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गणेश चतुर्थी 2026 और 2027: तारीख़, मुहूर्त और महत्व

गणेश चतुर्थी 2026

14 सितंबर 2026

सोमवार

बीत गया

गणेश चतुर्थी 2027

4 सितंबर 2027

शनिवार

305 दिन बाकी

सीधा जवाब

गणेश चतुर्थी 2027 में शनिवार, 4 सितंबर 2027 को है (दिल्ली)। गणेश चतुर्थी गणपति के जन्म का उत्सव है, जिसमें घरों और पंडालों में उनकी मूर्ति स्थापित कर पूजा होती है और अनंत चतुर्दशी तक चलने वाले उत्सव के बाद विसर्जन होता है।

मुख्य बातें

  • 2026: 14 सितंबर 2026, सोमवार
  • 2027: 4 सितंबर 2027, शनिवार
  • हर साल के हिस्से में लिखा है कि वह तारीख़ किस नियम से निकली और मुहूर्त तिथि के भीतर कैसे काटा गया।
  • सभी समय दिल्ली के हैं; विदेश में तिथि स्थानीय समय से बदलती है, इसलिए तारीख़ एक दिन अलग हो सकती है।

गणेश चतुर्थी क्या है

भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को भगवान गणेश का जन्मदिन माना जाता है। कथा है कि माता पार्वती ने स्नान से पहले अपने उबटन से एक बालक बनाया और उसे द्वार पर पहरा देने को कहा। भगवान शिव को भीतर जाने से रोकने पर दोनों में युद्ध हुआ और बालक का सिर कट गया। पार्वती का दुख देखकर शिव ने उसे हाथी का सिर लगाकर फिर से जीवन दिया और सभी देवताओं में सबसे पहले पूजे जाने का वरदान दिया।

इसीलिए हर शुभ काम की शुरुआत 'श्री गणेश' से होती है। गणपति विघ्नहर्ता हैं, यानी रुकावटें दूर करने वाले, और बुद्धि के देवता हैं। लोकमान्य तिलक ने आज़ादी की लड़ाई के दिनों में इस घरेलू त्योहार को सार्वजनिक उत्सव का रूप दिया, ताकि लोग एक साथ जुड़ सकें। तब से महाराष्ट्र में यह सबसे बड़ा त्योहार माना जाता है।

गणेश चतुर्थी कैसे मनाते हैं

त्योहार से पहले घर साफ़ करके गणपति के लिए छोटा मंडप सजाया जाता है। चतुर्थी के दिन दोपहर में मूर्ति स्थापना होती है और प्राण प्रतिष्ठा के बाद विधि से पूजा की जाती है। गणपति को दूर्वा घास, लाल फूल, लड्डू और खासतौर पर मोदक बहुत प्रिय हैं। सुबह-शाम आरती होती है और 'सुखकर्ता दुखहर्ता' जैसी आरतियाँ घर-घर गूँजती हैं।

कुछ परिवार डेढ़ दिन, कुछ तीन, पाँच या सात दिन बाद गणपति का विसर्जन करते हैं, जबकि सार्वजनिक पंडालों में उत्सव अनंत चतुर्दशी तक चलता है। मुंबई और पुणे के पंडाल दुनिया भर में मशहूर हैं। गोवा, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में भी यह त्योहार बड़े स्तर पर होता है। अब बहुत से लोग मिट्टी की मूर्ति लाकर घर पर ही बाल्टी में विसर्जन करते हैं। विदेश में मंदिर और भारतीय संगठन मिलकर शोभायात्रा और सामूहिक भोज करते हैं।

गणेश चतुर्थी 2026: तारीख़ और मुहूर्त (दिल्ली)

सोमवार, 14 सितंबर 2026

इस दिन मध्याह्न (दिन का बीच का पाँचवाँ भाग) का अधिक हिस्सा शुक्ल पक्ष की चतुर्थी में पड़ता है।

तिथि
14 सितंबर, सुबह 7:07 – 15 सितंबर, सुबह 7:44
मध्याह्न गणेश पूजा (चतुर्थी तिथि के भीतर)
सुबह 11:02 – दोपहर 1:30

पूरा काल (तिथि से काटने से पहले): सुबह 11:02 – दोपहर 1:31

मध्याह्न का क्षण
दोपहर 12:17
सूर्योदय / सूर्यास्त
सुबह 6:06 / शाम 6:28
राहु काल (इस दिन)
सुबह 7:38 – सुबह 9:11

गणेश चतुर्थी पर मध्याह्न काल सबसे महत्वपूर्ण होता है, यानी दिन का बीच वाला हिस्सा, क्योंकि मान्यता है कि गणेश जी का जन्म इसी समय हुआ था। इसलिए त्योहार उस दिन मनाया जाता है जब चतुर्थी तिथि मध्याह्न में हो, और मूर्ति स्थापना व पूजा भी इसी समय करना उत्तम माना जाता है। इस रात चाँद देखना वर्जित है। इसे कलंक चतुर्थी कहते हैं, क्योंकि कथा के अनुसार इस रात चाँद देखने से झूठा कलंक लगता है।

