली के हिसाब से है; विदेश में तारीख़ बदल सकती है।
  • हर तारीख़ को एक टैप में Google कैलेंडर में जोड़ सकते हैं।

संकष्टी चतुर्थी भगवान गणेश का व्रत है, जो हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को रखा जाता है। संकष्टी का मतलब है संकट से छुटकारा, इसलिए लोग परिवार की खुशहाली और रुकावटें दूर होने की कामना से यह व्रत रखते हैं। दिन भर व्रत रहता है और रात को चांद निकलने पर उसे अर्घ्य देकर, गणेश जी की पूजा करके व्रत खोला जाता है। माघ महीने की संकष्टी को कई जगह सकट चौथ या तिलकुटा चौथ कहते हैं, जिसे माताएं संतान के लिए रखती हैं। लोग यह सूची इसलिए देखते हैं ताकि व्रत का सही दिन जान सकें, क्योंकि इसका दिन चंद्रोदय से तय होता है। तालिका में हर संकष्टी का दिन और दिल्ली के समय से जुड़ी जानकारी दी गई है।

संकष्टी चतुर्थी 2027 की तारीख़ें

तारीख़व्रत / तिथितिथि शुरूतिथि ख़त्मचंद्रोदय (दिल्ली)कैलेंडर
25 जनवरीसोमवारमाघ संकष्टीकृष्ण पक्ष चतुर्थी25 जनवरी, सुबह 8:1026 जनवरी, सुबह 6:00रात 9:16कैलेंडर
24 फ़रवरीबुधवारफाल्गुन संकष्टीकृष्ण पक्ष चतुर्थीचंद्रोदय किसी भी दिन चतुर्थी में नहीं पड़ा, इसलिए सूर्योदय वाला नियम लगाया गया।23 फ़रवरी, रात 9:4924 फ़रवरी, रात 8:40रात 10:03कैलेंडर
25 मार्चगुरुवारचैत्र संकष्टीकृष्ण पक्ष चतुर्थी25 मार्च, दोपहर 12:3826 मार्च, दोपहर 12:43रात 9:49कैलेंडर
24 अप्रैलशनिवारवैशाख संकष्टीकृष्ण पक्ष चतुर्थी24 अप्रैल, सुबह 4:2125 अप्रैल, सुबह 5:42रात 10:32कैलेंडर
23 मईरविवारज्येष्ठ संकष्टीकृष्ण पक्ष चतुर्थी23 मई, रात 8:4224 मई, रात 10:59रात 10:03कैलेंडर
22 जूनमंगलवारआषाढ़ संकष्टी (अंगारकी)कृष्ण पक्ष चतुर्थी22 जून, दोपहर 1:0723 जून, दोपहर 3:42रात 9:57कैलेंडर
22 जुलाईगुरुवारश्रावण संकष्टीकृष्ण पक्ष चतुर्थी22 जुलाई, सुबह 4:4723 जुलाई, सुबह 6:56रात 9:27कैलेंडर
20 अगस्तशुक्रवारभाद्रपद संकष्टीकृष्ण पक्ष चतुर्थी20 अगस्त, शाम 6:5321 अगस्त, रात 8:05रात 8:27कैलेंडर
19 सितंबररविवारआश्विन संकष्टीकृष्ण पक्ष चतुर्थी19 सितंबर, सुबह 7:0920 सितंबर, सुबह 7:08रात 8:08कैलेंडर
18 अक्टूबरसोमवारकार्तिक संकष्टीकृष्ण पक्ष चतुर्थी18 अक्टूबर, शाम 5:5119 अक्टूबर, शाम 4:42शाम 7:35कैलेंडर
17 नवंबरबुधवारमार्गशीर्ष संकष्टीकृष्ण पक्ष चतुर्थी17 नवंबर, रात 3:4218 नवंबर, रात 1:35रात 8:26कैलेंडर
16 दिसंबरगुरुवारपौष संकष्टीकृष्ण पक्ष चतुर्थी16 दिसंबर, दोपहर 1:2117 दिसंबर, सुबह 10:34रात 8:30कैलेंडर

संबंधित त्योहार और सूचियाँ

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

संकष्टी चतुर्थी का व्रत कैसे खोलें?

