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अक्षय तृतीया 2026 और 2027: तारीख़, मुहूर्त और महत्व

अक्षय तृतीया 2026

19 अप्रैल 2026

रविवार

बीत गया

अक्षय तृतीया 2027

9 मई 2027

रविवार

187 दिन बाकी

सीधा जवाब

अक्षय तृतीया 2027 में रविवार, 9 मई 2027 को है (दिल्ली)। अक्षय तृतीया वैशाख शुक्ल तृतीया का अबूझ शुभ दिन है, जब दान, पूजा, सोना ख़रीदना और नए काम की शुरुआत कभी न घटने वाला फल देने वाली मानी जाती है।

मुख्य बातें

  • 2026: 19 अप्रैल 2026, रविवार
  • 2027: 9 मई 2027, रविवार
  • हर साल के हिस्से में लिखा है कि वह तारीख़ किस नियम से निकली और मुहूर्त तिथि के भीतर कैसे काटा गया।
  • सभी समय दिल्ली के हैं; विदेश में तिथि स्थानीय समय से बदलती है, इसलिए तारीख़ एक दिन अलग हो सकती है।

अक्षय तृतीया क्या है

अक्षय तृतीया वैशाख महीने के शुक्ल पक्ष की तीसरी तिथि को आती है। अक्षय का अर्थ है जो कभी नष्ट न हो। मान्यता है कि इस दिन किया गया दान, जप, पूजा और अच्छा काम कभी व्यर्थ नहीं जाता और उसका फल बढ़ता ही रहता है। राजस्थान और गुजरात में इसे आखा तीज कहा जाता है। इसे अबूझ मुहूर्त माना जाता है, यानी इस दिन शुभ काम के लिए अलग से मुहूर्त देखने की ज़रूरत नहीं समझी जाती।

इस दिन से कई कथाएं जुड़ी हैं। माना जाता है कि इसी दिन भगवान परशुराम का जन्म हुआ, इसी दिन से त्रेता युग शुरू हुआ और इसी दिन गंगा धरती पर आईं। एक कथा के अनुसार श्रीकृष्ण ने वनवास के समय पांडवों को अक्षय पात्र दिया था, जिसका भोजन कभी खत्म नहीं होता था। चारधाम यात्रा में गंगोत्री और यमुनोत्री के कपाट आम तौर पर इसी समय खुलते हैं।

अक्षय तृतीया कैसे मनाते हैं

सुबह स्नान के बाद भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है। उन्हें चंदन, तुलसी, पीले फूल और जौ या सत्तू, भीगी चने की दाल, ककड़ी और मौसमी फलों का भोग लगाया जाता है। गर्मी का मौसम होने के कारण पानी से भरा घड़ा, पंखा, छाता, चप्पल, सत्तू और फल दान करने की खास परंपरा है। बहुत से लोग प्याऊ लगवाते हैं या राहगीरों को शरबत पिलाते हैं।

इस दिन सोना या चांदी ख़रीदना बहुत शुभ माना जाता है, इसलिए गहनों की दुकानों पर भीड़ रहती है। लोग नई दुकान, गृह प्रवेश, सगाई और शादी के लिए भी यही दिन चुनते हैं; राजस्थान और मध्य प्रदेश में आखा तीज पर बहुत शादियां होती हैं। ओडिशा में इसी दिन से जगन्नाथ रथ यात्रा के रथ बनने शुरू होते हैं और किसान बुवाई की शुरुआत करते हैं। विदेश में बसे परिवार भी थोड़ा सोना ख़रीदते हैं या मंदिर में दान करते हैं।

अक्षय तृतीया 2026: तारीख़ और मुहूर्त (दिल्ली)

रविवार, 19 अप्रैल 2026

अगले दिन सूर्योदय के बाद शुक्ल पक्ष की तृतीया तीन मुहूर्त से कम रहती है, इसलिए यह दिन लिया गया, जब शुक्ल पक्ष की तृतीया पूर्वाह्न में शुरू हुई।

तिथि
19 अप्रैल, सुबह 10:49 – 20 अप्रैल, सुबह 7:27
पूजा मुहूर्त (पूर्वाह्न में तृतीया तिथि)
सुबह 10:50 – दोपहर 12:20

पूरा काल (तिथि से काटने से पहले): सुबह 5:52 – दोपहर 12:21

सूर्योदय / सूर्यास्त
सुबह 5:52 / शाम 6:49
राहु काल (इस दिन)
शाम 5:12 – शाम 6:49

अक्षय तृतीया के लिए वह दिन लिया जाता है जब सूर्योदय के समय तृतीया तिथि हो, लेकिन शर्त यह है कि तृतीया सूर्योदय के बाद कम से कम तीन मुहूर्त तक बनी रहे। अगर ऐसा न हो, तो पिछला दिन अक्षय तृतीया माना जाता है। पूजा के लिए दिन का पहला भाग, यानी पूर्वाह्न, सबसे अच्छा माना गया है। पूरा दिन अबूझ होने के कारण सोना किसी भी समय ख़रीदा जा सकता है, हालांकि बहुत से लोग तृतीया रहते हुए ख़रीदारी पसंद करते हैं। दिल्ली के लिए तिथि और पूजा का समय मुहूर्त वाले हिस्से में दिया गया है।