गणेश चतुर्थी 2027: तारीख़ और मुहूर्त (दिल्ली)

शनिवार, 4 सितंबर 2027

इस दिन मध्याह्न (दिन का बीच का पाँचवाँ भाग) का अधिक हिस्सा शुक्ल पक्ष की चतुर्थी में पड़ता है।

तिथि
3 सितंबर, दोपहर 2:19 – 4 सितंबर, दोपहर 12:26
मध्याह्न गणेश पूजा (चतुर्थी तिथि के भीतर)
सुबह 11:04 – दोपहर 12:26

पूरा काल (तिथि से काटने से पहले): सुबह 11:04 – दोपहर 1:36

मध्याह्न का क्षण
दोपहर 12:20
सूर्योदय / सूर्यास्त
सुबह 6:01 / शाम 6:40
राहु काल (इस दिन)
सुबह 9:10 – सुबह 10:45

गणेश चतुर्थी की शुभकामनाएँ

विघ्नहर्ता आपके हर काम की रुकावट दूर करें और घर में सुख, समृद्धि और मोदक जैसी मिठास भर दें। गणेश चतुर्थी की शुभकामनाएँ।
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

गणेश चतुर्थी पर चाँद क्यों नहीं देखना चाहिए?

कथा है कि एक बार गणेश जी के बड़े पेट और चूहे की सवारी पर चंद्रमा हँस पड़ा, तो गणेश जी ने उसे श्राप दिया कि इस दिन जो उसे देखेगा उस पर झूठा आरोप लगेगा। मान्यता है कि श्रीकृष्ण पर भी स्यमंतक मणि की चोरी का झूठा आरोप इसी कारण लगा था। इसलिए भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी की रात चाँद देखने से बचा जाता है।

अगर गलती से गणेश चतुर्थी का चाँद देख लिया तो क्या करें?

घबराने की ज़रूरत नहीं है। परंपरा में इसका आसान उपाय बताया गया है। श्रीकृष्ण और स्यमंतक मणि की कथा सुनना या पढ़ना दोष दूर करने वाला माना जाता है, क्योंकि उसमें कृष्ण अपना कलंक मिटाते हैं। कई लोग इसी कथा से जुड़ा एक छोटा संस्कृत मंत्र भी पढ़ते हैं। इसके बाद गणेश जी से क्षमा माँगकर पूजा करें। भाव सच्चा हो तो डरने की बात नहीं।

घर पर गणपति स्थापना कैसे करें?

पहले पूजा की जगह साफ़ करके चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएँ। मध्याह्न के समय गणपति की मूर्ति रखें, पास में कलश स्थापित करें और संकल्प लें। फिर जल, फूल, दूर्वा, चंदन, अक्षत, धूप-दीप और मोदक या लड्डू अर्पित करें। आरती के बाद प्रसाद बाँटें। जितने दिन गणपति घर में रहें, रोज़ सुबह-शाम पूजा और भोग ज़रूर लगाएँ।

गणपति को कितने दिन घर में रखना चाहिए?

यह पूरी तरह परिवार की परंपरा पर निर्भर है। कई घरों में डेढ़ दिन बाद ही विसर्जन हो जाता है। कुछ परिवार तीन, पाँच या सात दिन बाद विदाई देते हैं, और कुछ पूरे उत्सव भर रखकर अनंत चतुर्दशी पर विसर्जन करते हैं। दिन कोई भी हो, ज़रूरी यह है कि गणपति के रहने तक रोज़ पूजा और भोग में कमी न हो और विदाई आरती के साथ हो।

गणेश जी को मोदक क्यों चढ़ाए जाते हैं?

मोदक को गणेश जी का सबसे प्रिय भोग माना जाता है। एक कथा के अनुसार देवताओं ने माता पार्वती को अमृत से बना मोदक दिया था, जो उन्होंने गणेश जी को दिया। महाराष्ट्र में चावल के आटे, नारियल और गुड़ से बने भाप वाले उकडीचे मोदक बनते हैं, जबकि दूसरी जगह तले हुए या खोये के मोदक चढ़ाए जाते हैं। अक्सर इक्कीस मोदक का भोग लगता है।

पर्यावरण का ध्यान रखते हुए गणेश विसर्जन कैसे करें?

शाडू मिट्टी या साधारण मिट्टी से बनी और प्राकृतिक रंगों वाली मूर्ति चुनें, क्योंकि प्लास्टर ऑफ़ पेरिस पानी में आसानी से नहीं घुलता और नदियों-तालाबों को नुकसान पहुँचाता है। घर पर बड़ी बाल्टी या टब में विसर्जन करके वह पानी और मिट्टी गमलों में डाल सकते हैं। कई शहरों में कृत्रिम तालाब भी बनाए जाते हैं। फूल-माला अलग करके खाद में डालें।

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