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धनतेरस 2026 और 2027: तारीख़, मुहूर्त और महत्व

धनतेरस 2026

6 नवंबर 2026

शुक्रवार

3 दिन बाकी

धनतेरस 2027

27 अक्टूबर 2027

बुधवार

358 दिन बाकी

सीधा जवाब

धनतेरस 2026 में शुक्रवार, 6 नवंबर 2026 को है (दिल्ली)। धनतेरस पाँच दिन के दीपोत्सव का पहला दिन है, जब घर-घर भगवान धन्वंतरि, कुबेर और लक्ष्मी की पूजा होती है, नए बर्तन या सोना खरीदा जाता है और यम के नाम दीया जलाया जाता है।

मुख्य बातें

  • 2026: 6 नवंबर 2026, शुक्रवार
  • 2027: 27 अक्टूबर 2027, बुधवार
  • हर साल के हिस्से में लिखा है कि वह तारीख़ किस नियम से निकली और मुहूर्त तिथि के भीतर कैसे काटा गया।
  • सभी समय दिल्ली के हैं; विदेश में तिथि स्थानीय समय से बदलती है, इसलिए तारीख़ एक दिन अलग हो सकती है।

धनतेरस क्या है

धनतेरस का नाम दो शब्दों से बना है, धन और तेरस यानी त्रयोदशी। उत्तर भारत में इसे कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी कहा जाता है, जबकि अमावस्या पर महीना पूरा करने वाले पंचांग में यही तिथि आश्विन कृष्ण त्रयोदशी कहलाती है। तिथि एक ही है, बस महीने का नाम अलग है। इसी दिन से पाँच दिन का दीपोत्सव शुरू होता है।

पौराणिक कथा के अनुसार समुद्र मंथन के समय इसी तिथि को भगवान धन्वंतरि हाथ में अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे, इसलिए इसे धन्वंतरि जयंती भी कहते हैं। एक दूसरी कथा राजा हिम के बेटे की है, जिसकी मृत्यु विवाह की चौथी रात तय थी। उसकी पत्नी ने रात भर दीये जलाए, दरवाजे पर गहनों का ढेर लगाया और कहानियाँ सुनाती रही, जिससे यमराज चकाचौंध होकर लौट गए। इसीलिए इस शाम यम के नाम दीया जलाने की परंपरा है।

धनतेरस कैसे मनाते हैं

सुबह तक घर की सफाई पूरी कर ली जाती है और दरवाजे पर रंगोली और तोरण सजते हैं। दिन में लोग नए बर्तन, चाँदी के सिक्के, सोना या झाड़ू खरीदते हैं। मान्यता है कि इस दिन घर में आई नई धातु पूरे साल बरकत लाती है। कई परिवार खरीदा हुआ बर्तन खाली घर नहीं लाते, उसमें थोड़ा अनाज या मिठाई रखकर लाते हैं।

शाम को धन्वंतरि, कुबेर और लक्ष्मी की पूजा होती है, जिसमें दीया, रोली, अक्षत, फूल और मिठाई चढ़ाई जाती है। फिर घर के बाहर दक्षिण दिशा की ओर मुँह करके आटे का चौमुखा दीया जलाया जाता है, जिसे यम दीपदान कहते हैं। गुजरात और महाराष्ट्र में इसे धनत्रयोदशी कहते हैं और कई व्यापारी अपने बही-खाते की पूजा करते हैं। विदेश में बसे परिवार भी इस दिन चाँदी का सिक्का या नया बर्तन खरीदकर परंपरा निभाते हैं।

धनतेरस 2026: तारीख़ और मुहूर्त (दिल्ली)

शुक्रवार, 6 नवंबर 2026

इस दिन प्रदोष काल (सूर्यास्त के बाद के तीन मुहूर्त) का अधिक हिस्सा कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी में पड़ता है।

तिथि
6 नवंबर, सुबह 10:31 – 7 नवंबर, सुबह 10:48
धनतेरस पूजा (प्रदोष, त्रयोदशी और वृषभ लग्न एक साथ)
शाम 6:03 – शाम 7:58

पूरा काल (तिथि से काटने से पहले): शाम 5:33 – रात 8:10

प्रदोष काल (पूरा)
शाम 5:33 – रात 8:10
वृषभ लग्न (स्थिर लग्न)
शाम 6:03 – शाम 7:58
सूर्योदय / सूर्यास्त
सुबह 6:37 / शाम 5:33
राहु काल (इस दिन)
सुबह 10:43 – दोपहर 12:05

धनतेरस में शाम का समय सबसे अहम है। सूर्यास्त के ठीक बाद का वह समय, जब दिन ढलकर रात में बदलता है, प्रदोष काल कहलाता है। जिस दिन त्रयोदशी तिथि प्रदोष काल में रहती है, उसी दिन धनतेरस मनाई जाती है। लक्ष्मी-कुबेर पूजा और यम दीपदान दोनों इसी समय किए जाते हैं, और कई लोग इसके भीतर स्थिर लग्न भी देखते हैं। खरीदारी दिन भर की जा सकती है, पर पूजा प्रदोष में ही अच्छी मानी जाती है।

