गृह प्रवेश मुहूर्त 2027: शुभ तारीख़ें और समय
सीधा जवाब
2027 में गृह प्रवेश मुहूर्त के 35 शुभ दिन हैं। सबसे ज़्यादा 7 दिन मई 2027 में हैं। अगला शुभ दिन शुक्रवार, 15 जनवरी 2027 है।
नए घर में पहली बार कदम रखना हर परिवार के लिए खुशी और भावनाओं से भरा पल होता है। हिंदू परंपरा में इसे गृह प्रवेश कहते हैं और इसके लिए शुभ दिन और समय चुना जाता है, ताकि घर में सुख, शांति और बरकत बनी रहे। आमतौर पर इस दिन वास्तु पूजा, हवन और कलश स्थापना होती है और रसोई में पहली बार दूध उबाला जाता है। लोग यह सूची इसलिए देखते हैं ताकि घर का काम, सामान की ढुलाई और पूजा की तैयारी एक तय दिन के हिसाब से कर सकें। तालिका में हर शुभ दिन के लिए दिल्ली के समय से वह समय दिया गया है जब दिन के उजाले में शुभ नक्षत्र और तिथि साथ हों। अंतिम समय अपने पंडित जी से पक्का कर लें।
ये तारीख़ें किस नियम से निकलीं
शुभकाल पर गृह प्रवेश के लिए दिन का वह समय, यानी सूर्योदय से सूर्यास्त तक, देखा जाता है जब कोई स्थिर या कोमल नक्षत्र (रोहिणी, मृगशिरा, उत्तरा फाल्गुनी, चित्रा, अनुराधा, उत्तराषाढ़ा, उत्तरा भाद्रपद या रेवती) दोनों पक्षों की द्वितीया, तृतीया, पंचमी, षष्ठी, सप्तमी, दशमी, एकादशी, द्वादशी या त्रयोदशी के साथ पड़े। मंगलवार और भद्रा का समय शामिल नहीं किया जाता। चातुर्मास, खरमास, अधिक मास और गुरु या शुक्र के अस्त रहने के दिन भी सूची से बाहर रखे जाते हैं।
- शुभ नक्षत्र: रोहिणी, मृगशिरा, उत्तरा फाल्गुनी, चित्रा, अनुराधा, उत्तराषाढ़ा, उत्तरा भाद्रपद, रेवती
- शुक्ल पक्ष की तिथियाँ: द्वितीया, तृतीया, पंचमी, षष्ठी, सप्तमी, दशमी, एकादशी, द्वादशी, त्रयोदशी
- कृष्ण पक्ष की तिथियाँ: द्वितीया, तृतीया, पंचमी, षष्ठी, सप्तमी, दशमी, एकादशी, द्वादशी, त्रयोदशी
- वार: रविवार, सोमवार, बुधवार, गुरुवार, शुक्रवार, शनिवार
- समय की खिड़की: सूर्योदय से सूर्यास्त तक, कम से कम 45 मिनट
- हटाए गए समय: भद्रा (विष्टि करण), चातुर्मास (14 जुलाई से 10 नवंबर), खरमास (सूर्य धनु या मीन में), अधिक मास, गुरु या शुक्र अस्त
गणना का तरीका और जाँच की स्थिति
- नियम संस्करण: 1.1 (2026-11-03)
- परंपरा: उत्तर भारतीय पंचांगों में आम तौर पर देखी जाने वाली शर्तें (ऊपर दी गई); यह किसी एक ग्रंथ या पंडित की सूची नहीं है।
- तरीका: हर दिन के लिए नक्षत्र, तिथि और करण के बदलने का समय सेकंड तक निकाला गया, शुभ नक्षत्र और शुभ तिथि का साझा समय लिया गया, भद्रा हटाई गई और कम से कम तय मिनट वाला समय रखा गया। समय दिल्ली (28.6139° उ., 77.2090° पू., IST) के हैं।
- राहु काल: इन खिड़कियों से राहु काल नहीं हटाया गया है। जिस पंक्ति में राहु काल पड़ता है, वहाँ यह लिखा है, ताकि अंतिम समय चुनते समय आप उसे छोड़ सकें।
- जाँच: केवल स्वचालित जाँच: हर खिड़की को एक अलग स्क्रिप्ट मिनट-दर-मिनट दोबारा जाँचती है। किसी पंडित या विद्वान ने इन नियमों की समीक्षा नहीं की है।
गृह प्रवेश मुहूर्त 2027: महीनेवार सूची
जनवरी 2027 (4)
| तारीख़ | मुहूर्त का समय | नक्षत्र / तिथि | कैलेंडर |
|---|---|---|---|
| 15 जनवरीशुक्रवार | सुबह 7:15 – दोपहर 2:14 | रेवती · शुक्ल सप्तमीराहु काल सुबह 11:12 – दोपहर 12:31 इस समय में पड़ता है | कैलेंडर |
