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होली 2026 और 2027: तारीख़, मुहूर्त और महत्व

होली 2026

4 मार्च 2026

बुधवार

बीत गया

होली 2027

23 मार्च 2027

मंगलवार

140 दिन बाकी

सीधा जवाब

होली 2027 में मंगलवार, 23 मार्च 2027 को है (दिल्ली)। दूसरी परंपरा में 22 मार्च 2027। होली रंगों का त्योहार है: फाल्गुन पूर्णिमा की शाम होलिका दहन होता है और अगले दिन लोग गुलाल लगाकर, गले मिलकर और गुजिया खाकर बुराई पर अच्छाई की जीत मनाते हैं।

मुख्य बातें

  • 2026: 4 मार्च 2026, बुधवार
  • 2027: 23 मार्च 2027, मंगलवार
  • हर साल के हिस्से में लिखा है कि वह तारीख़ किस नियम से निकली और मुहूर्त तिथि के भीतर कैसे काटा गया।
  • सभी समय दिल्ली के हैं; विदेश में तिथि स्थानीय समय से बदलती है, इसलिए तारीख़ एक दिन अलग हो सकती है।

होली क्या है

होली असल में दो दिन का त्योहार है। पहले दिन, फाल्गुन पूर्णिमा की शाम को होलिका दहन होता है, और अगले दिन रंगों वाली होली खेली जाती है, जिसे धुलेंडी भी कहते हैं। उत्तर भारत के पूर्णिमांत पंचांग में यह दूसरा दिन चैत्र कृष्ण प्रतिपदा होता है। यह त्योहार सर्दी के जाने, गेहूं की फसल पकने और वसंत की मस्ती का प्रतीक है।

होलिका दहन की कथा भक्त प्रह्लाद से जुड़ी है। राक्षस राजा हिरण्यकशिपु अपने बेटे प्रह्लाद की विष्णु भक्ति से नाराज़ था। उसकी बहन होलिका, जिसे आग से न जलने का वरदान था, प्रह्लाद को गोद में लेकर आग में बैठ गई, पर होलिका जल गई और प्रह्लाद बच गए। रंगों की होली राधा और कृष्ण के प्रेम भरे खेल से जुड़ी है। इसलिए होली बुराई पर अच्छाई की जीत और आपसी प्रेम का त्योहार है।

होली कैसे मनाते हैं

होलिका दहन से कई दिन पहले मोहल्ले में लकड़ियां और उपले इकट्ठे किए जाते हैं। शाम को महिलाएं होलिका की पूजा करती हैं, रोली, अक्षत, फूल, कच्चा सूत और नारियल चढ़ाती हैं और परिक्रमा करती हैं। आग जलने पर लोग गेहूं की बालियां और हरे चने भूनकर बांटते हैं। अगली सुबह रंग, गुलाल और पिचकारियों का दौर शुरू होता है, और दोपहर बाद लोग नहा-धोकर एक-दूसरे के घर मिलने जाते हैं।

घरों में गुजिया, मालपुआ, दही-बड़े, नमकीन और ठंडाई बनती है। ब्रज में होली कई दिनों तक चलती है और बरसाना की लट्ठमार होली दूर-दूर तक मशहूर है। पंजाब में सिख समुदाय होला मोहल्ला मनाता है, बंगाल में दोल जात्रा और गोवा में शिगमो। विदेश में बसे भारतीय पार्कों और मंदिरों में रंगोत्सव रखते हैं, जिनमें पड़ोसी भी शामिल होते हैं। सूखे और प्राकृतिक रंगों का चलन अब तेज़ी से बढ़ रहा है।

होली 2026: तारीख़ और मुहूर्त (दिल्ली)

बुधवार, 4 मार्च 2026

कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा इस दिन सूर्योदय के समय मौजूद है (उदया तिथि)।

रंगवाली होली की मुख्य तारीख़: जिस दिन सूर्योदय पर चैत्र कृष्ण प्रतिपदा हो। 2027 में यही केंद्र सरकार की छुट्टी (DoPT) है।

