सीधा जवाब
मई 2027 में वैशाख – ज्येष्ठ मास है। इस महीने 2 एकादशी, 1 पूर्णिमा, 1 अमावस्या और 1 बड़े त्योहार हैं।
- 1कृ. दशमी
- 2कृ. एकादशी
- 3कृ. द्वादशी
- 4कृ. त्रयोदशी
- 5कृ. चतुर्दशी
- 6कृ. अमावस्या
- 7शु. प्रतिपदा
- 8शु. द्वितीया
- 9शु. तृतीया
- 10शु. चतुर्थी
- 11शु. षष्ठी
- 12शु. सप्तमी
- 13शु. अष्टमी
- 14शु. नवमी
- 15शु. दशमी
- 16शु. एकादशी
- 17शु. द्वादशी
- 18शु. त्रयोदशी
- 19शु. चतुर्दशी
- 20शु. पूर्णिमा
- 21कृ. प्रतिपदा
- 22कृ. द्वितीया
- 23कृ. तृतीया
- 24कृ. चतुर्थी
- 25कृ. पंचमी
- 26कृ. षष्ठी
- 27कृ. सप्तमी
- 28कृ. सप्तमी
- 29कृ. अष्टमी
- 30कृ. नवमी
- 31कृ. दशमी
- त्योहार
- एकादशी
- पूर्णिमा
- अमावस्या
- प्रदोष
- संकष्टी
मई 2027 के व्रत और त्योहार
- 2 मई, रविवारवरूथिनी एकादशी
- 3 मई, सोमवारप्रदोष
- 6 मई, गुरुवारअमावस्या
- 9 मई, रविवारअक्षय तृतीया
- 16 मई, रविवारमोहिनी एकादशी
- 17 मई, सोमवारप्रदोष
- 20 मई, गुरुवारपूर्णिमा
- 23 मई, रविवारसंकष्टी
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
मई 2027 में एकादशी कब है?
मई 2027 में एकादशी 2 मई (वरूथिनी एकादशी), 16 मई (मोहिनी एकादशी) को है। एकादशी उस दिन रखी जाती है जिस दिन सूर्योदय के समय एकादशी तिथि हो। तिथि के शुरू और ख़त्म होने का पूरा समय एकादशी की सालाना सूची में दिया गया है।
मई 2027 में पूर्णिमा कब है?
मई 2027 में पूर्णिमा 20 मई को है। पूर्णिमा पर सत्यनारायण कथा, स्नान और दान की परंपरा है। कुछ परिवार पूर्णिमा का व्रत एक दिन पहले शाम को रखते हैं, जब पूर्णिमा चंद्रोदय से पहले शुरू हो जाए।
मई 2027 में अमावस्या कब है?
मई 2027 में अमावस्या 6 मई को है। अमावस्या पर पितरों के लिए तर्पण और दान किया जाता है। सोमवार की अमावस्या को सोमवती और शनिवार की अमावस्या को शनि अमावस्या कहते हैं।
मई 2027 में प्रदोष व्रत कब है?
मई 2027 में प्रदोष व्रत 3 मई, 17 मई को है। प्रदोष उस दिन रखा जाता है जिस दिन त्रयोदशी तिथि शाम के प्रदोष काल में हो। इस व्रत में शाम को भगवान शिव की पूजा की जाती है।
मई 2027 में कौन से त्योहार हैं?
मई 2027 में 9 मई (अक्षय तृतीया) पड़ते हैं। हर त्योहार के पेज पर उसकी तारीख़, तिथि का समय, मुहूर्त और पूजा की जानकारी दी गई है।
मई 2027 में कौन सा हिंदू महीना है?
उत्तर भारत की पूर्णिमांत गणना से मई 2027 में वैशाख – ज्येष्ठ मास है। पूर्णिमांत में महीना पूर्णिमा के बाद बदलता है, जबकि अमांत (दक्षिण और पश्चिम भारत) में अमावस्या के बाद, इसलिए कृष्ण पक्ष में दोनों के नाम एक महीना अलग होते हैं।