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मुंडन मुहूर्त 2027: शुभ तारीख़ें और समय

सीधा जवाब

2027 में मुंडन मुहूर्त के 38 शुभ दिन हैं। सबसे ज़्यादा 7 दिन मई 2027 में हैं। अगला शुभ दिन शुक्रवार, 15 जनवरी 2027 है।

मुंडन, जिसे चूड़ाकर्म संस्कार भी कहते हैं, बच्चे के जन्म के बाल पहली बार उतारने की रस्म है। यह हिंदू धर्म के सोलह संस्कारों में से एक है और माना जाता है कि इससे बच्चे को अच्छी सेहत, लंबी उम्र और नई शुरुआत का आशीर्वाद मिलता है। कई परिवार यह रस्म घर पर करते हैं, तो कई किसी तीर्थ, कुल देवता के मंदिर या नदी के किनारे जाकर करते हैं। लोग यह सूची इसलिए देखते हैं ताकि रिश्तेदारों को बुलाने, यात्रा और पूजा की तैयारी शुभ दिन के हिसाब से कर सकें। तालिका में हर शुभ दिन के लिए दिल्ली के समय से दिन का वह समय दिया गया है जब शुभ नक्षत्र और तिथि साथ हों। बच्चे की उम्र और कुल की परंपरा भी ध्यान में रखें।

ये तारीख़ें किस नियम से निकलीं

शुभकाल पर मुंडन के लिए दिन का वह समय, यानी सूर्योदय से सूर्यास्त तक, देखा जाता है जब अश्विनी, मृगशिरा, पुनर्वसु, पुष्य, हस्त, चित्रा, स्वाती, ज्येष्ठा, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा या रेवती नक्षत्र द्वितीया, तृतीया, पंचमी, सप्तमी, दशमी, एकादशी या त्रयोदशी तिथि के साथ पड़े। दिन सोमवार, बुधवार, गुरुवार या शुक्रवार होना चाहिए और भद्रा का समय हटा दिया जाता है। चातुर्मास, खरमास, अधिक मास और गुरु या शुक्र के अस्त रहने के दिन सूची से बाहर रखे जाते हैं।

  • शुभ नक्षत्र: अश्विनी, मृगशिरा, पुनर्वसु, पुष्य, हस्त, चित्रा, स्वाति, ज्येष्ठा, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा, रेवती
  • शुक्ल पक्ष की तिथियाँ: द्वितीया, तृतीया, पंचमी, सप्तमी, दशमी, एकादशी, त्रयोदशी
  • कृष्ण पक्ष की तिथियाँ: द्वितीया, तृतीया, पंचमी, सप्तमी, दशमी, एकादशी, त्रयोदशी
  • वार: सोमवार, बुधवार, गुरुवार, शुक्रवार
  • समय की खिड़की: सूर्योदय से सूर्यास्त तक, कम से कम 45 मिनट
  • हटाए गए समय: भद्रा (विष्टि करण), चातुर्मास (14 जुलाई से 10 नवंबर), खरमास (सूर्य धनु या मीन में), अधिक मास, गुरु या शुक्र अस्त

गणना का तरीका और जाँच की स्थिति

  • नियम संस्करण: 1.1 (2026-11-03)
  • परंपरा: उत्तर भारतीय पंचांगों में आम तौर पर देखी जाने वाली शर्तें (ऊपर दी गई); यह किसी एक ग्रंथ या पंडित की सूची नहीं है।
  • तरीका: हर दिन के लिए नक्षत्र, तिथि और करण के बदलने का समय सेकंड तक निकाला गया, शुभ नक्षत्र और शुभ तिथि का साझा समय लिया गया, भद्रा हटाई गई और कम से कम तय मिनट वाला समय रखा गया। समय दिल्ली (28.6139° उ., 77.2090° पू., IST) के हैं।
  • राहु काल: इन खिड़कियों से राहु काल नहीं हटाया गया है। जिस पंक्ति में राहु काल पड़ता है, वहाँ यह लिखा है, ताकि अंतिम समय चुनते समय आप उसे छोड़ सकें।
  • जाँच: केवल स्वचालित जाँच: हर खिड़की को एक अलग स्क्रिप्ट मिनट-दर-मिनट दोबारा जाँचती है। किसी पंडित या विद्वान ने इन नियमों की समीक्षा नहीं की है।

मुंडन मुहूर्त 2027: महीनेवार सूची

जनवरी 2027 (3)

