संकष्टी चतुर्थी 2026: पूरी सूची, तारीख़ और समय
सीधा जवाब
2026 में कुल 13 संकष्टी चतुर्थी हैं (दिल्ली समय)। अगली संकष्टी चतुर्थी मार्गशीर्ष संकष्टी है, जो शुक्रवार, 27 नवंबर 2026 को है (24 दिन बाद)।
मुख्य बातें
- 2026 में 13 संकष्टी चतुर्थी, 12 महीनों में फैली हुई।
- शुभकाल पर संकष्टी चतुर्थी कृष्ण पक्ष की उस चतुर्थी को दिखाई जाती है जिस दिन चंद्रोदय के समय चतुर्थी तिथि मौजूद हो, क्योंकि यह व्रत चांद देखकर ही खोला जाता है। इसलिए कभी-कभी व्रत का दिन सूर्योदय वाली तिथि से अलग हो सकता है। जब संकष्टी मंगलवार को पड़ती है, तो उसे अंगारकी चतुर्थी कहते हैं।
- हर पंक्ति में तिथि के शुरू और ख़त्म होने का समय दिल्ली के हिसाब से है; विदेश में तारीख़ बदल सकती है।
- हर तारीख़ को एक टैप में Google कैलेंडर में जोड़ सकते हैं।
संकष्टी चतुर्थी भगवान गणेश का व्रत है, जो हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को रखा जाता है। संकष्टी का मतलब है संकट से छुटकारा, इसलिए लोग परिवार की खुशहाली और रुकावटें दूर होने की कामना से यह व्रत रखते हैं। दिन भर व्रत रहता है और रात को चांद निकलने पर उसे अर्घ्य देकर, गणेश जी की पूजा करके व्रत खोला जाता है। माघ महीने की संकष्टी को कई जगह सकट चौथ या तिलकुटा चौथ कहते हैं, जिसे माताएं संतान के लिए रखती हैं। लोग यह सूची इसलिए देखते हैं ताकि व्रत का सही दिन जान सकें, क्योंकि इसका दिन चंद्रोदय से तय होता है। तालिका में हर संकष्टी का दिन और दिल्ली के समय से जुड़ी जानकारी दी गई है।
संकष्टी चतुर्थी 2026 की तारीख़ें
| तारीख़ | व्रत / तिथि | तिथि शुरू | तिथि ख़त्म | चंद्रोदय (दिल्ली) | कैलेंडर |
|---|---|---|---|---|---|
| 6 जनवरीमंगलवार | माघ संकष्टी (अंगारकी)कृष्ण पक्ष चतुर्थी | 6 जनवरी, सुबह 8:02 | 7 जनवरी, सुबह 6:52 | रात 8:59 | कैलेंडर |
| 5 फ़रवरीगुरुवार | फाल्गुन संकष्टीकृष्ण पक्ष चतुर्थी | 5 फ़रवरी, रात 12:09 | 6 फ़रवरी, रात 12:22 | रात 9:39 | कैलेंडर |
| 6 मार्चशुक्रवार | चैत्र संकष्टीकृष्ण पक्ष चतुर्थी | 6 मार्च, शाम 5:53 | 7 मार्च, शाम 7:17 | रात 9:18 | कैलेंडर |
| 5 अप्रैलरविवार | वैशाख संकष्टीकृष्ण पक्ष चतुर्थी | 5 अप्रैल, दोपहर 12:00 | 6 अप्रैल, दोपहर 2:11 | रात 9:58 | कैलेंडर |
| 5 मईमंगलवार | ज्येष्ठ संकष्टी (अंगारकी)कृष्ण पक्ष चतुर्थी | 5 मई, सुबह 5:24 | 6 मई, सुबह 7:51 | रात 10:35 | कैलेंडर |
| 3 जूनबुधवार | अधिक ज्येष्ठ संकष्टीकृष्ण पक्ष चतुर्थी | 3 जून, रात 9:21 | 4 जून, रात 11:30 | रात 10:04 | कैलेंडर |
| 3 जुलाईशुक्रवार | आषाढ़ संकष्टीकृष्ण पक्ष चतुर्थी | 3 जुलाई, सुबह 11:20 | 4 जुलाई, दोपहर 12:40 | रात 9:53 | कैलेंडर |
| 2 अगस्तरविवार | श्रावण संकष्टीकृष्ण पक्ष चतुर्थी | 1 अगस्त, रात 11:07 | 2 अगस्त, रात 11:15 | रात 9:25 | कैलेंडर |
| 31 अगस्तसोमवार | भाद्रपद संकष्टीकृष्ण पक्ष चतुर्थी | 31 अगस्त, सुबह 8:51 | 1 सितंबर, सुबह 7:42 | रात 8:29 | कैलेंडर |
| 29 सितंबरमंगलवार | आश्विन संकष्टी (अंगारकी)कृष्ण पक्ष चतुर्थी | 29 सितंबर, शाम 5:10 | 30 सितंबर, दोपहर 2:55 | शाम 7:44 | कैलेंडर |
| 29 अक्टूबरगुरुवार | कार्तिक संकष्टीकृष्ण पक्ष चतुर्थी | 29 अक्टूबर, रात 1:07 | 29 अक्टूबर, रात 10:10 | रात 8:17 | कैलेंडर |
| 27 नवंबरशुक्रवार | मार्गशीर्ष संकष्टीकृष्ण पक्ष चतुर्थी | 27 नवंबर, सुबह 9:48 | 28 नवंबर, सुबह 6:40 | रात 8:18 | कैलेंडर |
| 26 दिसंबरशनिवार | पौष संकष्टीकृष्ण पक्ष चतुर्थी | 26 दिसंबर, रात 8:05 | 27 दिसंबर, शाम 5:13 | रात 8:19 | कैलेंडर |
संबंधित त्योहार और सूचियाँ
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
संकष्टी चतुर्थी का व्रत कैसे खोलें?