| 20 जनवरीबुधवार | सुबह 7:14 – शाम 4:17 | मृगशिरा · शुक्ल त्रयोदशीराहु काल दोपहर 12:32 – दोपहर 1:52 इस समय में पड़ता है | कैलेंडर |
| 28 जनवरीगुरुवार | दोपहर 3:53 – शाम 5:57 | चित्रा · कृष्ण सप्तमी | कैलेंडर |
| 31 जनवरीरविवार | सुबह 7:10 – शाम 5:59 | अनुराधा · कृष्ण दशमीराहु काल शाम 4:38 – शाम 5:59 इस समय में पड़ता है | कैलेंडर |
फ़रवरी 2027 (5)
| तारीख़ | मुहूर्त का समय | नक्षत्र / तिथि | कैलेंडर |
|---|---|---|---|
| 4 फ़रवरीगुरुवार | दोपहर 3:33 – शाम 4:32 | उत्तराषाढ़ा · कृष्ण त्रयोदशी | कैलेंडर |
| 11 फ़रवरीगुरुवार | सुबह 7:03 – शाम 6:08 | रेवती · शुक्ल पंचमीराहु काल दोपहर 1:59 – दोपहर 3:22 इस समय में पड़ता है | कैलेंडर |
| 22 फ़रवरीसोमवार | सुबह 11:55 – शाम 6:16 | उत्तरा फाल्गुनी · कृष्ण द्वितीया | कैलेंडर |
| 25 फ़रवरीगुरुवार | सुबह 6:51 – सुबह 9:33 | चित्रा · कृष्ण पंचमी | कैलेंडर |
| 27 फ़रवरीशनिवार | सुबह 11:40 – शाम 6:19 | अनुराधा · कृष्ण सप्तमी | कैलेंडर |
मार्च 2027 (5)
| तारीख़ | मुहूर्त का समय | नक्षत्र / तिथि | कैलेंडर |
|---|---|---|---|
| 4 मार्चगुरुवार | सुबह 6:44 – सुबह 7:25सुबह 7:25 – शाम 6:23 | उत्तराषाढ़ा · कृष्ण एकादशीउत्तराषाढ़ा · कृष्ण द्वादशीराहु काल दोपहर 2:01 – दोपहर 3:28 इस समय में पड़ता है | कैलेंडर |
| 10 मार्चबुधवार | सुबह 6:37 – सुबह 10:53सुबह 10:53 – दोपहर 3:53दोपहर 3:53 – शाम 6:26 | उत्तरा भाद्रपद · शुक्ल द्वितीयारेवती · शुक्ल द्वितीयारेवती · शुक्ल तृतीयाराहु काल दोपहर 12:32 – दोपहर 2:00 इस समय में पड़ता है | कैलेंडर |
| 11 मार्चगुरुवार | सुबह 6:36 – सुबह 11:20 | रेवती · शुक्ल तृतीया | कैलेंडर |
| 14 मार्चरविवार | सुबह 10:24 – दोपहर 12:32दोपहर 12:32 – शाम 6:29 | रोहिणी · शुक्ल षष्ठीरोहिणी · शुक्ल सप्तमीराहु काल शाम 4:59 – शाम 6:29 इस समय में पड़ता है | कैलेंडर |
| 15 मार्चसोमवार | सुबह 6:31 – सुबह 9:26सुबह 9:26 – सुबह 10:52 | रोहिणी · शुक्ल सप्तमीमृगशिरा · शुक्ल सप्तमीराहु काल सुबह 8:01 – सुबह 9:31 इस समय में पड़ता है | कैलेंडर |
अप्रैल 2027 (3)
| तारीख़ | मुहूर्त का समय | नक्षत्र / तिथि | कैलेंडर |
|---|---|---|---|
| 18 अप्रैलरविवार | सुबह 6:06 – सुबह 7:43सुबह 7:43 – शाम 6:48 | उत्तरा फाल्गुनी · शुक्ल द्वादशीउत्तरा फाल्गुनी · शुक्ल त्रयोदशीराहु काल शाम 5:12 – शाम 6:48 इस समय में पड़ता है | कैलेंडर |
| 23 अप्रैलशुक्रवार | सुबह 5:48 – दोपहर 3:55 | अनुराधा · कृष्ण तृतीयाराहु काल सुबह 10:42 – दोपहर 12:20 इस समय में पड़ता है | कैलेंडर |
| 28 अप्रैलबुधवार | सुबह 5:44 – दोपहर 12:31 | उत्तराषाढ़ा · कृष्ण सप्तमीराहु काल दोपहर 12:19 – दोपहर 1:58 इस समय में पड़ता है | कैलेंडर |
मई 2027 (7)
| तारीख़ | मुहूर्त का समय | नक्षत्र / तिथि | कैलेंडर |
|---|---|---|---|
| 3 मईसोमवार | सुबह 5:39 – शाम 6:57 | उत्तरा भाद्रपद · कृष्ण द्वादशीराहु काल सुबह 7:19 – सुबह 8:59 इस समय में पड़ता है | कैलेंडर |
| 8 मईशनिवार | सुबह 5:35 – सुबह 11:43सुबह 11:43 – शाम 7:00 | रोहिणी · शुक्ल द्वितीयारोहिणी · शुक्ल तृतीयाराहु काल सुबह 8:57 – सुबह 10:37 इस समय में पड़ता है | कैलेंडर |
