विवाह मुहूर्त 2027: शुभ तारीख़ें और समय
सीधा जवाब
2027 में विवाह मुहूर्त के 83 शुभ दिन हैं। सबसे ज़्यादा 17 दिन मई 2027 में हैं। अगला शुभ दिन शुक्रवार, 15 जनवरी 2027 है।
शादी की तारीख तय करना हर परिवार के लिए बड़ा फ़ैसला होता है। हिंदू परंपरा में विवाह के लिए ऐसा दिन चुना जाता है जब नक्षत्र, तिथि और ग्रहों की स्थिति शुभ हो, ताकि नए जीवन की शुरुआत अच्छे समय में हो। यही वजह है कि शादियों का मौसम कुछ खास महीनों में ही आता है और बीच में लंबे समय तक शहनाई नहीं बजती। लोग यह सूची इसलिए देखते हैं ताकि विवाह स्थल, हलवाई, कपड़ों और रिश्तेदारों की यात्रा की योजना समय रहते बना सकें। तालिका में हर शुभ दिन के लिए दिल्ली के समय के अनुसार वह समय दिया गया है जब शुभ नक्षत्र और शुभ तिथि साथ-साथ हों। इसे शुरुआती सूची मानें, और अंतिम तारीख व लग्न कुंडली मिलान के बाद अपने पंडित जी से पक्का करवाएं।
ये तारीख़ें किस नियम से निकलीं
शुभकाल पर कोई दिन विवाह के लिए तब गिना जाता है जब सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक के समय में कोई शुभ नक्षत्र (रोहिणी, मृगशिरा, मघा, उत्तरा फाल्गुनी, हस्त, स्वाती, अनुराधा, मूल, उत्तराषाढ़ा, उत्तरा भाद्रपद या रेवती) किसी शुभ तिथि के साथ पड़े, और उसमें से भद्रा यानी विष्टि करण का समय हटा दिया जाता है। शुभ तिथियां हैं दोनों पक्षों की द्वितीया, तृतीया, पंचमी, सप्तमी, दशमी, एकादशी, द्वादशी और त्रयोदशी, साथ में शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा। पूरा चातुर्मास (देवशयनी से देवउठनी एकादशी तक), खरमास (जब सूर्य धनु या मीन राशि में हो), अधिक मास और वे दिन जब गुरु या शुक्र अस्त हों, यानी सूर्य के बहुत पास हों, सूची से बाहर रखे जाते हैं। इसके अलावा परिवार कुंडली मिलान करते हैं और लग्न के लिए अपने पंडित जी से सलाह लेते हैं।
- शुभ नक्षत्र: रोहिणी, मृगशिरा, मघा, उत्तरा फाल्गुनी, हस्त, स्वाति, अनुराधा, मूल, उत्तराषाढ़ा, उत्तरा भाद्रपद, रेवती
- शुक्ल पक्ष की तिथियाँ: द्वितीया, तृतीया, पंचमी, सप्तमी, दशमी, एकादशी, द्वादशी, त्रयोदशी, पूर्णिमा
- कृष्ण पक्ष की तिथियाँ: द्वितीया, तृतीया, पंचमी, सप्तमी, दशमी, एकादशी, द्वादशी, त्रयोदशी
- वार: सभी
- समय की खिड़की: सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक, कम से कम 60 मिनट
- हटाए गए समय: भद्रा (विष्टि करण), चातुर्मास (14 जुलाई से 10 नवंबर), खरमास (सूर्य धनु या मीन में), अधिक मास, गुरु या शुक्र अस्त