तारीख़मुहूर्त का समयनक्षत्र / तिथिकैलेंडर
15 जनवरीशुक्रवारसुबह 7:15 – दोपहर 2:14रेवती · शुक्ल सप्तमीराहु काल सुबह 11:12 – दोपहर 12:31 इस समय में पड़ता हैकैलेंडर
20 जनवरीबुधवारसुबह 7:14 – शाम 4:17मृगशिरा · शुक्ल त्रयोदशीराहु काल दोपहर 12:32 – दोपहर 1:52 इस समय में पड़ता हैकैलेंडर
28 जनवरीगुरुवारदोपहर 3:53 – शाम 5:57चित्रा · कृष्ण सप्तमीकैलेंडर

फ़रवरी 2027 (6)

तारीख़मुहूर्त का समयनक्षत्र / तिथिकैलेंडर
1 फ़रवरीसोमवारसुबह 8:42 – शाम 6:00ज्येष्ठा · कृष्ण एकादशीराहु काल सुबह 8:31 – सुबह 9:52 इस समय में पड़ता हैकैलेंडर
8 फ़रवरीसोमवारसुबह 7:05 – शाम 6:06शतभिषा · शुक्ल द्वितीयाराहु काल सुबह 8:28 – सुबह 9:50 इस समय में पड़ता हैकैलेंडर
11 फ़रवरीगुरुवारसुबह 7:03 – शाम 6:08रेवती · शुक्ल पंचमीराहु काल दोपहर 1:59 – दोपहर 3:22 इस समय में पड़ता हैकैलेंडर
18 फ़रवरीगुरुवारदोपहर 2:28 – शाम 6:13पुनर्वसु · शुक्ल त्रयोदशीराहु काल दोपहर 2:00 – दोपहर 3:24 इस समय में पड़ता हैकैलेंडर
19 फ़रवरीशुक्रवारसुबह 6:56 – सुबह 11:15पुष्य · शुक्ल त्रयोदशीराहु काल सुबह 11:10 – दोपहर 12:35 इस समय में पड़ता हैकैलेंडर
25 फ़रवरीगुरुवारसुबह 6:51 – सुबह 9:33सुबह 9:33 – शाम 6:18चित्रा · कृष्ण पंचमीस्वाति · कृष्ण पंचमीराहु काल दोपहर 2:00 – दोपहर 3:26 इस समय में पड़ता हैकैलेंडर

मार्च 2027 (4)

तारीख़मुहूर्त का समयनक्षत्र / तिथिकैलेंडर
5 मार्चशुक्रवारसुबह 9:54 – शाम 6:23श्रवण · कृष्ण त्रयोदशीराहु काल सुबह 11:05 – दोपहर 12:33 इस समय में पड़ता हैकैलेंडर
10 मार्चबुधवारसुबह 10:53 – दोपहर 3:53दोपहर 3:53 – शाम 6:26रेवती · शुक्ल द्वितीयारेवती · शुक्ल तृतीयाराहु काल दोपहर 12:32 – दोपहर 2:00 इस समय में पड़ता हैकैलेंडर
11 मार्चगुरुवारसुबह 6:36 – सुबह 11:20सुबह 11:20 – दोपहर 3:38रेवती · शुक्ल तृतीयाअश्विनी · शुक्ल तृतीयाराहु काल दोपहर 2:00 – दोपहर 3:29 इस समय में पड़ता हैकैलेंडर
15 मार्चसोमवारसुबह 9:26 – सुबह 10:52मृगशिरा · शुक्ल सप्तमीराहु काल सुबह 8:01 – सुबह 9:31 इस समय में पड़ता हैकैलेंडर

अप्रैल 2027 (1)

तारीख़मुहूर्त का समयनक्षत्र / तिथिकैलेंडर
30 अप्रैलशुक्रवारशाम 5:14 – शाम 6:56धनिष्ठा · कृष्ण दशमीकैलेंडर

मई 2027 (7)