अक्षय तृतीया 2027: तारीख़ और मुहूर्त (दिल्ली)

रविवार, 9 मई 2027

शुक्ल पक्ष की तृतीया इस दिन सूर्योदय पर है और उसके बाद कम से कम तीन मुहूर्त तक रहती है।

तिथि
8 मई, सुबह 11:43 – 9 मई, सुबह 9:03
पूजा मुहूर्त (पूर्वाह्न में तृतीया तिथि)
सुबह 5:35 – सुबह 9:03

पूरा काल (तिथि से काटने से पहले): सुबह 5:35 – दोपहर 12:18

सूर्योदय / सूर्यास्त
सुबह 5:35 / शाम 7:01
राहु काल (इस दिन)
शाम 5:20 – शाम 7:01

अक्षय तृतीया की शुभकामनाएँ

अक्षय तृतीया का यह शुभ दिन आपके घर ऐसी खुशियां लाए जो कभी कम न हों। मां लक्ष्मी की कृपा सदा बनी रहे। अक्षय तृतीया की हार्दिक शुभकामनाएं!
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संबंधित त्योहार और सूचियाँ

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

अक्षय तृतीया पर सोना क्यों ख़रीदा जाता है?

अक्षय का मतलब है जो कभी घटे नहीं। माना जाता है कि इस दिन घर में लाया गया सोना या चांदी समृद्धि को स्थायी बनाता है और माता लक्ष्मी का आशीर्वाद देता है। इसलिए लोग थोड़ा ही सही, पर इस दिन सोना या चांदी ख़रीदते हैं। जिनके लिए सोना ख़रीदना संभव न हो, वे जौ, पीतल का बर्तन या कोई छोटी शुभ चीज़ ख़रीदकर भी परंपरा निभाते हैं।

अक्षय तृतीया को अबूझ मुहूर्त क्यों कहते हैं?

अबूझ मुहूर्त का मतलब है ऐसा दिन जिसके लिए किसी से पूछने या पंचांग जांचने की ज़रूरत न हो। माना जाता है कि इस दिन सूर्य और चंद्रमा दोनों अपनी उच्च राशि में होते हैं, इसलिए पूरा दिन अपने आप शुभ रहता है। इसी कारण शादी, सगाई, गृह प्रवेश या नया काम शुरू करने के लिए अलग से मुहूर्त नहीं देखा जाता। फिर भी कई परिवार पंडित जी से सलाह लेना पसंद करते हैं।

अक्षय तृतीया पर क्या दान करना चाहिए?

यह त्योहार गर्मी में आता है, इसलिए ठंडक और राहत देने वाली चीज़ों का दान सबसे अच्छा माना जाता है। पानी से भरा मिट्टी का घड़ा, छाता, पंखा, चप्पल, सत्तू, गुड़, ककड़ी, खरबूज़ और अनाज दान किए जाते हैं। ज़रूरतमंदों को भोजन कराना और राहगीरों के लिए पानी की व्यवस्था करना भी बड़ा पुण्य माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन का दान अक्षय फल देता है।

अक्षय तृतीया की पूजा घर पर कैसे करें?

सुबह स्नान करके घर के मंदिर में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की तस्वीर के सामने दीपक जलाएं। चंदन, अक्षत, पीले फूल और तुलसी चढ़ाएं, और जौ या सत्तू, भीगी चने की दाल और मौसमी फलों का भोग लगाएं। विष्णु सहस्रनाम या लक्ष्मी जी की आरती पढ़ें। अगर आपने सोना ख़रीदा है, तो उसे पहले पूजा में रखें और फिर इस्तेमाल करें।

अगर तृतीया तिथि दो दिन पड़े तो अक्षय तृतीया कब मनाएं?

कई बार तृतीया तिथि एक दिन सूर्योदय के बाद शुरू होकर अगले दिन सूर्योदय के कुछ देर बाद तक रहती है। ऐसे में देखा जाता है कि दूसरे दिन सूर्योदय के बाद तृतीया कम से कम तीन मुहूर्त तक रहती है या नहीं। अगर रहती है, तो दूसरा दिन लिया जाता है, नहीं तो पहला दिन। यह गणना स्थानीय सूर्योदय के अनुसार होती है; इस पेज की तारीख़ दिल्ली के सूर्योदय से निकाली गई है।

अक्षय तृतीया पर परशुराम जयंती भी क्यों मनाई जाती है?

मान्यता है कि भगवान विष्णु के छठे अवतार परशुराम का जन्म वैशाख शुक्ल तृतीया को हुआ था। इसलिए कई जगह अक्षय तृतीया के साथ परशुराम जयंती भी मनाई जाती है, शोभायात्राएं निकलती हैं और विशेष पूजा होती है। कुछ पंचांगों में परशुराम जयंती एक दिन पहले भी पड़ सकती है, क्योंकि उनके जन्म को शाम के प्रदोष काल से जोड़ा जाता है।

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