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अमावस्या 2026: पूरी सूची, तारीख़ और समय

सीधा जवाब

2026 में कुल 12 अमावस्या हैं (दिल्ली समय)। अगली अमावस्या कार्तिक अमावस्या (सोमवती) है, जो सोमवार, 9 नवंबर 2026 को है (6 दिन बाद)।

मुख्य बातें

  • 2026 में 12 अमावस्या, 12 महीनों में फैली हुई।
  • अमावस्या उस दिन दिखाई जाती है जिस दिन सूर्योदय के समय अमावस्या तिथि हो; अगर वह किसी सूर्योदय को न छुए, तो जिस दिन शुरू होती है, उस दिन (ऐसी पंक्ति पर यह लिखा है)। हर पंक्ति में तिथि के शुरू और ख़त्म होने का समय है। सोमवार की अमावस्या सोमवती और शनिवार की अमावस्या शनि अमावस्या कहलाती है।
  • हर पंक्ति में तिथि के शुरू और ख़त्म होने का समय दिल्ली के हिसाब से है; विदेश में तारीख़ बदल सकती है।
  • हर तारीख़ को एक टैप में Google कैलेंडर में जोड़ सकते हैं।

अमावस्या वह तिथि है जब चांद आसमान में दिखाई नहीं देता और कृष्ण पक्ष पूरा होता है। हिंदू परंपरा में यह दिन पितरों को याद करने, तर्पण करने, दान देने और नदी में स्नान करने के लिए खास माना जाता है। कई परिवार इस दिन पीपल के पेड़ के नीचे दीया जलाते हैं और गरीबों को भोजन कराते हैं। कुछ अमावस्याएं बहुत बड़ी मानी जाती हैं, जैसे पितृ पक्ष की सर्वपितृ अमावस्या, मौनी अमावस्या और कार्तिक की अमावस्या, जिस रात दिवाली मनाई जाती है। लोग यह सूची इसलिए देखते हैं ताकि श्राद्ध, तर्पण या दान का दिन पहले से तय कर सकें। तालिका में हर अमावस्या के लिए दिल्ली के समय से तिथि शुरू और खत्म होने का समय दिया गया है।

अमावस्या 2026 की तारीख़ें

तारीख़व्रत / तिथितिथि शुरूतिथि ख़त्मकैलेंडर
18 जनवरीरविवारमाघ अमावस्याकृष्ण पक्ष अमावस्या18 जनवरी, रात 12:0419 जनवरी, रात 1:21कैलेंडर
17 फ़रवरीमंगलवारफाल्गुन अमावस्याकृष्ण पक्ष अमावस्या16 फ़रवरी, शाम 5:3417 फ़रवरी, शाम 5:31कैलेंडर
19 मार्चगुरुवारचैत्र अमावस्याकृष्ण पक्ष अमावस्या18 मार्च, सुबह 8:2519 मार्च, सुबह 6:53कैलेंडर
17 अप्रैलशुक्रवारवैशाख अमावस्याकृष्ण पक्ष अमावस्या16 अप्रैल, रात 8:1117 अप्रैल, शाम 5:21कैलेंडर
16 मईशनिवारज्येष्ठ अमावस्या (शनि)कृष्ण पक्ष अमावस्या16 मई, सुबह 5:1117 मई, रात 1:30कैलेंडर
15 जूनसोमवारअधिक ज्येष्ठ अमावस्या (सोमवती)कृष्ण पक्ष अमावस्या14 जून, दोपहर 12:2015 जून, सुबह 8:24कैलेंडर
14 जुलाईमंगलवारआषाढ़ अमावस्याकृष्ण पक्ष अमावस्या13 जुलाई, शाम 6:4914 जुलाई, दोपहर 3:13कैलेंडर
12 अगस्तबुधवारश्रावण अमावस्याकृष्ण पक्ष अमावस्या12 अगस्त, रात 1:5312 अगस्त, रात 11:06कैलेंडर
11 सितंबरशुक्रवारभाद्रपद अमावस्याकृष्ण पक्ष अमावस्या10 सितंबर, सुबह 10:3311 सितंबर, सुबह 8:56कैलेंडर
10 अक्टूबरशनिवारआश्विन अमावस्या (शनि)कृष्ण पक्ष अमावस्या9 अक्टूबर, रात 9:3610 अक्टूबर, रात 9:19कैलेंडर
9 नवंबरसोमवारकार्तिक अमावस्या (सोमवती)कृष्ण पक्ष अमावस्या8 नवंबर, सुबह 11:289 नवंबर, दोपहर 12:31कैलेंडर
8 दिसंबरमंगलवारमार्गशीर्ष अमावस्याकृष्ण पक्ष अमावस्या8 दिसंबर, सुबह 4:129 दिसंबर, सुबह 6:21कैलेंडर

संबंधित त्योहार और सूचियाँ

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

अमावस्या के दिन क्या करना चाहिए?