तारीख़मुहूर्त का समयनक्षत्र / तिथिकैलेंडर
10 मईसोमवारशाम 6:09 – शाम 7:02पुनर्वसु · शुक्ल पंचमीकैलेंडर
12 मईबुधवारसुबह 5:33 – दोपहर 2:56पुष्य · शुक्ल सप्तमीराहु काल दोपहर 12:18 – दोपहर 1:59 इस समय में पड़ता हैकैलेंडर
17 मईसोमवारशाम 4:29 – शाम 7:06चित्रा · शुक्ल त्रयोदशीकैलेंडर
21 मईशुक्रवारशाम 5:24 – शाम 7:08ज्येष्ठा · कृष्ण द्वितीयाकैलेंडर
27 मईगुरुवारशाम 5:18 – शाम 7:12धनिष्ठा · कृष्ण सप्तमीकैलेंडर
28 मईशुक्रवारसुबह 5:25 – सुबह 6:27धनिष्ठा · कृष्ण सप्तमीकैलेंडर
31 मईसोमवारदोपहर 12:36 – शाम 7:14रेवती · कृष्ण एकादशीकैलेंडर

जून 2027 (5)

तारीख़मुहूर्त का समयनक्षत्र / तिथिकैलेंडर
2 जूनबुधवारसुबह 8:29 – दोपहर 12:17अश्विनी · कृष्ण त्रयोदशीकैलेंडर
7 जूनसोमवारसुबह 5:23 – दोपहर 3:26पुनर्वसु · शुक्ल तृतीयाराहु काल सुबह 7:07 – सुबह 8:51 इस समय में पड़ता हैकैलेंडर
14 जूनसोमवारसुबह 5:23 – दोपहर 2:07चित्रा · शुक्ल एकादशीराहु काल सुबह 7:08 – सुबह 8:52 इस समय में पड़ता हैकैलेंडर
23 जूनबुधवारदोपहर 3:43 – शाम 7:22धनिष्ठा · कृष्ण पंचमीकैलेंडर
24 जूनगुरुवारसुबह 5:25 – दोपहर 2:21दोपहर 2:21 – शाम 6:10धनिष्ठा · कृष्ण पंचमीशतभिषा · कृष्ण पंचमीराहु काल दोपहर 2:08 – दोपहर 3:53 इस समय में पड़ता हैकैलेंडर

जुलाई 2027 (1)

तारीख़मुहूर्त का समयनक्षत्र / तिथिकैलेंडर
5 जुलाईसोमवारसुबह 5:28 – सुबह 9:19सुबह 9:19 – शाम 7:23पुनर्वसु · शुक्ल द्वितीयापुष्य · शुक्ल द्वितीयाराहु काल सुबह 7:13 – सुबह 8:57 इस समय में पड़ता हैकैलेंडर

नवंबर 2027 (7)

तारीख़मुहूर्त का समयनक्षत्र / तिथिकैलेंडर
11 नवंबरगुरुवारसुबह 10:08 – शाम 5:30रेवती · शुक्ल त्रयोदशीराहु काल दोपहर 1:26 – दोपहर 2:47 इस समय में पड़ता हैकैलेंडर
12 नवंबरशुक्रवारसुबह 6:41 – सुबह 7:56सुबह 7:56 – सुबह 10:21रेवती · शुक्ल त्रयोदशीअश्विनी · शुक्ल त्रयोदशीकैलेंडर
18 नवंबरगुरुवारसुबह 6:46 – शाम 5:26पुनर्वसु · कृष्ण पंचमीराहु काल दोपहर 1:26 – दोपहर 2:46 इस समय में पड़ता हैकैलेंडर
24 नवंबरबुधवारसुबह 6:50 – दोपहर 12:12हस्त · कृष्ण एकादशीराहु काल दोपहर 12:08 – दोपहर 1:27 इस समय में पड़ता हैकैलेंडर
25 नवंबरगुरुवारसुबह 10:51 – शाम 5:24चित्रा · कृष्ण त्रयोदशीराहु काल दोपहर 1:27 – दोपहर 2:46 इस समय में पड़ता हैकैलेंडर
26 नवंबरशुक्रवारसुबह 6:52 – सुबह 9:48स्वाति · कृष्ण त्रयोदशीकैलेंडर
29 नवंबरसोमवारसुबह 9:14 – शाम 5:24ज्येष्ठा · शुक्ल द्वितीयाराहु काल सुबह 8:13 – सुबह 9:32 इस समय में पड़ता हैकैलेंडर

दिसंबर 2027 (4)

