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पूर्णिमा 2026: पूरी सूची, तारीख़ और समय

सीधा जवाब

2026 में कुल 13 पूर्णिमा हैं (दिल्ली समय)। अगली पूर्णिमा कार्तिक पूर्णिमा है, जो मंगलवार, 24 नवंबर 2026 को है (21 दिन बाद)।

मुख्य बातें

  • 2026 में 13 पूर्णिमा, 12 महीनों में फैली हुई।
  • पूर्णिमा उस दिन दिखाई जाती है जिस दिन सूर्योदय के समय पूर्णिमा तिथि हो। अगर पूर्णिमा किसी सूर्योदय को न छुए, तो जिस दिन वह शुरू होती है, उस दिन; ऐसी पंक्ति पर यह अलग से लिखा है। कुछ परिवार पूर्णिमा का उपवास पिछली शाम रखते हैं, जब पूर्णिमा चंद्रोदय से पहले शुरू हो जाए, इसलिए हर पंक्ति में तिथि के शुरू और ख़त्म होने का समय भी दिया गया है।
  • हर पंक्ति में तिथि के शुरू और ख़त्म होने का समय दिल्ली के हिसाब से है; विदेश में तारीख़ बदल सकती है।
  • हर तारीख़ को एक टैप में Google कैलेंडर में जोड़ सकते हैं।

पूर्णिमा वह तिथि है जब आसमान में चांद पूरा दिखाई देता है। हर महीने की पूर्णिमा का अपना महत्व है: किसी पर गुरु पूर्णिमा मनाई जाती है, किसी पर रक्षाबंधन, तो किसी पर शरद पूर्णिमा की खीर या कार्तिक पूर्णिमा का स्नान होता है। बहुत से घरों में इस दिन सत्यनारायण की कथा होती है, पूर्णिमा का व्रत रखा जाता है और नदी में स्नान व दान किया जाता है। लोग यह सूची इसलिए देखते हैं ताकि कथा, व्रत या तीर्थ यात्रा की योजना पहले से बना सकें। तालिका में हर पूर्णिमा के लिए दिल्ली के समय के अनुसार तिथि शुरू होने और खत्म होने का समय दिया गया है। इससे आप देख सकते हैं कि पूर्णिमा शाम को लग रही है या अगली सुबह तक रहेगी, और अपनी परंपरा के अनुसार दिन तय कर सकते हैं।

पूर्णिमा 2026 की तारीख़ें

तारीख़व्रत / तिथितिथि शुरूतिथि ख़त्मकैलेंडर
3 जनवरीशनिवारपौष पूर्णिमाशुक्ल पक्ष पूर्णिमा2 जनवरी, शाम 6:533 जनवरी, दोपहर 3:32कैलेंडर
1 फ़रवरीरविवारमाघ पूर्णिमाशुक्ल पक्ष पूर्णिमा1 फ़रवरी, सुबह 5:532 फ़रवरी, रात 3:39कैलेंडर
3 मार्चमंगलवारफाल्गुन पूर्णिमाशुक्ल पक्ष पूर्णिमा2 मार्च, शाम 5:563 मार्च, शाम 5:07कैलेंडर
2 अप्रैलगुरुवारचैत्र पूर्णिमाशुक्ल पक्ष पूर्णिमा1 अप्रैल, सुबह 7:062 अप्रैल, सुबह 7:41कैलेंडर
1 मईशुक्रवारवैशाख पूर्णिमाशुक्ल पक्ष पूर्णिमा30 अप्रैल, रात 9:121 मई, रात 10:53कैलेंडर
31 मईरविवारअधिक ज्येष्ठ पूर्णिमाशुक्ल पक्ष पूर्णिमा30 मई, सुबह 11:5831 मई, दोपहर 2:15कैलेंडर
29 जूनसोमवारज्येष्ठ पूर्णिमाशुक्ल पक्ष पूर्णिमा29 जून, रात 3:0630 जून, सुबह 5:26कैलेंडर
29 जुलाईबुधवारआषाढ़ पूर्णिमाशुक्ल पक्ष पूर्णिमा28 जुलाई, शाम 6:1929 जुलाई, रात 8:05कैलेंडर
28 अगस्तशुक्रवारश्रावण पूर्णिमाशुक्ल पक्ष पूर्णिमा27 अगस्त, सुबह 9:0928 अगस्त, सुबह 9:48कैलेंडर
26 सितंबरशनिवारभाद्रपद पूर्णिमाशुक्ल पक्ष पूर्णिमा25 सितंबर, रात 11:0726 सितंबर, रात 10:18कैलेंडर
26 अक्टूबरसोमवारआश्विन पूर्णिमाशुक्ल पक्ष पूर्णिमा25 अक्टूबर, सुबह 11:5626 अक्टूबर, सुबह 9:41कैलेंडर
24 नवंबरमंगलवारकार्तिक पूर्णिमाशुक्ल पक्ष पूर्णिमा23 नवंबर, रात 11:4224 नवंबर, रात 8:23कैलेंडर
23 दिसंबरबुधवारमार्गशीर्ष पूर्णिमाशुक्ल पक्ष पूर्णिमापूर्णिमा किसी भी सूर्योदय को नहीं छूती (क्षय तिथि), इसलिए जिस दिन शुरू होती है, उसी दिन रखी गई है। इस दिन सूर्योदय पर पिछली तिथि थी।23 दिसंबर, सुबह 10:4724 दिसंबर, सुबह 6:58कैलेंडर