गणना का तरीका और जाँच की स्थिति
- नियम संस्करण: 1.1 (2026-11-03)
- परंपरा: उत्तर भारतीय पंचांगों में आम तौर पर देखी जाने वाली शर्तें (ऊपर दी गई); यह किसी एक ग्रंथ या पंडित की सूची नहीं है।
- तरीका: हर दिन के लिए नक्षत्र, तिथि और करण के बदलने का समय सेकंड तक निकाला गया, शुभ नक्षत्र और शुभ तिथि का साझा समय लिया गया, भद्रा हटाई गई और कम से कम तय मिनट वाला समय रखा गया। समय दिल्ली (28.6139° उ., 77.2090° पू., IST) के हैं।
- राहु काल: इन खिड़कियों से राहु काल नहीं हटाया गया है। जिस पंक्ति में राहु काल पड़ता है, वहाँ यह लिखा है, ताकि अंतिम समय चुनते समय आप उसे छोड़ सकें।
- जाँच: केवल स्वचालित जाँच: हर खिड़की को एक अलग स्क्रिप्ट मिनट-दर-मिनट दोबारा जाँचती है। किसी पंडित या विद्वान ने इन नियमों की समीक्षा नहीं की है।
विवाह मुहूर्त 2027: महीनेवार सूची
जनवरी 2027 (9)
| तारीख़ | मुहूर्त का समय | नक्षत्र / तिथि | कैलेंडर |
|---|---|---|---|
| 15 जनवरीशुक्रवार | सुबह 7:15 – दोपहर 2:14 | रेवती · शुक्ल सप्तमीराहु काल सुबह 11:12 – दोपहर 12:31 इस समय में पड़ता है | कैलेंडर |
| 19 जनवरीमंगलवार | सुबह 7:50 – शाम 6:54शाम 6:54 – 20 जनवरी, सुबह 4:4120 जनवरी, सुबह 4:41 – 20 जनवरी, सुबह 7:14 | रोहिणी · शुक्ल द्वादशीमृगशिरा · शुक्ल द्वादशीमृगशिरा · शुक्ल त्रयोदशीराहु काल दोपहर 3:11 – शाम 4:30 इस समय में पड़ता है | कैलेंडर |
| 20 जनवरीबुधवार | सुबह 7:14 – शाम 4:17 | मृगशिरा · शुक्ल त्रयोदशीराहु काल दोपहर 12:32 – दोपहर 1:52 इस समय में पड़ता है | कैलेंडर |
| 23 जनवरीशनिवार | 24 जनवरी, सुबह 4:53 – 24 जनवरी, सुबह 7:13 | मघा · कृष्ण द्वितीया | कैलेंडर |
| 24 जनवरीरविवार | सुबह 7:13 – सुबह 10:58सुबह 10:58 – रात 9:30 | मघा · कृष्ण द्वितीयामघा · कृष्ण तृतीयाराहु काल शाम 4:33 – शाम 5:53 इस समय में पड़ता है | कैलेंडर |
| 25 जनवरीसोमवार | 26 जनवरी, सुबह 6:00 – 26 जनवरी, सुबह 7:12 | उत्तरा फाल्गुनी · कृष्ण पंचमी | कैलेंडर |
| 26 जनवरीमंगलवार | सुबह 7:12 – 27 जनवरी, रात 12:0627 जनवरी, रात 12:06 – 27 जनवरी, सुबह 4:33 | उत्तरा फाल्गुनी · कृष्ण पंचमीहस्त · कृष्ण पंचमीराहु काल दोपहर 3:14 – शाम 4:35 इस समय में पड़ता है | कैलेंडर |
| 28 जनवरीगुरुवार | 29 जनवरी, रात 12:32 – 29 जनवरी, सुबह 4:03 | स्वाति · कृष्ण सप्तमी | कैलेंडर |