तारीख़मुहूर्त का समयनक्षत्र / तिथिकैलेंडर
3 दिसंबरशुक्रवारसुबह 6:58 – शाम 4:14श्रवण · शुक्ल पंचमीराहु काल सुबह 10:52 – दोपहर 12:11 इस समय में पड़ता हैकैलेंडर
8 दिसंबरबुधवारशाम 4:13 – शाम 5:24रेवती · शुक्ल दशमीकैलेंडर
9 दिसंबरगुरुवारसुबह 7:02 – दोपहर 3:16रेवती · शुक्ल एकादशीराहु काल दोपहर 1:31 – दोपहर 2:49 इस समय में पड़ता हैकैलेंडर
15 दिसंबरबुधवारसुबह 11:22 – शाम 4:13शाम 4:13 – शाम 5:26पुनर्वसु · कृष्ण द्वितीयापुनर्वसु · कृष्ण तृतीयाराहु काल दोपहर 12:16 – दोपहर 1:34 इस समय में पड़ता हैकैलेंडर

समय दिल्ली के हैं। विवाह जैसे बड़े संस्कार के लिए लग्न और कुंडली मिलान अपने परिवार के पंडित जी से भी ज़रूर दिखाएँ।

दूसरे मुहूर्त

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

बच्चे का मुंडन किस उम्र में कराना चाहिए?

ज़्यादातर परिवार बच्चे का मुंडन पहले या तीसरे साल में करवाते हैं। कई जगह विषम साल, यानी पहला, तीसरा, पांचवां या सातवां, ही शुभ माना जाता है। कुछ परिवारों में यह रस्म किसी खास तीर्थ या कुल देवता के स्थान पर ही होती है, इसलिए वहां जाने का मौका देखकर उम्र आगे-पीछे हो जाती है। अपने परिवार की परंपरा और बच्चे की सेहत को ध्यान में रखकर समय चुनें।

मुंडन के लिए कौन सा दिन शुभ है?

मुंडन के लिए सोमवार, बुधवार, गुरुवार और शुक्रवार अच्छे माने जाते हैं, बशर्ते उस दिन अश्विनी, पुनर्वसु, पुष्य, हस्त, श्रवण या रेवती जैसा शुभ नक्षत्र किसी शुभ तिथि के साथ हो और भद्रा न हो। चातुर्मास और खरमास में मुंडन नहीं कराया जाता। हमारी तालिका इन सब नियमों को मिलाकर दिन और उनका समय दिखाती है, ताकि आपको अलग से हिसाब न लगाना पड़े।

मंगलवार, शनिवार या रविवार को मुंडन क्यों नहीं कराते?

परंपरा में मंगलवार को मंगल ग्रह की उग्रता, शनिवार को शनि के भारीपन और रविवार को सूर्य की तेज़ी से जोड़ा जाता है। छोटे बच्चे के पहले बाल उतारने जैसी कोमल रस्म के लिए शांत स्वभाव वाले दिन बेहतर माने जाते हैं, इसलिए इन तीन दिनों से बचा जाता है। कुछ क्षेत्रों में नियम थोड़े अलग हैं, इसलिए घर के बड़ों की बात भी सुनें।

मुंडन संस्कार कहां कराना चाहिए?

मुंडन घर पर, किसी मंदिर में, नदी के किनारे या किसी तीर्थ पर कराया जा सकता है। बहुत से परिवार यह रस्म अपने कुल देवता या कुल देवी के स्थान पर करते हैं, जबकि कुछ लोग हरिद्वार, प्रयागराज, वाराणसी या तिरुपति जैसे तीर्थों पर जाते हैं। जगह चाहे जो भी हो, नाई और पंडित जी की व्यवस्था पहले से कर लें और बच्चे की सुविधा का ध्यान रखें।

मुंडन के बाद बालों का क्या करें?

मुंडन के बाद उतारे गए बाल आमतौर पर आटे की लोई में लपेटकर किसी पवित्र नदी में प्रवाहित कर दिए जाते हैं। कुछ परिवार इन्हें मंदिर में चढ़ा देते हैं, जैसे तिरुपति में बाल दान की परंपरा है। कई घरों में बाल किसी पेड़ की जड़ के पास मिट्टी में दबा दिए जाते हैं। मुंडन के बाद बच्चे के सिर पर हल्दी या चंदन का लेप लगाने का भी चलन है।

क्या लड़कियों का भी मुंडन होता है?

हां, बहुत से परिवारों में लड़कियों का भी मुंडन होता है, खासकर दक्षिण भारत और कई उत्तर भारतीय समुदायों में। कुछ परिवारों में लड़कियों के बाल पूरे नहीं उतारे जाते, बल्कि रस्म के तौर पर थोड़े से बाल काटे जाते हैं। यह पूरी तरह परिवार और क्षेत्र की परंपरा पर निर्भर करता है। मुहूर्त के नियम लड़के और लड़की दोनों के लिए एक जैसे रहते हैं।

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