संकष्टी का व्रत रात को चांद निकलने के बाद खोला जाता है। पहले गणेश जी की पूजा करें, उन्हें दूर्वा, मोदक या लड्डू चढ़ाएं और संकष्टी की कथा सुनें। फिर चांद को जल, दूध और फूल से अर्घ्य दें। इसके बाद प्रसाद लेकर व्रत खोलें। कई घरों में तिल और गुड़ की चीज़ें खाकर व्रत तोड़ने की परंपरा है, खासकर सकट चौथ पर।
संकष्टी चतुर्थी में क्या खा सकते हैं?
दिन में ज़्यादातर लोग फलाहार करते हैं, जैसे फल, दूध, मूंगफली, साबूदाना की खिचड़ी या शकरकंद। कुछ लोग पूरे दिन कुछ नहीं खाते और केवल पानी पीते हैं। चांद को अर्घ्य देने के बाद तिल के लड्डू, मोदक या सादा सात्विक भोजन किया जाता है। बुज़ुर्ग, गर्भवती महिलाएं या जिनकी तबीयत ठीक न हो, वे अक्सर फल और दूध लेकर हल्का व्रत रखते हैं।
अंगारकी संकष्टी चतुर्थी क्या है?
जब संकष्टी चतुर्थी मंगलवार को पड़ती है, तो उसे अंगारकी चतुर्थी कहते हैं। मंगल ग्रह को अंगारक भी कहा जाता है, इसी से यह नाम पड़ा। यह साल में गिनी-चुनी बार ही आती है और बहुत शुभ मानी जाती है। महाराष्ट्र में इसका खास महत्व है और गणेश मंदिरों में इस दिन बहुत भीड़ होती है। व्रत और पूजा की विधि सामान्य संकष्टी जैसी ही रहती है।
संकष्टी और विनायक चतुर्थी में क्या अंतर है?
दोनों व्रत भगवान गणेश के हैं, लेकिन पक्ष अलग है। संकष्टी चतुर्थी कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को आती है, यानी पूर्णिमा के बाद, और इसमें रात को चांद देखकर व्रत खोला जाता है। विनायक चतुर्थी शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को, यानी अमावस्या के बाद, आती है और इसकी पूजा आमतौर पर दोपहर में होती है। भाद्रपद की विनायक चतुर्थी को ही गणेश चतुर्थी का बड़ा त्योहार मनाया जाता है।
संकष्टी पर चांद न दिखे तो क्या करें?
बादल, बारिश या ऊंची इमारतों की वजह से कई बार चांद दिखाई नहीं देता। ऐसे में अपने शहर के चंद्रोदय का समय देख लें और उस समय के बाद चांद की दिशा की ओर मुंह करके अर्घ्य दे दें। परंपरा में यह मान्य माना जाता है। कुछ परिवार थोड़ा इंतज़ार करते हैं कि बादल हट जाएं। अर्घ्य के बाद पूजा पूरी करके व्रत खोल सकते हैं।
संकष्टी चतुर्थी की तारीख अलग-अलग कैलेंडर में अलग क्यों होती है?
संकष्टी का दिन सूर्योदय से नहीं, चंद्रोदय से तय होता है। जिस दिन चांद निकलते समय चतुर्थी तिथि हो, उसी दिन व्रत रखा जाता है। अगर कोई कैलेंडर सिर्फ़ सूर्योदय वाली तिथि देखता है, तो वह एक दिन अलग दिखा सकता है। साथ ही चंद्रोदय हर शहर में अलग समय पर होता है, इसलिए विदेश में या दूर के शहरों में व्रत का दिन बदल सकता है।