| 9 मईरविवार | सुबह 5:35 – सुबह 9:04 | मृगशिरा · शुक्ल तृतीया | कैलेंडर |
| 15 मईशनिवार | दोपहर 12:00 – शाम 6:18शाम 6:18 – शाम 7:05 | उत्तरा फाल्गुनी · शुक्ल दशमीउत्तरा फाल्गुनी · शुक्ल एकादशी | कैलेंडर |
| 17 मईसोमवार | सुबह 11:29 – शाम 4:29शाम 4:29 – शाम 7:06 | चित्रा · शुक्ल द्वादशीचित्रा · शुक्ल त्रयोदशी | कैलेंडर |
| 30 मईरविवार | सुबह 11:32 – शाम 7:13 | उत्तरा भाद्रपद · कृष्ण दशमीराहु काल शाम 5:30 – शाम 7:13 इस समय में पड़ता है | कैलेंडर |
| 31 मईसोमवार | सुबह 10:03 – दोपहर 12:36दोपहर 12:36 – शाम 7:14 | उत्तरा भाद्रपद · कृष्ण एकादशीरेवती · कृष्ण एकादशी | कैलेंडर |
जून 2027 (3)
| तारीख़ | मुहूर्त का समय | नक्षत्र / तिथि | कैलेंडर |
|---|---|---|---|
| 13 जूनरविवार | शाम 5:00 – शाम 7:20 | चित्रा · शुक्ल दशमीराहु काल शाम 5:35 – शाम 7:20 इस समय में पड़ता है | कैलेंडर |
| 14 जूनसोमवार | सुबह 5:23 – दोपहर 2:07 | चित्रा · शुक्ल एकादशीराहु काल सुबह 7:08 – सुबह 8:52 इस समय में पड़ता है | कैलेंडर |
| 21 जूनसोमवार | सुबह 5:24 – सुबह 10:36सुबह 10:36 – शाम 7:22 | उत्तराषाढ़ा · कृष्ण द्वितीयाउत्तराषाढ़ा · कृष्ण तृतीयाराहु काल सुबह 7:09 – सुबह 8:53 इस समय में पड़ता है | कैलेंडर |
जुलाई 2027 (1)
| तारीख़ | मुहूर्त का समय | नक्षत्र / तिथि | कैलेंडर |
|---|---|---|---|
| 2 जुलाईशुक्रवार | सुबह 5:27 – दोपहर 3:24 | रोहिणी · कृष्ण त्रयोदशीराहु काल सुबह 10:41 – दोपहर 12:25 इस समय में पड़ता है | कैलेंडर |
नवंबर 2027 (4)
| तारीख़ | मुहूर्त का समय | नक्षत्र / तिथि | कैलेंडर |
|---|---|---|---|
| 11 नवंबरगुरुवार | सुबह 6:40 – सुबह 7:02सुबह 7:02 – सुबह 10:08सुबह 10:08 – शाम 5:30 | उत्तरा भाद्रपद · शुक्ल द्वादशीरेवती · शुक्ल द्वादशीरेवती · शुक्ल त्रयोदशीराहु काल दोपहर 1:26 – दोपहर 2:47 इस समय में पड़ता है | कैलेंडर |
| 12 नवंबरशुक्रवार | सुबह 6:41 – सुबह 7:56 | रेवती · शुक्ल त्रयोदशी | कैलेंडर |
| 15 नवंबरसोमवार | सुबह 7:29 – शाम 5:28 | रोहिणी · कृष्ण द्वितीयाराहु काल सुबह 8:04 – सुबह 9:24 इस समय में पड़ता है | कैलेंडर |
| 25 नवंबरगुरुवार | सुबह 6:51 – सुबह 10:51सुबह 10:51 – शाम 5:24 | चित्रा · कृष्ण द्वादशीचित्रा · कृष्ण त्रयोदशीराहु काल दोपहर 1:27 – दोपहर 2:46 इस समय में पड़ता है | कैलेंडर |
दिसंबर 2027 (3)
| तारीख़ | मुहूर्त का समय | नक्षत्र / तिथि | कैलेंडर |
|---|---|---|---|
| 2 दिसंबरगुरुवार | दोपहर 1:44 – शाम 5:24 | उत्तराषाढ़ा · शुक्ल पंचमीराहु काल दोपहर 1:29 – दोपहर 2:47 इस समय में पड़ता है | कैलेंडर |
| 8 दिसंबरबुधवार | सुबह 7:01 – शाम 4:13शाम 4:13 – शाम 5:24 | उत्तरा भाद्रपद · शुक्ल दशमीरेवती · शुक्ल दशमीराहु काल दोपहर 12:13 – दोपहर 1:31 इस समय में पड़ता है | कैलेंडर |
| 9 दिसंबरगुरुवार | सुबह 7:02 – दोपहर 3:16 | रेवती · शुक्ल एकादशीराहु काल दोपहर 1:31 – दोपहर 2:49 इस समय में पड़ता है | कैलेंडर |
समय दिल्ली के हैं। विवाह जैसे बड़े संस्कार के लिए लग्न और कुंडली मिलान अपने परिवार के पंडित जी से भी ज़रूर दिखाएँ।
दूसरे मुहूर्त
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
गृह प्रवेश के लिए कौन सा दिन शुभ होता है?
