वसंत पंचमी 2026 और 2027: तारीख़, मुहूर्त और महत्व
सीधा जवाब
वसंत पंचमी 2027 में गुरुवार, 11 फ़रवरी 2027 को है (दिल्ली)। वसंत पंचमी माघ शुक्ल पंचमी को मनाया जाने वाला त्योहार है, जिसमें विद्या और कला की देवी सरस्वती की पूजा होती है और वसंत ऋतु का स्वागत पीले रंग से किया जाता है।
मुख्य बातें
- 2026: 23 जनवरी 2026, शुक्रवार
- 2027: 11 फ़रवरी 2027, गुरुवार
- हर साल के हिस्से में लिखा है कि वह तारीख़ किस नियम से निकली और मुहूर्त तिथि के भीतर कैसे काटा गया।
- सभी समय दिल्ली के हैं; विदेश में तिथि स्थानीय समय से बदलती है, इसलिए तारीख़ एक दिन अलग हो सकती है।
वसंत पंचमी क्या है
वसंत पंचमी माघ महीने के शुक्ल पक्ष की पंचमी को आती है और इसे वसंत ऋतु के आने का संदेश माना जाता है। सर्दी कम होने लगती है, खेतों में सरसों के पीले फूल लहराते हैं और पेड़ों पर नई कोंपलें आती हैं। इसी कारण इस दिन पीले रंग का खास महत्व है। कई जगह इस दिन को श्री पंचमी भी कहा जाता है।
मान्यता है कि इसी दिन देवी सरस्वती प्रकट हुई थीं, जिन्होंने संसार को वाणी, विद्या और संगीत दिया। इसलिए विद्यार्थी, शिक्षक, लेखक, संगीतकार और कलाकार इस दिन को अपने लिए बहुत खास मानते हैं। कई परिवार इसी दिन छोटे बच्चों को पहली बार अक्षर लिखना सिखाते हैं, जिसे अक्षर आरंभ या विद्यारंभ कहते हैं। कुछ परंपराओं में इसे कामदेव और रति की पूजा से भी जोड़ा जाता है, क्योंकि वसंत को प्रेम और उल्लास का मौसम माना गया है।
वसंत पंचमी कैसे मनाते हैं
सुबह स्नान करके लोग पीले या हल्के रंग के कपड़े पहनते हैं। घर या स्कूल में देवी सरस्वती की तस्वीर या मूर्ति को पीले कपड़े पर रखा जाता है। पूजा में पीले फूल, हल्दी, अक्षत, मिठाई और केसर वाले मीठे चावल या खीर चढ़ाई जाती है। बच्चे अपनी किताबें, कलम और वाद्य यंत्र देवी के सामने रखते हैं। सरस्वती वंदना गाई जाती है, आरती होती है और प्रसाद बांटा जाता है।
बंगाल, ओडिशा, असम और बिहार में सरस्वती पूजा बहुत धूमधाम से होती है; स्कूलों और कॉलेजों में पंडाल सजते हैं और अगले दिन मूर्ति विसर्जन होता है। बंगाल में बहुत से लोग पूजा से पहले बेर नहीं खाते। पंजाब और हरियाणा में पीली पगड़ी, पीले पकवान और पतंगबाज़ी का रिवाज़ है। विदेश में बसे परिवार मंदिरों में सामूहिक सरस्वती पूजा और बच्चों के लिए विद्यारंभ की रस्म रखते हैं।
वसंत पंचमी 2026: तारीख़ और मुहूर्त (दिल्ली)
शुक्रवार, 23 जनवरी 2026
शुक्ल पक्ष की पंचमी इस दिन सूर्योदय के समय मौजूद है (उदया तिथि)।
- तिथि
- 23 जनवरी, रात 2:28 – 24 जनवरी, रात 1:46
- सरस्वती पूजा (पूर्वाह्न में पंचमी तिथि)
- सुबह 7:13 – दोपहर 12:33
- सूर्योदय / सूर्यास्त
- सुबह 7:13 / शाम 5:53
- राहु काल (इस दिन)
- सुबह 11:13 – दोपहर 12:33
पूरा काल (तिथि से काटने से पहले): सुबह 7:13 – दोपहर 12:33
वसंत पंचमी के लिए वह दिन चुना जाता है जब सूर्योदय के समय पंचमी तिथि हो। सरस्वती पूजा के लिए दिन का पहला भाग, यानी पूर्वाह्न, सबसे अच्छा माना जाता है, क्योंकि यह समय मन के शांत और ताज़ा रहने का होता है और पढ़ाई-लिखाई की शुरुआत के लिए शुभ माना गया है। कई लोग इस पूरे दिन को अबूझ मुहूर्त मानते हैं, यानी किसी शुभ काम के लिए अलग से मुहूर्त निकालने की ज़रूरत नहीं पड़ती। इस पेज के मुहूर्त वाले हिस्से में दिल्ली के समय दिए गए हैं; दूसरे शहर में ये कुछ मिनट बदल जाते हैं।
वसंत पंचमी 2027: तारीख़ और मुहूर्त (दिल्ली)
गुरुवार, 11 फ़रवरी 2027
शुक्ल पक्ष की पंचमी इस दिन सूर्योदय के समय मौजूद है (उदया तिथि)।
- तिथि
- 11 फ़रवरी, रात 3:04 – 12 फ़रवरी, रात 3:18
- सरस्वती पूजा (पूर्वाह्न में पंचमी तिथि)
- सुबह 7:03 – दोपहर 12:35
- सूर्योदय / सूर्यास्त
- सुबह 7:03 / शाम 6:08
- राहु काल (इस दिन)
- दोपहर 1:59 – दोपहर 3:22
पूरा काल (तिथि से काटने से पहले): सुबह 7:03 – दोपहर 12:36
वसंत पंचमी की शुभकामनाएँ
मां सरस्वती आपके घर में ज्ञान का दीप जलाए रखें, वसंत की पीली धूप हर मन में नई उमंग भर दे। वसंत पंचमी की ढेरों शुभकामनाएं!यह संदेश WhatsApp पर भेजें
और शुभकामना संदेश जल्द इसी जगह जोड़े जाएँगे।
संबंधित त्योहार और सूचियाँ
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
वसंत पंचमी पर पीले कपड़े क्यों पहनते हैं?