होलिका दहन के अगले दिन वाली परंपरा (drikpanchang): मंगलवार, 3 मार्च 2026।

तिथि
3 मार्च, शाम 5:07 – 4 मार्च, शाम 4:49
होलिका दहन की तारीख़
सोमवार, 2 मार्च 2026
होलिका दहन मुहूर्त
2 मार्च, शाम 6:22 – 2 मार्च, रात 8:50

नियम 6: भद्रा मध्यरात्रि के बाद तक है और भद्रा पूँछ प्रदोष से मध्यरात्रि के बीच नहीं पड़ती, इसलिए प्रदोष काल में (भद्रा मुख छोड़कर)।

पूरा काल (तिथि से काटने से पहले): 2 मार्च, शाम 6:22 – 2 मार्च, रात 8:50

वैकल्पिक मुहूर्त (भद्रा के बाद, सूर्योदय से पहले)
3 मार्च, सुबह 5:29 – 3 मार्च, सुबह 6:44
भद्रा
2 मार्च, शाम 5:56 – 3 मार्च, सुबह 5:29
भद्रा पूँछ
3 मार्च, रात 1:26 – 3 मार्च, रात 2:35
भद्रा मुख (इसमें कभी नहीं)
3 मार्च, रात 2:35 – 3 मार्च, सुबह 4:31
सूर्योदय / सूर्यास्त
सुबह 6:43 / शाम 6:23
राहु काल (इस दिन)
दोपहर 12:33 – दोपहर 2:01

होली के दो दिनों में समय का ध्यान अलग तरह से रखा जाता है। होलिका दहन फाल्गुन पूर्णिमा की शाम, प्रदोष काल में, यानी सूर्यास्त के बाद के समय में किया जाता है। इसमें भद्रा से बचना ज़रूरी माना गया है, क्योंकि भद्रा के समय दहन अशुभ समझा जाता है। अगर प्रदोष काल में भद्रा हो, तो भद्रा खत्म होने के बाद या शास्त्रों में बताए गए विकल्प के अनुसार दहन किया जाता है। रंगों वाली होली अगले दिन, दिन के समय खेली जाती है। दिल्ली के लिए होलिका दहन का समय, भद्रा के समय के साथ, मुहूर्त वाले हिस्से में दिया गया है।

होली 2027: तारीख़ और मुहूर्त (दिल्ली)

मंगलवार, 23 मार्च 2027

कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा इस दिन सूर्योदय के समय मौजूद है (उदया तिथि)।

रंगवाली होली की मुख्य तारीख़: जिस दिन सूर्योदय पर चैत्र कृष्ण प्रतिपदा हो। 2027 में यही केंद्र सरकार की छुट्टी (DoPT) है।

होलिका दहन के अगले दिन वाली परंपरा (drikpanchang): सोमवार, 22 मार्च 2027।

केंद्र सरकार की छुट्टी (दिल्ली/नई दिल्ली, DoPT): होली, मंगलवार 23 मार्च 2027।

तिथि
22 मार्च, शाम 4:13 – 23 मार्च, दोपहर 2:28
होलिका दहन की तारीख़
रविवार, 21 मार्च 2027
होलिका दहन मुहूर्त
21 मार्च, शाम 6:33 – 21 मार्च, रात 8:54

नियम 6: भद्रा मध्यरात्रि के बाद तक है और भद्रा पूँछ प्रदोष से मध्यरात्रि के बीच नहीं पड़ती, इसलिए प्रदोष काल में (भद्रा मुख छोड़कर)।

पूरा काल (तिथि से काटने से पहले): 21 मार्च, शाम 6:33 – 21 मार्च, रात 8:55

वैकल्पिक मुहूर्त (भद्रा के बाद, सूर्योदय से पहले)
22 मार्च, सुबह 5:15 – 22 मार्च, सुबह 6:23
भद्रा
21 मार्च, शाम 6:22 – 22 मार्च, सुबह 5:15
भद्रा पूँछ
22 मार्च, रात 1:27 – 22 मार्च, रात 2:32
भद्रा मुख (इसमें कभी नहीं)
22 मार्च, रात 2:32 – 22 मार्च, सुबह 4:21
सूर्योदय / सूर्यास्त
सुबह 6:22 / शाम 6:34
राहु काल (इस दिन)
दोपहर 3:31 – शाम 5:02

होली की शुभकामनाएँ

रंगों की तरह आपकी ज़िंदगी भी खुशियों से भरी रहे, गुजिया की मिठास हर रिश्ते में घुल जाए। होली की ढेर सारी शुभकामनाएं!
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संबंधित त्योहार और सूचियाँ

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

होली पर रंग किस दिन खेला जाता है?