| 31 जनवरीरविवार | सुबह 7:10 – शाम 7:35 | अनुराधा · कृष्ण दशमीराहु काल शाम 4:38 – शाम 5:59 इस समय में पड़ता है | कैलेंडर |
फ़रवरी 2027 (11)
| तारीख़ | मुहूर्त का समय | नक्षत्र / तिथि | कैलेंडर |
|---|---|---|---|
| 2 फ़रवरीमंगलवार | सुबह 9:22 – सुबह 11:11सुबह 11:11 – 3 फ़रवरी, सुबह 7:08 | मूल · कृष्ण एकादशीमूल · कृष्ण द्वादशीराहु काल दोपहर 3:18 – शाम 4:39 इस समय में पड़ता है | कैलेंडर |
| 3 फ़रवरीबुधवार | सुबह 7:08 – दोपहर 12:26 | मूल · कृष्ण द्वादशी | कैलेंडर |
| 10 फ़रवरीबुधवार | 11 फ़रवरी, रात 3:04 – 11 फ़रवरी, सुबह 4:5611 फ़रवरी, सुबह 4:56 – 11 फ़रवरी, सुबह 7:03 | उत्तरा भाद्रपद · शुक्ल पंचमीरेवती · शुक्ल पंचमी | कैलेंडर |
| 11 फ़रवरीगुरुवार | सुबह 7:03 – 12 फ़रवरी, रात 3:18 | रेवती · शुक्ल पंचमीराहु काल दोपहर 1:59 – दोपहर 3:22 इस समय में पड़ता है | कैलेंडर |
| 15 फ़रवरीसोमवार | रात 10:45 – 16 फ़रवरी, रात 3:2516 फ़रवरी, रात 3:25 – 16 फ़रवरी, सुबह 6:59 | रोहिणी · शुक्ल दशमीमृगशिरा · शुक्ल दशमी | कैलेंडर |
| 16 फ़रवरीमंगलवार | सुबह 6:59 – रात 8:20रात 8:20 – 17 फ़रवरी, रात 1:38 | मृगशिरा · शुक्ल दशमीमृगशिरा · शुक्ल एकादशीराहु काल दोपहर 3:24 – शाम 4:48 इस समय में पड़ता है | कैलेंडर |
| 20 फ़रवरीशनिवार | शाम 6:25 – 21 फ़रवरी, सुबह 4:53 | मघा · शुक्ल पूर्णिमा | कैलेंडर |
| 22 फ़रवरीसोमवार | सुबह 11:55 – रात 11:39रात 11:39 – 23 फ़रवरी, सुबह 6:52 | उत्तरा फाल्गुनी · कृष्ण द्वितीयाउत्तरा फाल्गुनी · कृष्ण तृतीया | कैलेंडर |
| 23 फ़रवरीमंगलवार | सुबह 6:53 – सुबह 10:28सुबह 10:28 – सुबह 10:40 | उत्तरा फाल्गुनी · कृष्ण तृतीयाहस्त · कृष्ण तृतीया | कैलेंडर |
| 25 फ़रवरीगुरुवार | सुबह 9:33 – रात 8:18 | स्वाति · कृष्ण पंचमीराहु काल दोपहर 2:00 – दोपहर 3:26 इस समय में पड़ता है | कैलेंडर |
| 27 फ़रवरीशनिवार | सुबह 11:40 – रात 9:55 | अनुराधा · कृष्ण सप्तमी | कैलेंडर |
मार्च 2027 (9)
| तारीख़ | मुहूर्त का समय | नक्षत्र / तिथि | कैलेंडर |
|---|---|---|---|
| 1 मार्चसोमवार | 2 मार्च, रात 2:07 – 2 मार्च, सुबह 6:45 | मूल · कृष्ण दशमी | कैलेंडर |
| 2 मार्चमंगलवार | सुबह 6:46 – दोपहर 3:25 | मूल · कृष्ण दशमी | कैलेंडर |
| 3 मार्चबुधवार | रात 10:34 – 4 मार्च, सुबह 6:43 | उत्तराषाढ़ा · कृष्ण एकादशी | कैलेंडर |
| 4 मार्चगुरुवार | सुबह 6:44 – सुबह 7:25सुबह 7:25 – 5 मार्च, रात 1:35 | उत्तराषाढ़ा · कृष्ण एकादशीउत्तराषाढ़ा · कृष्ण द्वादशीराहु काल दोपहर 2:01 – दोपहर 3:28 इस समय में पड़ता है | कैलेंडर |