इस समय खेतों में सरसों फूलती है और पूरी धरती पीली दिखाई देती है, इसलिए पीला रंग वसंत की पहचान बन गया है। पीले रंग को उत्साह, रोशनी और शुभता का रंग भी माना जाता है, और देवी सरस्वती को पीले फूल और पीले पकवान प्रिय बताए गए हैं। इसी वजह से लोग पीले कपड़े पहनते हैं और केसरिया चावल, बूंदी या हलवा जैसे पीले पकवान बनाते हैं।
सरस्वती पूजा घर पर कैसे करें?
सुबह स्नान के बाद एक साफ़ चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर देवी सरस्वती की तस्वीर या मूर्ति रखें। दीपक जलाएं, हल्दी-कुमकुम, अक्षत, पीले फूल और मिठाई चढ़ाएं। बच्चों की किताबें, कलम और वाद्य यंत्र पास में रखें। सरस्वती वंदना या कोई सरल मंत्र पढ़ें, आरती करें और प्रसाद बांटें। पूजा का भाव ही सबसे अहम है, सामग्री कम हो तो भी चिंता न करें।
क्या वसंत पंचमी पर बच्चों का विद्यारंभ करना शुभ है?
हां, बहुत से परिवार इसी दिन छोटे बच्चों को पहली बार अक्षर लिखवाते हैं। आम तौर पर घर का कोई बड़ा बच्चे की उंगली पकड़कर थाली में फैले चावल पर ॐ या पहला अक्षर लिखवाता है। इसे अक्षर आरंभ या विद्यारंभ कहते हैं। माना जाता है कि सरस्वती के दिन शुरू की गई पढ़ाई में मन लगता है। दक्षिण भारत में यही रस्म ज़्यादातर नवरात्र की विजयादशमी पर की जाती है।
वसंत पंचमी पर क्या दान करें और क्या खाएं?
इस दिन किताबें, कॉपी, कलम या पढ़ाई का दूसरा सामान ज़रूरतमंद बच्चों को देना अच्छा माना जाता है। पीले कपड़े, अनाज या मिठाई का दान भी किया जाता है। खाने में केसर वाले मीठे चावल, खीर, बेसन के लड्डू, खिचड़ी और मौसमी बेर बनते और बंटते हैं। बंगाल में बहुत से लोग सरस्वती पूजा से पहले बेर नहीं खाते और देवी को चढ़ाने के बाद ही खाते हैं।
क्या वसंत पंचमी को शादी या गृह प्रवेश के लिए शुभ माना जाता है?
बहुत से लोग वसंत पंचमी को अबूझ मुहूर्त मानते हैं, यानी इस दिन शुभ काम के लिए अलग से मुहूर्त देखने की ज़रूरत नहीं समझी जाती। इसलिए उत्तर भारत में इस दिन बड़ी संख्या में शादियां, सगाई, गृह प्रवेश और नए काम की शुरुआत होती है। फिर भी कई परिवार अपनी परंपरा और पंडित जी की सलाह से ही दिन तय करते हैं, जो पूरी तरह ठीक है।
सरस्वती पूजा के दिन पढ़ाई क्यों नहीं करते?
बंगाल, ओडिशा और कुछ और जगहों पर पूजा के दिन किताबें और कलम देवी के चरणों में रख दी जाती हैं, इसलिए उस दिन पढ़ाई नहीं की जाती। अगले दिन छोटी पूजा के बाद किताबें वापस ली जाती हैं और फिर से पढ़ाई शुरू होती है। इसे ज्ञान के प्रति आदर का तरीका माना जाता है। कई दूसरे इलाकों में यह नियम नहीं है और बच्चे पूजा के बाद थोड़ा पढ़ते भी हैं।