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प्रदोष व्रत 2026: पूरी सूची, तारीख़ और समय

सीधा जवाब

2026 में कुल 25 प्रदोष व्रत हैं (दिल्ली समय)। अगली प्रदोष व्रत शुक्र प्रदोष है, जो शुक्रवार, 6 नवंबर 2026 को है (3 दिन बाद)।

मुख्य बातें

  • 2026 में 25 प्रदोष व्रत, 12 महीनों में फैली हुई।
  • शुभकाल पर प्रदोष व्रत उस दिन दिखाया जाता है जिस दिन त्रयोदशी तिथि, यानी तेरहवीं तिथि, प्रदोष काल में मौजूद हो। प्रदोष काल सूर्यास्त के ठीक बाद का शाम का समय है। यह नियम शुक्ल और कृष्ण दोनों पक्षों पर लागू होता है। हर प्रदोष का नाम वार से पड़ता है, जैसे सोम प्रदोष, भौम प्रदोष और शनि प्रदोष।
  • हर पंक्ति में तिथि के शुरू और ख़त्म होने का समय दिल्ली के हिसाब से है; विदेश में तारीख़ बदल सकती है।
  • हर तारीख़ को एक टैप में Google कैलेंडर में जोड़ सकते हैं।

प्रदोष व्रत भगवान शिव का व्रत है, जो हर महीने दो बार, दोनों पक्षों की त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है। माना जाता है कि सूर्यास्त के ठीक बाद का समय, जिसे प्रदोष काल कहते हैं, शिव पूजा के लिए सबसे अच्छा होता है। इसी समय लोग शिवलिंग पर जल, दूध और बेलपत्र चढ़ाते हैं, दीया जलाते हैं और प्रदोष की कथा सुनते हैं। हर प्रदोष का नाम उस दिन के वार से पड़ता है और हर वार के प्रदोष का अपना अलग महत्व बताया गया है। लोग यह सूची इसलिए देखते हैं ताकि व्रत का दिन पहले से जान सकें और शाम की पूजा की तैयारी कर सकें। तालिका में हर प्रदोष का दिन, उसका नाम और दिल्ली के समय के अनुसार जानकारी दी गई है।

प्रदोष व्रत 2026 की तारीख़ें

तारीख़व्रत / तिथितिथि शुरूतिथि ख़त्मकैलेंडर
1 जनवरीगुरुवारगुरु प्रदोषशुक्ल पक्ष त्रयोदशी1 जनवरी, रात 1:481 जनवरी, रात 10:22कैलेंडर
16 जनवरीशुक्रवारशुक्र प्रदोषकृष्ण पक्ष त्रयोदशी15 जनवरी, रात 8:1616 जनवरी, रात 10:22कैलेंडर
30 जनवरीशुक्रवारशुक्र प्रदोषशुक्ल पक्ष त्रयोदशी30 जनवरी, सुबह 11:0931 जनवरी, सुबह 8:26कैलेंडर
14 फ़रवरीशनिवारशनि प्रदोषकृष्ण पक्ष त्रयोदशी14 फ़रवरी, शाम 4:0215 फ़रवरी, शाम 5:05कैलेंडर
1 मार्चरविवाररवि प्रदोषशुक्ल पक्ष त्रयोदशी28 फ़रवरी, रात 8:431 मार्च, शाम 7:09कैलेंडर
16 मार्चसोमवारसोम प्रदोषकृष्ण पक्ष त्रयोदशी16 मार्च, सुबह 9:4117 मार्च, सुबह 9:23कैलेंडर
30 मार्चसोमवारसोम प्रदोषशुक्ल पक्ष त्रयोदशी30 मार्च, सुबह 7:1031 मार्च, सुबह 6:56कैलेंडर
15 अप्रैलबुधवारबुध प्रदोषकृष्ण पक्ष त्रयोदशी15 अप्रैल, रात 12:1215 अप्रैल, रात 10:31कैलेंडर
28 अप्रैलमंगलवारभौम प्रदोषशुक्ल पक्ष त्रयोदशी28 अप्रैल, शाम 6:5229 अप्रैल, शाम 7:52कैलेंडर
14 मईगुरुवारगुरु प्रदोषकृष्ण पक्ष त्रयोदशी14 मई, सुबह 11:2015 मई, सुबह 8:31कैलेंडर
28 मईगुरुवारगुरु प्रदोषशुक्ल पक्ष त्रयोदशी28 मई, सुबह 7:5729 मई, सुबह 9:51कैलेंडर
12 जूनशुक्रवारशुक्र प्रदोषकृष्ण पक्ष त्रयोदशी12 जून, शाम 7:3713 जून, शाम 4:08कैलेंडर
27 जूनशनिवारशनि प्रदोषशुक्ल पक्ष त्रयोदशी26 जून, रात 10:2228 जून, रात 12:43कैलेंडर
12 जुलाईरविवाररवि प्रदोषकृष्ण पक्ष त्रयोदशी12 जुलाई, रात 2:0412 जुलाई, रात 10:30कैलेंडर
26 जुलाईरविवाररवि प्रदोषशुक्ल पक्ष त्रयोदशी26 जुलाई, दोपहर 1:5827 जुलाई, शाम 4:15कैलेंडर
10 अगस्तसोमवारसोम प्रदोषकृष्ण पक्ष त्रयोदशी10 अगस्त, सुबह 8:0111 अगस्त, सुबह 4:54कैलेंडर
25 अगस्तमंगलवारभौम प्रदोषशुक्ल पक्ष त्रयोदशी25 अगस्त, सुबह 6:2126 अगस्त, सुबह 7:59कैलेंडर
8 सितंबरमंगलवारभौम प्रदोषकृष्ण पक्ष त्रयोदशी8 सितंबर, दोपहर 2:439 सितंबर, दोपहर 12:31कैलेंडर
24 सितंबरगुरुवारगुरु प्रदोषशुक्ल पक्ष त्रयोदशी23 सितंबर, रात 10:5024 सितंबर, रात 11:18कैलेंडर
8 अक्टूबरगुरुवारगुरु प्रदोषकृष्ण पक्ष त्रयोदशी7 अक्टूबर, रात 11:168 अक्टूबर, रात 10:16कैलेंडर
23 अक्टूबरशुक्रवारशुक्र प्रदोषशुक्ल पक्ष त्रयोदशी23 अक्टूबर, दोपहर 2:3624 अक्टूबर, दोपहर 1:37कैलेंडर
6 नवंबरशुक्रवारशुक्र प्रदोषकृष्ण पक्ष त्रयोदशी6 नवंबर, सुबह 10:317 नवंबर, सुबह 10:48कैलेंडर
22 नवंबररविवाररवि प्रदोषशुक्ल पक्ष त्रयोदशी22 नवंबर, सुबह 4:5623 नवंबर, रात 2:37कैलेंडर
6 दिसंबररविवाररवि प्रदोषकृष्ण पक्ष त्रयोदशी6 दिसंबर, रात 12:527 दिसंबर, रात 2:22कैलेंडर
21 दिसंबरसोमवारसोम प्रदोषशुक्ल पक्ष त्रयोदशी21 दिसंबर, शाम 5:3622 दिसंबर, दोपहर 2:24कैलेंडर