| 9 मार्चमंगलवार | दोपहर 3:41 – 10 मार्च, सुबह 6:37 | उत्तरा भाद्रपद · शुक्ल द्वितीयाराहु काल दोपहर 3:29 – शाम 4:57 इस समय में पड़ता है | कैलेंडर |
| 10 मार्चबुधवार | सुबह 6:37 – सुबह 10:53सुबह 10:53 – दोपहर 3:53दोपहर 3:53 – 11 मार्च, सुबह 6:35 | उत्तरा भाद्रपद · शुक्ल द्वितीयारेवती · शुक्ल द्वितीयारेवती · शुक्ल तृतीयाराहु काल दोपहर 12:32 – दोपहर 2:00 इस समय में पड़ता है | कैलेंडर |
| 11 मार्चगुरुवार | सुबह 6:36 – सुबह 11:20 | रेवती · शुक्ल तृतीया | कैलेंडर |
| 14 मार्चरविवार | दोपहर 12:32 – 15 मार्च, सुबह 6:31 | रोहिणी · शुक्ल सप्तमीराहु काल शाम 4:59 – शाम 6:29 इस समय में पड़ता है | कैलेंडर |
| 15 मार्चसोमवार | सुबह 6:31 – सुबह 9:26सुबह 9:26 – सुबह 10:52 | रोहिणी · शुक्ल सप्तमीमृगशिरा · शुक्ल सप्तमीराहु काल सुबह 8:01 – सुबह 9:31 इस समय में पड़ता है | कैलेंडर |
अप्रैल 2027 (8)
| तारीख़ | मुहूर्त का समय | नक्षत्र / तिथि | कैलेंडर |
|---|---|---|---|
| 16 अप्रैलशुक्रवार | सुबह 8:18 – सुबह 11:22सुबह 11:22 – रात 10:24 | मघा · शुक्ल दशमीमघा · शुक्ल एकादशीराहु काल सुबह 10:45 – दोपहर 12:21 इस समय में पड़ता है | कैलेंडर |
| 18 अप्रैलरविवार | सुबह 6:06 – सुबह 7:43सुबह 7:43 – 19 अप्रैल, सुबह 5:1519 अप्रैल, सुबह 5:15 – 19 अप्रैल, सुबह 5:52 | उत्तरा फाल्गुनी · शुक्ल द्वादशीउत्तरा फाल्गुनी · शुक्ल त्रयोदशीहस्त · शुक्ल त्रयोदशीराहु काल शाम 5:12 – शाम 6:48 इस समय में पड़ता है | कैलेंडर |
| 21 अप्रैलबुधवार | 22 अप्रैल, रात 3:30 – 22 अप्रैल, सुबह 4:44 | स्वाति · कृष्ण द्वितीया | कैलेंडर |
| 23 अप्रैलशुक्रवार | सुबह 5:48 – दोपहर 3:55 | अनुराधा · कृष्ण तृतीयाराहु काल सुबह 10:42 – दोपहर 12:20 इस समय में पड़ता है | कैलेंडर |
| 25 अप्रैलरविवार | सुबह 8:58 – 26 अप्रैल, सुबह 5:45 | मूल · कृष्ण पंचमीराहु काल शाम 5:14 – शाम 6:53 इस समय में पड़ता है | कैलेंडर |
| 26 अप्रैलसोमवार | सुबह 5:45 – सुबह 7:37 | मूल · कृष्ण पंचमीराहु काल सुबह 7:24 – सुबह 9:02 इस समय में पड़ता है | कैलेंडर |
| 27 अप्रैलमंगलवार | रात 11:14 – 28 अप्रैल, सुबह 5:43 | उत्तराषाढ़ा · कृष्ण सप्तमी | कैलेंडर |
| 28 अप्रैलबुधवार | सुबह 5:44 – दोपहर 12:31 | उत्तराषाढ़ा · कृष्ण सप्तमीराहु काल दोपहर 12:19 – दोपहर 1:58 इस समय में पड़ता है | कैलेंडर |
मई 2027 (17)