अमावस्या पर सुबह स्नान करके पितरों के नाम से जल देना, यानी तर्पण करना, सबसे आम परंपरा है। इसके बाद अनाज, कपड़े, तिल या भोजन का दान किया जाता है। शाम को पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीया जलाने का भी चलन है। कई लोग इस दिन गाय, कुत्ते और कौवे के लिए रोटी निकालते हैं। हर क्षेत्र की अपनी परंपरा होती है, इसलिए घर के बड़ों से भी पूछ लें।

सोमवती अमावस्या क्या होती है?

जब अमावस्या तिथि सोमवार को पड़ती है, तो उसे सोमवती अमावस्या कहते हैं। यह साल में कुछ ही बार आती है और बहुत शुभ मानी जाती है। इस दिन सुहागिन महिलाएं पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रखती हैं और पीपल के पेड़ की पूजा करके उसकी परिक्रमा करती हैं। कई जगह पीपल पर कच्चा सूत लपेटने की परंपरा है। गंगा स्नान और दान का महत्व भी इस दिन बढ़ जाता है।

शनि अमावस्या पर क्या करें?

शनिवार को पड़ने वाली अमावस्या को शनि अमावस्या या शनिश्चरी अमावस्या कहते हैं। इस दिन शनि देव की पूजा की जाती है, शनि मंदिर में सरसों का तेल चढ़ाया जाता है और काले तिल, उड़द की दाल, काला कपड़ा या लोहे की चीज़ों का दान किया जाता है। पीपल के नीचे दीया जलाना और ज़रूरतमंदों को भोजन कराना भी शुभ माना जाता है। पितरों का तर्पण इस दिन भी किया जाता है।

अमावस्या पर पितरों का तर्पण कैसे करें?

सुबह स्नान के बाद दक्षिण दिशा की ओर मुंह करके बैठें। एक लोटे में पानी लें और उसमें काले तिल, कुशा और थोड़े फूल डालें। फिर पितरों का नाम लेते हुए हथेली से धीरे-धीरे जल अर्पित करें। जिन्हें पूरी विधि न आती हो, वे मन से प्रार्थना करके जल दे सकते हैं या किसी पंडित जी की मदद ले सकते हैं। इसके बाद किसी ज़रूरतमंद को भोजन या दान देना अच्छा माना जाता है।

क्या अमावस्या के दिन शुभ काम करना चाहिए?

परंपरा में अमावस्या को नए काम की शुरुआत, शादी, गृह प्रवेश या नई खरीदारी के लिए आमतौर पर अच्छा नहीं माना जाता, क्योंकि यह दिन पितरों और साधना से जुड़ा है। इसलिए ज़्यादातर मुहूर्त सूचियों में अमावस्या शामिल नहीं होती। लेकिन पूजा, दान, जप और स्नान के लिए यह दिन बहुत अच्छा है। दिवाली भी कार्तिक अमावस्या की रात मनाई जाती है, इसलिए हर जगह एक जैसी मान्यता नहीं है।

अमावस्या दो दिन क्यों दिखाई देती है?

तिथि की लंबाई चांद और सूरज की चाल पर टिकी होती है, इसलिए यह हमेशा आधी रात से आधी रात तक नहीं चलती। अक्सर अमावस्या एक दिन दोपहर में शुरू होकर अगले दिन दोपहर तक रहती है। ऐसे में कैलेंडर अलग-अलग दिन दिखा सकते हैं। हमारी सूची सूर्योदय वाले दिन को अमावस्या मानती है, और श्राद्ध या दूसरे काम के लिए आप तालिका में दिए गए शुरू और खत्म होने के समय देख सकते हैं।

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