रंगों वाली होली होलिका दहन के अगले दिन खेली जाती है। पहले दिन फाल्गुन पूर्णिमा की शाम को होलिका जलाई जाती है, और दूसरे दिन, जिसे धुलेंडी कहते हैं, सुबह से रंग-गुलाल लगाया जाता है। ब्रज में होली कई दिन पहले से शुरू हो जाती है, जबकि महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में कुछ दिन बाद रंगपंचमी पर भी रंग खेला जाता है। इस साल और अगले साल की तारीख़ इस पेज में सबसे ऊपर दी गई है (दिल्ली के अनुसार)।

होलिका दहन होली से एक रात पहले क्यों किया जाता है?

होलिका दहन प्रह्लाद की रक्षा और होलिका के अंत की याद में किया जाता है, इसलिए पहले बुराई को जलाया जाता है और फिर अगले दिन खुशी मनाई जाती है। यह फाल्गुन पूर्णिमा की शाम को होता है, जो उत्तर भारत के पंचांग में साल का आखिरी महीना है। आग में नई फसल की बालियां भूनकर बांटी जाती हैं, और अगली सुबह रंगों के साथ नई शुरुआत होती है।

होलिका दहन में भद्रा का ध्यान क्यों रखा जाता है?

पंचांग में भद्रा एक ऐसा समय माना जाता है जिसमें शुभ काम शुरू करना ठीक नहीं समझा जाता। होलिका दहन के लिए शास्त्रों में साफ़ कहा गया है कि यह भद्रा रहित प्रदोष काल में हो। अगर भद्रा देर रात तक रहे, तो कुछ परंपराओं में भद्रा के आखिरी हिस्से, जिसे भद्रा पूंछ कहते हैं, में दहन करने की छूट बताई गई है। इस पेज के मुहूर्त वाले हिस्से में दिल्ली के समय दिए गए हैं; दूसरे शहर में ये कुछ मिनट बदल जाते हैं।

होलिका दहन की पूजा कैसे करें?

शाम को होलिका के पास जाकर जल, रोली, अक्षत, फूल, गुड़, हल्दी, साबुत मूंग और नारियल चढ़ाएं। कच्चे सूत को होलिका के चारों ओर तीन या सात बार लपेटते हुए परिक्रमा करें। दहन के बाद आग में गेहूं की बालियां और हरे चने भूनें और प्रसाद की तरह बांटें। बहुत से लोग होलिका की थोड़ी राख घर लाते हैं और उसे शुभ मानते हैं।

होली पर कौन से पकवान बनाए जाते हैं?

होली का नाम आते ही गुजिया याद आती है, जिसमें खोया और मेवे भरे जाते हैं। इसके साथ मालपुआ, दही-बड़े, कांजी, पापड़, मठरी और ठंडाई ज़्यादातर घरों में बनती है। बिहार में पुआ, बंगाल में दोल पर संदेश और महाराष्ट्र में पूरन पोली खास तौर पर बनाई जाती है। हर इलाके की अपनी थाली है, पर मिल-बांटकर खाना ही होली की असली पहचान है।

होली सुरक्षित तरीके से कैसे खेलें?

सूखा गुलाल या फूलों और हल्दी जैसे प्राकृतिक रंग चुनें, और पक्के रासायनिक रंगों से बचें। खेलने से पहले बालों और त्वचा पर थोड़ा तेल लगा लें, ताकि रंग आसानी से छूट जाए। किसी पर ज़बरदस्ती रंग न डालें, जानवरों को रंग न लगाएं और पानी की बर्बादी कम करें। बुज़ुर्गों और छोटे बच्चों का खास ध्यान रखें। होली सबकी खुशी का त्योहार है।

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