| तारीख़ | मुहूर्त का समय | नक्षत्र / तिथि | कैलेंडर |
|---|---|---|---|
| 2 मईरविवार | 3 मई, रात 2:40 – 3 मई, सुबह 5:39 | उत्तरा भाद्रपद · कृष्ण द्वादशी | कैलेंडर |
| 3 मईसोमवार | सुबह 5:39 – रात 8:05रात 8:05 – 4 मई, रात 3:194 मई, रात 3:19 – 4 मई, सुबह 5:38 | उत्तरा भाद्रपद · कृष्ण द्वादशीउत्तरा भाद्रपद · कृष्ण त्रयोदशीरेवती · कृष्ण त्रयोदशीराहु काल सुबह 7:19 – सुबह 8:59 इस समय में पड़ता है | कैलेंडर |
| 4 मईमंगलवार | सुबह 5:38 – शाम 7:31 | रेवती · कृष्ण त्रयोदशीराहु काल दोपहर 3:38 – शाम 5:18 इस समय में पड़ता है | कैलेंडर |
| 7 मईशुक्रवार | रात 11:42 – 8 मई, सुबह 5:35 | रोहिणी · शुक्ल द्वितीया | कैलेंडर |
| 8 मईशनिवार | सुबह 5:35 – सुबह 11:43सुबह 11:43 – रात 9:53रात 9:53 – 9 मई, सुबह 5:34 | रोहिणी · शुक्ल द्वितीयारोहिणी · शुक्ल तृतीयामृगशिरा · शुक्ल तृतीयाराहु काल सुबह 8:57 – सुबह 10:37 इस समय में पड़ता है | कैलेंडर |
| 9 मईरविवार | सुबह 5:35 – सुबह 9:04 | मृगशिरा · शुक्ल तृतीया | कैलेंडर |
| 15 मईशनिवार | दोपहर 12:00 – शाम 6:18शाम 6:18 – 16 मई, सुबह 5:30 | उत्तरा फाल्गुनी · शुक्ल दशमीउत्तरा फाल्गुनी · शुक्ल एकादशी | कैलेंडर |
| 16 मईरविवार | शाम 5:14 – शाम 5:14शाम 5:14 – 17 मई, सुबह 5:29 | हस्त · शुक्ल एकादशीहस्त · शुक्ल द्वादशीराहु काल शाम 5:23 – शाम 7:05 इस समय में पड़ता है | कैलेंडर |
| 17 मईसोमवार | सुबह 5:30 – सुबह 11:29 | हस्त · शुक्ल द्वादशीराहु काल सुबह 7:12 – सुबह 8:54 इस समय में पड़ता है | कैलेंडर |
| 18 मईमंगलवार | सुबह 11:43 – शाम 4:04 | स्वाति · शुक्ल त्रयोदशीराहु काल दोपहर 3:42 – शाम 5:24 इस समय में पड़ता है | कैलेंडर |
| 20 मईगुरुवार | दोपहर 1:21 – शाम 4:29 | अनुराधा · शुक्ल पूर्णिमाराहु काल दोपहर 2:00 – दोपहर 3:43 इस समय में पड़ता है | कैलेंडर |
| 22 मईशनिवार | शाम 4:50 – शाम 6:49शाम 6:49 – 23 मई, सुबह 5:26 | मूल · कृष्ण द्वितीयामूल · कृष्ण तृतीया | कैलेंडर |
| 23 मईरविवार | सुबह 5:27 – सुबह 7:42 | मूल · कृष्ण तृतीया | कैलेंडर |
| 24 मईसोमवार | रात 10:59 – 25 मई, सुबह 5:25 | उत्तराषाढ़ा · कृष्ण पंचमी | कैलेंडर |
| 25 मईमंगलवार | सुबह 5:26 – 26 मई, रात 1:12 | उत्तराषाढ़ा · कृष्ण पंचमीराहु काल दोपहर 3:44 – शाम 5:27 इस समय में पड़ता है | कैलेंडर |
| 30 मईरविवार | सुबह 11:32 – रात 9:55 | उत्तरा भाद्रपद · कृष्ण दशमीराहु काल शाम 5:30 – शाम 7:13 इस समय में पड़ता है | कैलेंडर |
