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हिंदू कैलेंडर फ़रवरी 2027

माघ – फाल्गुन · दिल्ली, सूर्योदय की तिथि

सीधा जवाब

फ़रवरी 2027 में माघ – फाल्गुन मास है। इस महीने 2 एकादशी, 1 पूर्णिमा, 1 अमावस्या और 1 बड़े त्योहार हैं।

  1. 1कृ. दशमी
  2. 2कृ. एकादशी
  3. 3कृ. द्वादशी
  4. 4कृ. त्रयोदशी
  5. 5कृ. चतुर्दशी
  6. 6कृ. अमावस्या
  7. 7शु. प्रतिपदा
  8. 8शु. द्वितीया
  9. 9शु. तृतीया
  10. 10शु. चतुर्थी
  11. 11शु. पंचमी
  12. 12शु. षष्ठी
  13. 13शु. सप्तमी
  14. 14शु. अष्टमी
  15. 15शु. नवमी
  16. 16शु. दशमी
  17. 17शु. एकादशी
  18. 18शु. द्वादशी
  19. 19शु. त्रयोदशी
  20. 20शु. चतुर्दशी
  21. 21कृ. प्रतिपदा
  22. 22कृ. द्वितीया
  23. 23कृ. तृतीया
  24. 24कृ. चतुर्थी
  25. 25कृ. पंचमी
  26. 26कृ. षष्ठी
  27. 27कृ. सप्तमी
  28. 28कृ. अष्टमी
  • त्योहार
  • एकादशी
  • पूर्णिमा
  • अमावस्या
  • प्रदोष
  • संकष्टी

फ़रवरी 2027 के व्रत और त्योहार

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

फ़रवरी 2027 में एकादशी कब है?

फ़रवरी 2027 में एकादशी 2 फ़रवरी (षटतिला एकादशी), 17 फ़रवरी (जया एकादशी) को है। एकादशी उस दिन रखी जाती है जिस दिन सूर्योदय के समय एकादशी तिथि हो। तिथि के शुरू और ख़त्म होने का पूरा समय एकादशी की सालाना सूची में दिया गया है।

फ़रवरी 2027 में पूर्णिमा कब है?

फ़रवरी 2027 में पूर्णिमा 20 फ़रवरी को है। पूर्णिमा पर सत्यनारायण कथा, स्नान और दान की परंपरा है। कुछ परिवार पूर्णिमा का व्रत एक दिन पहले शाम को रखते हैं, जब पूर्णिमा चंद्रोदय से पहले शुरू हो जाए।

फ़रवरी 2027 में अमावस्या कब है?

फ़रवरी 2027 में अमावस्या 6 फ़रवरी को है। अमावस्या पर पितरों के लिए तर्पण और दान किया जाता है। सोमवार की अमावस्या को सोमवती और शनिवार की अमावस्या को शनि अमावस्या कहते हैं।

फ़रवरी 2027 में प्रदोष व्रत कब है?

फ़रवरी 2027 में प्रदोष व्रत 3 फ़रवरी, 18 फ़रवरी को है। प्रदोष उस दिन रखा जाता है जिस दिन त्रयोदशी तिथि शाम के प्रदोष काल में हो। इस व्रत में शाम को भगवान शिव की पूजा की जाती है।

फ़रवरी 2027 में कौन से त्योहार हैं?

फ़रवरी 2027 में 11 फ़रवरी (वसंत पंचमी) पड़ते हैं। हर त्योहार के पेज पर उसकी तारीख़, तिथि का समय, मुहूर्त और पूजा की जानकारी दी गई है।

फ़रवरी 2027 में कौन सा हिंदू महीना है?

उत्तर भारत की पूर्णिमांत गणना से फ़रवरी 2027 में माघ – फाल्गुन मास है। पूर्णिमांत में महीना पूर्णिमा के बाद बदलता है, जबकि अमांत (दक्षिण और पश्चिम भारत) में अमावस्या के बाद, इसलिए कृष्ण पक्ष में दोनों के नाम एक महीना अलग होते हैं।

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