संबंधित त्योहार और सूचियाँ

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

प्रदोष व्रत की पूजा किस समय करें?

प्रदोष व्रत की मुख्य पूजा प्रदोष काल में होती है, जो सूर्यास्त के ठीक बाद शुरू होने वाला शाम का समय है। इसी वजह से प्रदोष का दिन उस शाम से तय होता है जब त्रयोदशी तिथि मौजूद हो, न कि सुबह से। अपने शहर का सूर्यास्त समय देखकर उसके बाद पूजा शुरू करें। दिन में लोग व्रत रखते हैं और शाम की पूजा के बाद व्रत खोलते हैं।

प्रदोष व्रत में क्या खाएं?

प्रदोष व्रत में ज़्यादातर लोग दिन भर फलाहार करते हैं, यानी फल, दूध, दही, मेवे, साबूदाना या कुट्टू और सिंघाड़े के आटे से बनी चीज़ें खाते हैं। नमक लेना हो तो सेंधा नमक इस्तेमाल करते हैं। कुछ लोग निर्जल व्रत भी रखते हैं। शाम की पूजा के बाद सादा सात्विक भोजन किया जाता है। बुज़ुर्ग, गर्भवती महिलाएं या बीमार लोग अक्सर हल्का व्रत रखते हैं।

सोम प्रदोष और भौम प्रदोष क्या हैं?

जब त्रयोदशी सोमवार को प्रदोष काल में पड़ती है, तो उसे सोम प्रदोष कहते हैं। सोमवार भगवान शिव का दिन है, इसलिए यह प्रदोष बहुत शुभ माना जाता है और मनोकामना पूरी होने से जोड़ा जाता है। मंगलवार को पड़ने वाले प्रदोष को भौम प्रदोष कहते हैं, जिसे परंपरा में कर्ज़ से छुटकारे और अच्छी सेहत की प्रार्थना से जोड़ा जाता है। इसी तरह बाकी वारों के प्रदोष के भी अपने नाम हैं।

शनि प्रदोष व्रत का क्या महत्व है?

शनिवार को पड़ने वाले प्रदोष को शनि प्रदोष कहते हैं। परंपरा में इसे संतान सुख की कामना से जुड़ा माना जाता है, इसलिए बहुत से दंपती यह व्रत रखते हैं। इस दिन भगवान शिव के साथ शनि देव की पूजा भी की जाती है और पीपल के नीचे दीया जलाने का चलन है। शाम को प्रदोष काल में शिवलिंग पर जल और बेलपत्र चढ़ाकर कथा सुनी जाती है।

प्रदोष व्रत की पूजा विधि क्या है?

सुबह स्नान करके व्रत का संकल्प लें। दिन भर फलाहार या अपनी परंपरा के अनुसार व्रत रखें। शाम को सूर्यास्त के बाद फिर से हाथ-पैर धोकर साफ़ कपड़े पहनें। शिवलिंग पर जल, दूध, दही, शहद और बेलपत्र चढ़ाएं, धूप-दीप जलाएं और ओम नमः शिवाय का जाप करें। फिर प्रदोष व्रत की कथा पढ़ें या सुनें, आरती करें और प्रसाद बांटें। इसके बाद व्रत खोला जाता है।

महीने में कितने प्रदोष व्रत होते हैं?

हर चंद्र महीने में दो त्रयोदशी आती हैं, एक शुक्ल पक्ष में और एक कृष्ण पक्ष में, इसलिए महीने में दो प्रदोष व्रत होते हैं और साल में लगभग चौबीस। कई लोग किसी खास इच्छा के लिए तय संख्या में प्रदोष व्रत रखने का संकल्प लेते हैं, जैसे ग्यारह या छब्बीस, और फिर उद्यापन करते हैं। कुछ लोग केवल किसी एक वार वाले प्रदोष ही रखते हैं।

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