| 31 मईसोमवार | सुबह 10:03 – दोपहर 12:36दोपहर 12:36 – 1 जून, सुबह 5:23 | उत्तरा भाद्रपद · कृष्ण एकादशीरेवती · कृष्ण एकादशी | कैलेंडर |
जून 2027 (11)
| तारीख़ | मुहूर्त का समय | नक्षत्र / तिथि | कैलेंडर |
|---|---|---|---|
| 1 जूनमंगलवार | सुबह 5:24 – सुबह 9:40सुबह 9:40 – दोपहर 12:50 | रेवती · कृष्ण एकादशीरेवती · कृष्ण द्वादशी | कैलेंडर |
| 5 जूनशनिवार | रात 9:59 – 6 जून, सुबह 4:36 | मृगशिरा · शुक्ल द्वितीया | कैलेंडर |
| 10 जूनगुरुवार | सुबह 7:12 – शाम 6:24 | मघा · शुक्ल सप्तमीराहु काल दोपहर 2:05 – दोपहर 3:50 इस समय में पड़ता है | कैलेंडर |
| 12 जूनशनिवार | 13 जून, रात 2:44 – 13 जून, सुबह 5:22 | हस्त · शुक्ल दशमी | कैलेंडर |
| 13 जूनरविवार | सुबह 5:23 – शाम 5:00 | हस्त · शुक्ल दशमी | कैलेंडर |
| 14 जूनसोमवार | 15 जून, रात 2:08 – 15 जून, रात 2:0815 जून, रात 2:08 – 15 जून, सुबह 5:22 | स्वाति · शुक्ल एकादशीस्वाति · शुक्ल द्वादशी | कैलेंडर |
| 15 जूनमंगलवार | सुबह 5:23 – शाम 6:23 | स्वाति · शुक्ल द्वादशीराहु काल दोपहर 3:51 – शाम 5:36 इस समय में पड़ता है | कैलेंडर |
| 16 जूनबुधवार | शाम 7:44 – 17 जून, रात 3:20 | अनुराधा · शुक्ल त्रयोदशी | कैलेंडर |
| 18 जूनशुक्रवार | रात 11:41 – 19 जून, सुबह 5:23 | मूल · शुक्ल पूर्णिमा | कैलेंडर |
| 21 जूनसोमवार | सुबह 5:24 – सुबह 10:36सुबह 10:36 – रात 11:51 | उत्तराषाढ़ा · कृष्ण द्वितीयाउत्तराषाढ़ा · कृष्ण तृतीयाराहु काल सुबह 7:09 – सुबह 8:53 इस समय में पड़ता है | कैलेंडर |
| 26 जूनशनिवार | शाम 7:23 – रात 9:52 | उत्तरा भाद्रपद · कृष्ण सप्तमी | कैलेंडर |
जुलाई 2027 (2)
नवंबर 2027 (11)
| तारीख़ | मुहूर्त का समय | नक्षत्र / तिथि | कैलेंडर |
|---|---|---|---|
| 11 नवंबरगुरुवार | सुबह 6:40 – सुबह 7:02सुबह 7:02 – सुबह 10:08सुबह 10:08 – 12 नवंबर, सुबह 6:40 | उत्तरा भाद्रपद · शुक्ल द्वादशीरेवती · शुक्ल द्वादशीरेवती · शुक्ल त्रयोदशीराहु काल दोपहर 1:26 – दोपहर 2:47 इस समय में पड़ता है | कैलेंडर |
| 12 नवंबरशुक्रवार | सुबह 6:41 – सुबह 7:56 | रेवती · शुक्ल त्रयोदशी | कैलेंडर |
| 15 नवंबरसोमवार | सुबह 7:29 – 16 नवंबर, सुबह 5:4116 नवंबर, सुबह 5:41 – 16 नवंबर, सुबह 6:0016 नवंबर, सुबह 6:00 – 16 नवंबर, सुबह 6:44 | रोहिणी · कृष्ण द्वितीयारोहिणी · कृष्ण तृतीयामृगशिरा · कृष्ण तृतीयाराहु काल सुबह 8:04 – सुबह 9:24 इस समय में पड़ता है | कैलेंडर |