संबंधित त्योहार और सूचियाँ

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

पूर्णिमा का व्रत किस दिन रखें?

ज़्यादातर पंचांग पूर्णिमा उसी दिन मानते हैं जिस दिन सूर्योदय के समय पूर्णिमा तिथि हो, और हमारी सूची भी यही दिखाती है। लेकिन व्रत में चांद का दिखना अहम होता है, इसलिए अगर पूर्णिमा तिथि पिछले दिन चंद्रोदय से पहले लग जाए तो कई परिवार व्रत उसी शाम रख लेते हैं। तालिका में दिए गए शुरू और खत्म होने के समय देखकर अपने घर की परंपरा के हिसाब से दिन चुनें।

पूर्णिमा व्रत में क्या खाना चाहिए?

पूर्णिमा के व्रत में ज़्यादातर लोग दिन में फलाहार करते हैं, जैसे फल, दूध, दही, मेवे, साबूदाना या सिंघाड़े के आटे की चीज़ें। शाम को चांद को अर्घ्य देने और पूजा के बाद कई परिवार सादा सात्विक भोजन करते हैं, जबकि कुछ लोग अगली सुबह तक व्रत रखते हैं। बुज़ुर्ग, गर्भवती महिलाएं या जिनकी तबीयत ठीक न हो, वे अक्सर दूध और फल लेकर हल्का व्रत रखते हैं।

पूर्णिमा पर सत्यनारायण कथा कब करें?

सत्यनारायण की कथा पूर्णिमा के दिन किसी भी समय की जा सकती है, लेकिन बहुत से घरों में इसे शाम के समय करने का चलन है, जब चांद निकलने वाला हो। कथा के लिए वह दिन चुनें जिस दिन पूर्णिमा तिथि मौजूद हो। अगर तिथि दो दिनों में बंटी है तो तालिका में शुरू और खत्म होने का समय देखें और अपने पंडित जी से सलाह लेकर दिन तय करें।

पूर्णिमा पर स्नान और दान का क्या महत्व है?

पूर्णिमा पर गंगा या किसी पवित्र नदी में स्नान करना बहुत शुभ माना जाता है, खासकर माघ, वैशाख और कार्तिक की पूर्णिमा पर। स्नान के बाद अनाज, कपड़े, गुड़, तिल या अपनी सामर्थ्य के अनुसार कुछ भी दान करने की परंपरा है। जो लोग नदी तक नहीं जा सकते, वे घर पर नहाने के पानी में थोड़ा गंगाजल मिलाकर स्नान करते हैं और फिर दान करते हैं।

पूर्णिमा का व्रत और स्नान अलग-अलग दिन क्यों पड़ते हैं?

ऐसा तब होता है जब पूर्णिमा तिथि एक दिन दोपहर या शाम को शुरू होकर अगले दिन सुबह तक चलती है। व्रत में चांद को अर्घ्य देना ज़रूरी होता है, इसलिए व्रत उस शाम रखा जाता है जब पूर्णिमा में चांद निकले। स्नान और दान सुबह किए जाते हैं, इसलिए वे उस दिन होते हैं जब सूर्योदय पर पूर्णिमा हो। तालिका का समय देखकर दोनों दिन आसानी से समझ सकते हैं।

पूर्णिमा पर चंद्रमा को अर्घ्य कैसे दें?

चांद निकलने के बाद एक लोटे में साफ़ पानी लें और उसमें थोड़ा दूध, चावल के कुछ दाने और फूल मिला लें। चांद की ओर मुंह करके धीरे-धीरे पानी की धार गिराएं और मन में अपनी प्रार्थना कहें। कई घरों में इसके बाद दीपक जलाकर आरती की जाती है। बादल हों तो चांद की दिशा की ओर अर्घ्य दे दिया जाता है, यह भी परंपरा में मान्य है।

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