संकष्टी का व्रत रात को चांद निकलने के बाद खोला जाता है। पहले गणेश जी की पूजा करें, उन्हें दूर्वा, मोदक या लड्डू चढ़ाएं और संकष्टी की कथा सुनें। फिर चांद को जल, दूध और फूल से अर्घ्य दें। इसके बाद प्रसाद लेकर व्रत खोलें। कई घरों में तिल और गुड़ की चीज़ें खाकर व्रत तोड़ने की परंपरा है, खासकर सकट चौथ पर।

संकष्टी चतुर्थी में क्या खा सकते हैं?

दिन में ज़्यादातर लोग फलाहार करते हैं, जैसे फल, दूध, मूंगफली, साबूदाना की खिचड़ी या शकरकंद। कुछ लोग पूरे दिन कुछ नहीं खाते और केवल पानी पीते हैं। चांद को अर्घ्य देने के बाद तिल के लड्डू, मोदक या सादा सात्विक भोजन किया जाता है। बुज़ुर्ग, गर्भवती महिलाएं या जिनकी तबीयत ठीक न हो, वे अक्सर फल और दूध लेकर हल्का व्रत रखते हैं।

अंगारकी संकष्टी चतुर्थी क्या है?

जब संकष्टी चतुर्थी मंगलवार को पड़ती है, तो उसे अंगारकी चतुर्थी कहते हैं। मंगल ग्रह को अंगारक भी कहा जाता है, इसी से यह नाम पड़ा। यह साल में गिनी-चुनी बार ही आती है और बहुत शुभ मानी जाती है। महाराष्ट्र में इसका खास महत्व है और गणेश मंदिरों में इस दिन बहुत भीड़ होती है। व्रत और पूजा की विधि सामान्य संकष्टी जैसी ही रहती है।

संकष्टी और विनायक चतुर्थी में क्या अंतर है?

दोनों व्रत भगवान गणेश के हैं, लेकिन पक्ष अलग है। संकष्टी चतुर्थी कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को आती है, यानी पूर्णिमा के बाद, और इसमें रात को चांद देखकर व्रत खोला जाता है। विनायक चतुर्थी शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को, यानी अमावस्या के बाद, आती है और इसकी पूजा आमतौर पर दोपहर में होती है। भाद्रपद की विनायक चतुर्थी को ही गणेश चतुर्थी का बड़ा त्योहार मनाया जाता है।

संकष्टी पर चांद न दिखे तो क्या करें?

बादल, बारिश या ऊंची इमारतों की वजह से कई बार चांद दिखाई नहीं देता। ऐसे में अपने शहर के चंद्रोदय का समय देख लें और उस समय के बाद चांद की दिशा की ओर मुंह करके अर्घ्य दे दें। परंपरा में यह मान्य माना जाता है। कुछ परिवार थोड़ा इंतज़ार करते हैं कि बादल हट जाएं। अर्घ्य के बाद पूजा पूरी करके व्रत खोल सकते हैं।

संकष्टी चतुर्थी की तारीख अलग-अलग कैलेंडर में अलग क्यों होती है?

संकष्टी का दिन सूर्योदय से नहीं, चंद्रोदय से तय होता है। जिस दिन चांद निकलते समय चतुर्थी तिथि हो, उसी दिन व्रत रखा जाता है। अगर कोई कैलेंडर सिर्फ़ सूर्योदय वाली तिथि देखता है, तो वह एक दिन अलग दिखा सकता है। साथ ही चंद्रोदय हर शहर में अलग समय पर होता है, इसलिए विदेश में या दूर के शहरों में व्रत का दिन बदल सकता है।

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