| 16 नवंबरमंगलवार | सुबह 6:44 – शाम 4:43 | मृगशिरा · कृष्ण तृतीयाराहु काल दोपहर 2:46 – शाम 4:07 इस समय में पड़ता है | कैलेंडर |
| 22 नवंबरसोमवार | रात 8:44 – 23 नवंबर, रात 2:35 | उत्तरा फाल्गुनी · कृष्ण दशमी | कैलेंडर |
| 23 नवंबरमंगलवार | दोपहर 1:45 – शाम 7:43शाम 7:43 – 24 नवंबर, सुबह 6:50 | उत्तरा फाल्गुनी · कृष्ण एकादशीहस्त · कृष्ण एकादशीराहु काल दोपहर 2:46 – शाम 4:06 इस समय में पड़ता है | कैलेंडर |
| 24 नवंबरबुधवार | सुबह 6:50 – दोपहर 12:12दोपहर 12:12 – शाम 6:53 | हस्त · कृष्ण एकादशीहस्त · कृष्ण द्वादशीराहु काल दोपहर 12:08 – दोपहर 1:27 इस समय में पड़ता है | कैलेंडर |
| 25 नवंबरगुरुवार | शाम 6:17 – 26 नवंबर, सुबह 6:52 | स्वाति · कृष्ण त्रयोदशी | कैलेंडर |
| 26 नवंबरशुक्रवार | सुबह 6:52 – सुबह 9:48 | स्वाति · कृष्ण त्रयोदशी | कैलेंडर |
| 29 नवंबरसोमवार | शाम 7:48 – 30 नवंबर, सुबह 6:55 | मूल · शुक्ल द्वितीया | कैलेंडर |
| 30 नवंबरमंगलवार | सुबह 6:55 – सुबह 10:09सुबह 10:09 – रात 9:30 | मूल · शुक्ल द्वितीयामूल · शुक्ल तृतीयाराहु काल दोपहर 2:47 – शाम 4:05 इस समय में पड़ता है | कैलेंडर |
दिसंबर 2027 (5)
| तारीख़ | मुहूर्त का समय | नक्षत्र / तिथि | कैलेंडर |
|---|---|---|---|
| 2 दिसंबरगुरुवार | दोपहर 1:44 – 3 दिसंबर, रात 2:30 | उत्तराषाढ़ा · शुक्ल पंचमीराहु काल दोपहर 1:29 – दोपहर 2:47 इस समय में पड़ता है | कैलेंडर |
| 7 दिसंबरमंगलवार | 8 दिसंबर, रात 1:50 – 8 दिसंबर, सुबह 7:01 | उत्तरा भाद्रपद · शुक्ल दशमी | कैलेंडर |
| 8 दिसंबरबुधवार | सुबह 7:01 – शाम 4:13शाम 4:13 – 9 दिसंबर, रात 2:599 दिसंबर, रात 2:59 – 9 दिसंबर, सुबह 7:01 | उत्तरा भाद्रपद · शुक्ल दशमीरेवती · शुक्ल दशमीरेवती · शुक्ल एकादशीराहु काल दोपहर 12:13 – दोपहर 1:31 इस समय में पड़ता है | कैलेंडर |
| 9 दिसंबरगुरुवार | सुबह 7:02 – दोपहर 3:16 | रेवती · शुक्ल एकादशीराहु काल दोपहर 1:31 – दोपहर 2:49 इस समय में पड़ता है | कैलेंडर |
| 13 दिसंबरसोमवार | सुबह 10:50 – दोपहर 3:15दोपहर 3:15 – रात 9:39 | रोहिणी · शुक्ल पूर्णिमामृगशिरा · शुक्ल पूर्णिमा | कैलेंडर |
समय दिल्ली के हैं। विवाह जैसे बड़े संस्कार के लिए लग्न और कुंडली मिलान अपने परिवार के पंडित जी से भी ज़रूर दिखाएँ।
दूसरे मुहूर्त
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
शादी का शुभ मुहूर्त कैसे निकाला जाता है?