गृह प्रवेश के लिए वह दिन अच्छा माना जाता है जब दिन के समय रोहिणी, मृगशिरा, उत्तरा फाल्गुनी, चित्रा, अनुराधा, उत्तराषाढ़ा, उत्तरा भाद्रपद या रेवती जैसा स्थिर या कोमल नक्षत्र किसी शुभ तिथि के साथ हो। स्थिर नक्षत्र घर में स्थिरता का प्रतीक माने जाते हैं। मंगलवार, भद्रा, चातुर्मास और खरमास से बचा जाता है। हमारी तालिका इन्हीं नियमों से बने दिन दिखाती है।
मंगलवार को गृह प्रवेश क्यों नहीं करते?
मंगलवार का स्वामी मंगल ग्रह है, जिसे ज्योतिष में अग्नि और उग्रता से जोड़ा जाता है। परंपरा में माना जाता है कि नए घर की शुरुआत ऐसे दिन होनी चाहिए जिसका स्वभाव शांत और स्थिर हो, इसलिए मंगलवार को गृह प्रवेश टाला जाता है। कई क्षेत्रों में शनिवार और रविवार को भी कुछ परिवार गृह प्रवेश नहीं करते, इसलिए अपने घर की परंपरा भी ध्यान में रखें।
गृह प्रवेश की पूजा में क्या-क्या होता है?
आमतौर पर गृह प्रवेश के दिन सबसे पहले गणेश पूजा होती है, फिर वास्तु पूजा और नवग्रह शांति का हवन किया जाता है। घर की महिला पानी से भरा कलश लेकर दाहिना पैर पहले अंदर रखती है। दरवाज़े पर आम के पत्तों का तोरण और रंगोली बनाई जाती है। रसोई में पहली बार दूध उबालकर उफनने दिया जाता है, जिसे बरकत का संकेत मानते हैं। अंत में ब्राह्मण भोजन और दान होता है।
किराए के घर में जाने के लिए भी मुहूर्त देखना चाहिए?
बहुत से परिवार किराए के घर में जाते समय भी शुभ दिन देखते हैं, हालांकि नियम उतने सख्त नहीं रखे जाते जितने अपने नए घर के लिए। अक्सर लोग बस एक अच्छा दिन चुनकर गणेश पूजा करते हैं, कलश रखते हैं और दूध उबालते हैं। अगर नौकरी या मजबूरी में तुरंत जाना हो, तो बाद में किसी शुभ दिन छोटी पूजा करवाना भी आम चलन है।
क्या चातुर्मास या खरमास में गृह प्रवेश कर सकते हैं?
परंपरा में नए घर का गृह प्रवेश चातुर्मास और खरमास में नहीं किया जाता, क्योंकि इन समयों को बड़े शुभ कामों के लिए ठीक नहीं माना जाता। इसलिए हमारी सूची में ये दिन नहीं दिखते। अगर इन महीनों में मजबूरी में घर बदलना पड़े, तो कई लोग बिना बड़ी पूजा के सामान रख देते हैं और बाद में शुभ मुहूर्त आने पर विधिवत गृह प्रवेश पूजा करवाते हैं।
मुहूर्त के दिन पूरा सामान न पहुंचे तो क्या करें?
गृह प्रवेश के लिए पूरा सामान उसी दिन पहुंचना ज़रूरी नहीं है। मुहूर्त के समय पूजा का सामान, कलश, भगवान की तस्वीर, कुछ अनाज, नमक और दूध लेकर घर में प्रवेश करें और पूजा पूरी कर लें। बाकी सामान अगले दिनों में आराम से लाया जा सकता है। कई परिवार परंपरा के तौर पर पूजा वाली रात उसी घर में सोते हैं।