धनतेरस 2027: तारीख़ और मुहूर्त (दिल्ली)

बुधवार, 27 अक्टूबर 2027

इस दिन प्रदोष काल (सूर्यास्त के बाद के तीन मुहूर्त) का अधिक हिस्सा कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी में पड़ता है।

तिथि
27 अक्टूबर, रात 1:03 – 27 अक्टूबर, रात 10:50
धनतेरस पूजा (प्रदोष, त्रयोदशी और वृषभ लग्न एक साथ)
शाम 6:43 – रात 8:14

पूरा काल (तिथि से काटने से पहले): शाम 5:40 – रात 8:14

प्रदोष काल (पूरा)
शाम 5:40 – रात 8:14
वृषभ लग्न (स्थिर लग्न)
शाम 6:43 – रात 8:39
सूर्योदय / सूर्यास्त
सुबह 6:29 / शाम 5:40
राहु काल (इस दिन)
दोपहर 12:05 – दोपहर 1:29

धनतेरस की शुभकामनाएँ

धनतेरस के दीयों की रोशनी आपके घर में सेहत, सुख और बरकत लेकर आए। धन्वंतरि जी का आशीर्वाद और लक्ष्मी जी की कृपा सदा बनी रहे। शुभ धनतेरस!
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

धनतेरस पर क्या खरीदना शुभ होता है?

धनतेरस पर पीतल, तांबे या स्टील के नए बर्तन, चाँदी के सिक्के, सोने के गहने और झाड़ू खरीदना शुभ माना जाता है। कई परिवार साबुत धनिया भी खरीदते हैं और पूजा के बाद उसे गमले में बो देते हैं। मान्यता है कि अपनी सामर्थ्य के अनुसार छोटी-सी चीज भी श्रद्धा से खरीदी जाए तो वह उतनी ही शुभ होती है।

धनतेरस पर यम दीपदान कैसे करें?

शाम को प्रदोष काल में आटे का चौमुखा दीया बनाकर उसमें सरसों का तेल और चार बत्तियाँ डालें। घर के मुख्य द्वार के बाहर दक्षिण दिशा की ओर मुँह करके दीया रखें और यमराज से परिवार की लंबी उम्र की प्रार्थना करें। कई घरों में दीया रखने के बाद उसे पलटकर नहीं देखा जाता। यह परंपरा अकाल मृत्यु के डर को दूर करने से जुड़ी है।

धनतेरस की पूजा किस समय करनी चाहिए?

धनतेरस की मुख्य पूजा शाम को सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में की जाती है। इसी समय त्रयोदशी तिथि का होना सबसे अच्छा माना जाता है और पंचांग इसी आधार पर दिन तय करता है। प्रदोष काल का समय आपके शहर के सूर्यास्त के हिसाब से बदलता है, इसलिए अपने शहर का पंचांग देखकर ही पूजा करें।

धनतेरस और धन्वंतरि जयंती में क्या संबंध है?

दोनों एक ही दिन मनाए जाते हैं। कथा है कि समुद्र मंथन से भगवान धन्वंतरि इसी त्रयोदशी को अमृत कलश लेकर निकले थे। वे देवताओं के वैद्य और आयुर्वेद के देवता माने जाते हैं। इसलिए इस दिन धन के साथ अच्छी सेहत की कामना से भी उनकी पूजा होती है, और आयुर्वेद से जुड़े बहुत से लोग इस दिन उनकी विशेष आराधना करते हैं।

धनतेरस पर झाड़ू क्यों खरीदी जाती है?

लोक मान्यता में झाड़ू को लक्ष्मी का रूप माना जाता है, क्योंकि वह घर से गंदगी और दरिद्रता को बाहर करती है। इसलिए धनतेरस पर नई झाड़ू खरीदना सस्ता पर शुभ उपाय माना जाता है। कई घरों में नई झाड़ू पर हल्दी-रोली लगाकर उसकी पूजा भी होती है। यह रिवाज हर जगह नहीं है, पर उत्तर और पश्चिम भारत में काफी प्रचलित है।

धनतेरस पर क्या नहीं करना चाहिए?

कई परिवार मानते हैं कि धनतेरस पर किसी को उधार देना, लोहे या धारदार चीजें खरीदना और शाम के समय घर में अंधेरा रखना ठीक नहीं है। कुछ लोग खाली बर्तन घर नहीं लाते। ये मान्यताएँ इलाके और परिवार के हिसाब से अलग-अलग हैं, इसलिए किसी एक सूची के बजाय अपने घर के बड़ों की परंपरा का पालन करना सबसे अच्छा है।

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