शादी के मुहूर्त में सबसे पहले देखा जाता है कि उस दिन कोई शुभ नक्षत्र और शुभ तिथि साथ पड़ रहे हों। फिर भद्रा का समय हटाया जाता है और यह जांचा जाता है कि चातुर्मास, खरमास, अधिक मास या गुरु-शुक्र अस्त का समय तो नहीं है। हमारी सूची यहीं तक काम करती है। इसके बाद पंडित जी वर-वधू की कुंडली देखकर लग्न यानी फेरों का ठीक समय तय करते हैं।
चातुर्मास में शादी क्यों नहीं होती?
मान्यता है कि देवशयनी एकादशी से भगवान विष्णु चार महीने के लिए योग निद्रा में चले जाते हैं और देवउठनी एकादशी को जागते हैं। इस समय को चातुर्मास कहते हैं। इन महीनों में शादी, गृह प्रवेश और मुंडन जैसे बड़े संस्कार नहीं किए जाते, बल्कि पूजा, व्रत और साधना पर ध्यान दिया जाता है। देवउठनी एकादशी के बाद से फिर शादियों का मौसम शुरू हो जाता है।
खरमास में शादी क्यों नहीं करते?
जब सूर्य धनु या मीन राशि में होता है, तो उस लगभग एक-एक महीने के समय को खरमास या मलमास कहते हैं। ये दोनों राशियां गुरु ग्रह की हैं, और परंपरा में माना जाता है कि इस समय सूर्य का शुभ असर कम रहता है। इसलिए उत्तर भारत में खरमास के दौरान शादी, सगाई और गृह प्रवेश टाले जाते हैं। सूर्य के अगली राशि में जाते ही शुभ काम फिर शुरू होते हैं।
गुरु या शुक्र अस्त होने पर शादी क्यों नहीं होती?
जब कोई ग्रह आसमान में सूर्य के बहुत पास आ जाता है, तो वह दिखाई नहीं देता और उसे अस्त कहते हैं। ज्योतिष में गुरु को वैवाहिक जीवन और शुभता का, और शुक्र को प्रेम और दांपत्य सुख का ग्रह माना जाता है। इनमें से किसी के भी अस्त रहने पर शादी को अच्छा नहीं माना जाता। यह समय कुछ हफ़्तों तक चल सकता है, इसलिए हमारी सूची इन दिनों को हटा देती है।
क्या केवल इस सूची से शादी की तारीख तय कर सकते हैं?
यह सूची आपको वे दिन दिखाती है जो पंचांग के आम नियमों पर शुभ बैठते हैं, इसलिए तारीखें छांटने के लिए यह अच्छी शुरुआत है। लेकिन शादी में वर और वधू की कुंडली का मिलान, दोनों की राशि के हिसाब से दिन की जांच और फेरों का लग्न भी देखा जाता है। कई परिवारों के अपने कुल नियम भी होते हैं। इसलिए अंतिम फ़ैसला अपने पंडित जी से सलाह लेकर ही करें।
भद्रा में शादी क्यों नहीं करते?
पंचांग में ग्यारह करण होते हैं और उनमें से विष्टि करण को भद्रा कहते हैं। परंपरा में भद्रा के समय को शुभ कामों के लिए ठीक नहीं माना जाता, चाहे वह शादी हो, गृह प्रवेश हो या राखी बांधना। इसलिए हमारी सूची में जिस दिन शुभ नक्षत्र और तिथि साथ पड़ते हैं, उसमें से भी भद्रा का हिस्सा हटा दिया जाता है और केवल बचा हुआ समय दिखाया जाता है।